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अलीगढ़:-पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के परिवार का इगलास विधानसभा से है भावनात्मक नाता

अलीगढ़:-पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के परिवार का इगलास विधानसभा से है भावनात्मक नाता

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पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की तस्वीर

पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के परिवार का इगलास विधानसभा क्षेत्र से भावनात्मक जुड़ाव है.जिसे मिनी छपरौली के नाम से भी जाना जाता है.यहां से पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की पत्नी (गायत्री देवी) व बेटी (ज्ञानवती) ने न केवल चुनाव लड़ा बल्कि विधानसभा में भी पहुंची थीं.इस क्षेत्र से उनके परिवार का खासा लगाव है.

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    पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के परिवार का इगलास विधानसभा क्षेत्र से भावनात्मक जुड़ाव है.जिसे मिनी छपरौली के नाम से भी जाना जाता है.यहां से पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की पत्नी (गायत्री देवी) व बेटी (ज्ञानवती) ने न केवल चुनाव लड़ा बल्कि विधानसभा में भी पहुंची थीं.इस क्षेत्र से उनके परिवार का खासा लगाव है.यही वजह है कि सपा–रालोद का संयुक्त चुनावी बिगुल फूंकने के लिए इगलास को ही चुना गया. यहां जाट समुदाय की अच्छी खासी तादाद है साथ ही जाट मतदाताओं को लामबंद करने की कोशिश भी नेता इगलास विधानसभा क्षेत्र से करते हैं.

    इगलास विधानसभा में पौने 4 लाख मतदाता हैं.जिसमें लगभग 1 लाख मतदाता जाट समुदाय के हैं.चौधरी चरण सिंह पहले कांग्रेस में थे.आजादी के कुछ वर्षों बाद इस क्षेत्र से शिवदान सिंह कांग्रेस के विधायक चुने गए, जिनकी निकटता चौधरी चरण सिंह से थी.वर्ष1967 में खैर–बरौली से क्षेत्र बदलकर इगलास से चुनाव लड़ने का मन मोहनलाल गौतम ने बना लिया और वह कांग्रेस से टिकट ले आए शिवदान सिंह को कांग्रेस से टिकट न मिलना सहित अन्य कई वजह से चौधरी चरण सिंह ने कांग्रेस छोड़ दी थी और भारतीय क्रांति दल नाम से नई पार्टी बना ली. नई पार्टी से शिवदान सिंह चुनाव तो लड़े लेकिन वह मोहनलाल गौतम से हार गए. 2 साल बाद 1969 को हुए चुनाव में चौधरी चरण सिंह ने अपनी पत्नी (गायत्री देवी) को भारतीय क्रांति दल से प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतारा और वह चुनाव जीत गईं थीं .इसके बाद 1974 में बीकेडी शिवदान सिंह के बेटे राजेंद्र सिंह विधायक बने 1977 में फिर से विधायक बने. वर्ष 1979 में इसी सीट से जनता दल से चौधरी चरण सिंह की बेटी (ज्ञानवती) विधायक बनी थीं.1980 में इस सीट से राजेंद्र सिंह फिर विधायक चुने गए इस दौरान राजेंद्र सिंह की चौधरी चरण सिंह से नजदीकी काफी बढ़ गई,उन्हें चौधरी चरण सिंह बेटा मानते थे.वर्ष 1989 में वह बिजेंद्र सिंह से चुनाव हार गए कई वर्षों के बाद जाट मतदाताओं ने चौधरी चरण सिंह से प्यार होने का सबूत वर्ष 2007 में रालोद से विमलेश सिंह व 2012 से त्रिलोकराम दिवाकर को विधानसभा भेज कर दिया, इस इलाके में बीजेपी की काफी सक्रियता देखने को मिली है. सीएम योगी भी इस इलाके में कई सभाएं कर चुके हैं.2017 के विधानसभा चुनाव में राजवीर दिलेर विधायक बने 2019 के लोकसभा चुनाव के वक्त हाथरस लोकसभा सीट से दावेदारी की और चुनाव जीत गई राजवीर दिलेर की सीट को छोड़ने के बाद उपचुनाव हुआ और बीजेपी के राजकुमार सहयोगी ने इस सीट को दोबारा जीतकर बीजेपी के किले को बरकरार रखा.

    2017 की विधानसभा चुनाव में इस सीट पर बीजेपी को 55 फ़ीसदी से अधिक वोट हासिल हुए थे.जबकि बहुजन समाज पार्टी को 22 फ़ीसदी के आसपास वोट मिले थे और तीसरे नंबर पर राष्ट्रीय लोकदल था जिसे 12 फीसदी वोट मिले थे.
    इगलास विधानसभा में कुल मतदाता 3,75,813
    पुरुष मतदाता 2,01,819
    महिला मतदाता 1,73,912 हैं.

    वहीं जातिगत आंकड़ों पर गौर करें तो इस विधानसभा में सीट पर ब्राह्मण और जाट बिरादरी के निर्णायक भूमिका में वोट हैं,जाटों के 1 लाख 20 हजार वोट हैं,वहीं दूसरे नंबर पर ब्राह्मण बिरादरी के 95 हजार वोट हैं साथ ही 50 हजार वोटों के साथ तीसरे नंबर पर आते हैं बघेल,वहीं 18 हजार के करीब ठाकुर हैं,जाटवों के 45 हजार वोट हैं,
    दिवाकर समाज के 10600 वोट हैं,17000 वाल्मीकि हैं वहीं
    20213 वोट वैश्य बिरादरी के वोट हैं,

    2022 के चुनाव में इगलास विधानसभा से सपा–रालोद गठबंधन की बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला होने के आसार हैं.

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    Tags: Aligarh news, Assembly Election, Rld

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