अलीगढ़ किसान महापंचायत में बोले टिकैत- मुझ पर पूर्व नियोजित था BJP कार्यकर्ताओं का हमला

राकेश टिकैत ने किसानों से इस साल के अंत तक आंदोलन करने के लिए मानसिक रूप से तैयार करने को कहा (फाइल फोटो)

राकेश टिकैत ने किसानों से इस साल के अंत तक आंदोलन करने के लिए मानसिक रूप से तैयार करने को कहा (फाइल फोटो)

अलीगढ़ (Aligarh) के भीमलखेड़ा गांव में किसान महापंचायत (Kisan Mahapanchayat) को संबोधित करते हुए राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) ने कहा, आने वाले समय में किसानों के सामने चुनौतियां ही चुनौतियां हैं, लेकिन हम पर होने वाले हमले अस्तित्व की लड़ाई में हमारे संघर्ष और संकल्प को मजबूत कर रहे हैं

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अलीगढ़. केंद्र सरकार के तीन नये कृषि कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ आंदोलनरत भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) ने कहा कि राजस्थान के अलवर (Alwar) में उन पर किया गया हमला, बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा पूर्व नियोजित था. टिकैत ने कहा कि इसे एक चुनौती और आंख खोलने वाली घटना की तरह याद रखना चाहिए. शनिवार को अलीगढ़ के भीमलखेड़ा गांव में किसान महापंचायत (Kisan Mahapanchayat) को संबोधित करते हुए टिकैत ने कहा, आने वाले समय में किसानों के सामने चुनौतियां ही चुनौतियां हैं, लेकिन हम पर होने वाले हमले अस्तित्व की लड़ाई में हमारे संघर्ष और संकल्प को मजबूत कर रहे हैं.

महापंचायत के बाद पत्रकारों से बातचीत में टिकैत ने कहा, हम मानसिक रूप से ऐसी घटनाओं के लिए तैयार हैं. बता दें कि शुक्रवार को राजस्थान के अलवर जिले में राकेश टिकैत के काफिले पर पथराव किया गया था. इस मामले में पुलिस ने एक छात्र नेता कुलदीप यादव को हिरासत में लिया है.

टिकैत ने आरोपी के अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े होने और हमले के पीछे बीजेपी का हाथ होने का आरोप लगाया है.

महापंचायत को संबोधित करते हुए टिकैत ने किसानों को कम से कम इस साल के अंत तक अपना आंदोलन जारी रखने के लिए मानसिक रूप से तैयार रहने का आह्वान करते हुए संघर्ष में जीत का दावा किया. उन्होंने किसानों से सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहने का अनुरोध किया.
पिछले वर्ष नवंबर में किसान आंदोलन शुरू होने के बाद पहली बार अलीगढ़ में महापंचायत कर रहे राकेश टिकैत ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर सत्ताधारी खेमों में कारपोरेट घरानों की मजबूत पकड़ है.

कृषि कानूनों की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि इन कानूनों के तहत किसानों को नियमों और शर्तों से बाध्य किया जाएगा. उन्होंने दावा किया कि इन कानूनों से किसानों के लिए अपनी पसंद के बीजों का उपयोग करना असंभव हो जाएगा और किसानों को इस हद तक हताश होना पड़ेगा कि वे अपनी जमीन को कॉरपोरेट को बेचने के लिए मजबूर हो जाएंगे. (भाषा से इनपुट)
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