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मिलिए अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) की पहली महिला हॉकी टीम से

मिलिए अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) की पहली महिला हॉकी टीम से

कभी अपने अल्पसंख्यक दर्जे तो कभी नाम में मुस्लिम शब्द के इस्तेमाल को लेकर विवादों में घेरे जानी वाली अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की ये खबर आपकी सोच बदल सकती है

    एएमयू में लड़कियों के सपनों को एक नई उड़ान मिल रही है. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के इतिहास में पहली बार महिला हॉकी टीम मैदान में दमखम दिखाने को तैयार हो रही है. यूनिवर्सिटी में महिलाएं वॉलीबॉल और बास्केटबॉल जैसे गेम खेलती आई हैं, लेकिन ऐसा पहली बार है, जबकि एएमयू में महिलाओं को हॉकी खेलने की इजाज़त मिली है. हॉकी में पुरुषों के दबदबे के बीच नारी शक्ति को अपनी जगह बनाने का मौका देना एक ऐसी पहल है जिसकी हर कोई तारीफ कर रहा है.
    क्या है हॉकी के खेल में एएमयू का एक समृद्ध इतिहास

    हॉकी के खेल में एएमयू का एक समृद्ध इतिहास रहा है. 80 के दशक में हॉकी के कैप्टन रहे जफर इकबाल भी एएमयू से ही थे. जफर उस हॉकी टीम के कप्तान थे जिसने हॉकी में अपना आखिरी ओलिंपिक गोल्ड (मॉस्को 1980) जीता था. जफर के अलावा मसूद मिन्हाज, अहसान मोहम्मद खान,लेफ्टिनेंट ए शकूर, मदन लाल, लतीफ-उर रहमान, अख्तर हुसैन हयात , जोगेंद्र सिंह और एसएम अली सैयद जैसे कई नाम एएमयू ने दिए हैं. और इस बात की उम्मीद लगाई जा रही है आने वाले दिनों में ये लड़कियां भी इसी तरह हॉकी के मैदान में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का नाम रौशन करेंगी.

    अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में अब लड़कियां भी हॉकी खेलेंगी क़रीब एक सदी पुराने इस विश्वविद्यालय में अब तक महिला हॉकी टीम का कोई वजूद नहीं था लेकिन अब एएमयू के इतिहास में पहली बार लड़कियों की हॉकी टीम अपने जौहर दिखाने के लिए तैयार है. जिस घास के मैदान में ओलंपियन ज़फ़र इक़बाल ने ओलंपिक तक का सफर तय किया था, उसी मैदान पर छात्राएं देश के राष्ट्रीय खेल की ए,बी,सी,डी सीख रही हैं.

    मेरे जुनूं का नतीजा ज़रूर निकलेगा इसी स्याह समंदर से नूर निकलेगा

    महिला हॉकी टीम के कोच अरशद महमूद कहते हैं की पढ़ाई के साथ-साथ हॉकी को वक़्त देना इन लड़कियों के लिए आसान नहीं है.  हॉकी में माहिर होने का जुनून इन्हें क्लास के बाद प्रैक्टिस के लिए मैदान में खींच लाता है. ये लड़कियां घंटों प्रैक्टिस में जमकर पसीना बहाती हैं ताकि यूनिवर्सिटी और देश का नाम रौशन कर सकें. दोपहर तीन बजे से इनकी मैदान में हॉकी की प्रैक्टिस शुरू हो जाती है जो दिन ढलने तक जारी रहती है. और इसके बाद फिर ये लड़कियां साइकिल से अपने घर को रवाना होती है. हर रोज़ इनका यही रूटीन होता है.

    वहीं एएमयू के पीआरओ का कहना था कि यूनिवर्सिटी ने हमेशा से लड़कियों को हर मैदान में आगे रखा है. यही वजह है कि पूरे देश की यूनिवर्सिटियों में एएमयू ही इकलौती ऐसी यूनिवर्सिटी है जिसमें लड़कियों को घुड़सवारी कराई जाती है. इतने सालों तक महिला हॉकी टीम क्यों नहीं बनी उसपर उन्होंने तकनीकी परेशानियों का हवाला देते हुए कहा कि अब ये मैदान भी लड़कियों के लिए अछूता नहीं रह गया है. अब ये इस मैदान में भी बाज़ी मारेंगी. देखें रिपोर्ट.

     

    Tags: Aligarh Muslim University, Amu Schumer

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