इस वजह से अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में नहीं मिलता जाति के आधार पर आरक्षण

एएमयू में किसी भी तरह के नए आदेश को न तो लागू किया जा सकता है और न ही किसी पुराने फैसले को बदला जा सकता है.

नासिर हुसैन
Updated: July 3, 2018, 4:28 PM IST
इस वजह से अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में नहीं मिलता जाति के आधार पर आरक्षण
फाइल फोटो.
नासिर हुसैन
नासिर हुसैन
Updated: July 3, 2018, 4:28 PM IST
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में जाति के आधार पर आरक्षण का बंटवारा नहीं किया जा सकता है. इसकी एक बड़ी और खास वजह यह है कि एएमयू को अल्पसंख्यक संस्था होने का दर्जा मिला हुआ है. बेशक ये बात अलग है कि एएमयू को अल्पसंख्यक संस्था होने का दर्जा देने वाला आदेश विवादों में आने के बाद सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है.

कोर्ट ने भी केन्द्र सरकार और एएमयू प्रशासन को सुनने के लिए एएमयू में यथा स्थिति बरकरार रखी हुई है. इसलिए जब तक कोर्ट कोई फैसला नहीं सुना देता है तब तक एएमयू में किसी भी तरह के नए आदेश को न तो लागू किया जा सकता है और न ही किसी पुराने फैसले को बदला जा सकता है. ये कहना है एएमयू मामलों के जानकार और एएमयू के ही पूर्व जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) डॉ. राहत अबरार का.

गौरतलब है कि कुछ दिन पूर्व यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और एक दिन पहले राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष और आगरा के सांसद रामशंकर कठेरिया ने एएमयू में दलित छात्रों को प्रवेश में आरक्षण देने की वकालत की थी. उनका आरोप है कि केन्द्र सरकार से आर्थिक मदद लेने वाली एएमयू सहित जामिया मिलिया विश्वविद्यालय दलित छात्रों को आरक्षण नहीं देते हैं.

वहीं एएमयू के पीआरओ उमर सलीम पीरजादा का कहना है कि वे इस मामले पर कुछ नहीं बोल सकते हैं क्योंकि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है. सुप्रीम कोर्ट जो आदेश देगा उसका पालन किया जाएगा.

एएमयू में अल्पसंख्यक दर्जे का यह है विवाद
एएमयू में अल्पसंख्यक दर्जे के विवाद मामले में 1967 में सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि एएमयू को केंद्र सरकार ने बनाया था न कि मुस्लिम ने. इस टिप्पणी के आधार पर एएमयू को अल्पसंख्यक होने का दर्जा देने से इंकार कर दिया था. वहीं तत्कालीन केंद्र सरकार ने 1967 के सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट के खिलाफ 1981 में संसद में संशोधन बिल पास करते हुए एएमयू को अल्पसंख्यक का दर्जा दे दिया था.

वहीं दो वर्ष पहले 2016 में केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल कर एएमयू का अल्पसंख्यक दर्जा समाप्त करने और एएमयू के संबंध में केन्द्र सरकार के पिछले सभी बिल और प्रस्ताव वापस लेने की बात कही है.

सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दिया है अल्पसंख्यक का दर्जा: कठेरिया
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष और आगरा के सांसद रामशंकर कठेरिया का कहना है कि संसद में कभी नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी तक किसी ने एएमयू को अल्‍पसंख्‍यक संस्था का दर्जा नहीं दिया है. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी 1986 में दिए फैसले में कहा कि यह अल्‍पसंख्‍यक यूनिवर्सिटी नहीं है. यहां जानबूझकर अनुसूचित जाति के छात्रों आरक्षण से वंचित किया जा रहा है. कठेरिया ने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट कहता है कि एएमयू अल्‍पसंख्‍यक संस्थान है तो वे अपनी मांगें वापस ले लेंगे.
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