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अलीगढ़:-जानिए कैसे कई घंटों की मेहनत के बाद तबला,ढोलक,हारमोनियम और गिटार से निकलती है ऐसी धुन

अलीगढ़:–हमारे भारतीय संगीत में जो तालवाद्य इस्तेमाल किए जाते हैं उनमें से कुछ ऐसे संगीत के तालवाद्य अलीगढ़ में भी तैयार ...अधिक पढ़ें

    अलीगढ़:–हमारे भारतीय संगीत में जो तालवाद्य इस्तेमाल किए जाते हैं उनमें से कुछ ऐसे संगीत के तालवाद्य अलीगढ़ में भी तैयार होते हैं. जिनमें तबला, ढोलक, हारमोनियम और गिटार मुख्य रूप से हैं. हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में ताल वाद्य बहुत ही महत्वपूर्ण है और माना जाता है कि 18वीं सदी के बाद से इनका प्रयोग गायन, वादन के लिए लगभग अनिवार्य हो गया है.इसके अलावा यह हमारे हिंदी सिनेमा में भी प्रयोग में आता है.यह तालवाद्य भारत, नेपाल, श्रीलंका, पाकिस्तान और बांग्लादेश में प्रसिद्ध है.पहले के समय में यह तालवाद्य नाच-गाने में इस्तेमाल किया जाता था.

    अलीगढ़ में बने यह तालवाद्य जैसे कि हारमोनियम, तबला, ढोलक को और भी जिलों में भेजा जाता है.अभी इस कार्य की अलीगढ़ में शुरुआत हुई है और यहां पर अभी इसकी एक ही फैक्ट्री है.जब फैक्ट्री के मालिक से बात की गई तब उन्होंने बताया की उन्हें लगभग 2 घंटे लग जाते हैं तालवाद्य में सुर लाने में.स्केल के द्वारा स्वरों को मिलाया जाता है तब जाकर तबला सुर में बजता है.नहीं तो उसकी आवाज बिखरी हुई रहती है.उन्होंने बताया कि लगभग 15 तबले 1 दिन में सुर में ला पाते हैं और यहां पर गिटार भी बनते हैं.उनके द्वारा बताया गया कि तबले को भक्ति संगीत में भी इस्तेमाल किया जाता है. हम अपने तबले को बीकानेरी पुरी से तैयार करते हैं.यह माना जाता है कि बीकानेरी पुरी सबसे अच्छी होती है.यह सभी तालवाद्य भारतीय संगीत में इस्तेमाल होते हैं.

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    Tags: Aligarh news

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