दलित आरक्षण मामला: SC-ST आयोग के अध्यक्ष को जवाब नहीं दे पाया AMU प्रशासन

आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि एएमयू अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय नहीं है. इस संदर्भ में एएमयू की तरफ से कोई डाक्यूमेंट उपलब्ध नहीं कराया जा सका है.

Alok singh | News18 Uttar Pradesh
Updated: July 3, 2018, 10:38 PM IST
दलित आरक्षण मामला: SC-ST आयोग के अध्यक्ष को जवाब नहीं दे पाया AMU प्रशासन
एएमयू प्रशासन के साथ बैठक करने के बाद मीडिया को संबोधित करते एससी-एसटी आयोग के अध्यक्ष रामशंकर कठेरिया
Alok singh | News18 Uttar Pradesh
Updated: July 3, 2018, 10:38 PM IST
अलीगढ़ में एससी-एसटी आयोग के अध्यक्ष राम शंकर कठेरिया ने मंगलवार को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के उप कुलपति तबस्सुम सहाब के साथ सर्किट हाउस में दलितों व पिछड़ों के आरक्षण को लेकर बैठक की. इस दौरान आयोग के अध्यक्ष ने पूछा कि एएमयू में दलितों व पिछड़ों का दाखिला किस आधार पर नहीं किया जा रहा है? आयोग ने पूछा कि 2005 में एएमयू के आरक्षण का मामला सुप्रीम कोर्ट में आया तो उससे पहले आरक्षण को लागू क्यों नहीं किया गया? इस सवालों के जवाब एएमयू प्रशासन नही दें सका.

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दरअसल, एएमयू की तरफ से 1981 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय से अल्पसंख्यक स्वरुप घोषित करने की मांग की थी, लेकिन 1968 के अजीज बासा केस (मुस्लिम करैक्टर बनाम रिजर्वेशन) में सुप्रीम कोर्ट ने एएमयू को कोई राहत नहीं दी थी. इसके अलावा 1990 में भी एएमयू के विजिटर यानी राष्ट्रपति द्वारा 50 प्रतिशत मुस्लिम छात्रों के एडमिशन का प्रस्ताव भी निरस्त किया जा चुका है.

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आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि एएमयू अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय नहीं है. इस संदर्भ में एएमयू की तरफ से कोई डाक्यूमेंट उपलब्ध नहीं कराया जा सका है. वर्ष 2005 में मेडिकल प्रवेश परीक्षा में 50 प्रतिशत मुस्लिम आरक्षण लागू किया था. लेकिन हाईकोर्ट के आदेश पर इस पर भी रोक लग गई थी. आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि देश के सभी केंद्रीय विश्वविद्यालय एक एक्ट के अंतर्गत बने हैं. एमएचआरडी, यूजीसी के नियमों से केंद्रीय विश्वविद्यालय संचालित हो रहे है. इसलिए एएमयू में दलितों व पिछड़ों का आरक्षण लागू होना चाहिए. वहीं एएमयू प्रशासन ने जबाव देने के लिए एक महीने का समय मांगा है. एससी-एसटी आयोग को एएमयू विश्वविद्यालय प्रशासन ने कोई डाक्यूमेंट उपलब्ध नहीं कराए हैं.

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आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि देश भर के केंद्रीय विश्वविद्यालय आरक्षण का लाभ दे रहे हैं, वहीं एएमयू संवैधानिक अधिकारों का पालन नहीं कर रहा है. उन्होंने कहा कि दलितों व पिछड़ों के आरक्षण के मुद्दे पर एएमयू प्रशासन को दो बार पहले भी बुलाया गया था, लेकिन एएमयू की तरफ से कोई नहीं आया. रामशंकर कठेरिया ने कहा कि एएमयू अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय नहीं है तो रिजर्वेशन लागू किया जाए. सुप्रीम कोर्ट से जब तक फैसला नहीं आता है एएमयू को दलितों को आरक्षण देना चाहिए.

उन्होंने कहा कि आयोग आरक्षण के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अब पार्टी बनने जा रही है और एक सप्ताह में सुप्रीम कोर्ट में एससी-एसटी आयोग अपना पक्ष रखेगा. एएमयू में आरक्षण ते मुद्दे पर मायावती के प्रेस कांफ्रेस करने पर कहा कि मायावती जी दलितों की सच्ची हितैषी हैं तो एएमयू में दलितों के आरक्षण की लड़ाई आगे आ कर लड़ें. उन्होंने कहा कि मुद्दे को लेकर मायावती जी नेतृत्व करें , हम उनके पीछे चलेंगे,लेकिन ये हिम्मत उनके अंदर होनी चाहिए कि दलितों की लड़ाई लड़ेंगी.
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