हाथरस केस: AMU प्रशासन ने डॉक्टरों को किया बहाल, दो दिन पहले हुए थे टर्मिनेट

AMU प्रशासन ने पीड़िता की जांच करने वाले डॉक्टरों को किया बहाल (file photo)
AMU प्रशासन ने पीड़िता की जांच करने वाले डॉक्टरों को किया बहाल (file photo)

इससे पहले डॉक्टर अज़ीम (Doctor Anjim) ने मीडिया से बात करके बताया था कि पीड़ित की जांच हादसे के दस दिन के बाद हुई, जिससे ज़्यादातर सबूत नष्ट हो गए थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 23, 2020, 4:49 PM IST
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अलीगढ़. हाथरस कांड (Hathras Case) की पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट बनाने वाले दोनों डॉक्टरों का टर्मिनेशन शुक्रवार को खत्म कर वापस बहाल कर दिया गया है. दोनों डॉक्टरों को फिर से लीव वैकेंसी पर बहाल किया गया है. अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी ओमर सलीम पीरजादा ने बताया कि यह लीव वैकेंसी का केस था जो खत्म हो गई थी अब कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसर की रिक्वायरमेंट के चलते सर्विस देने के लिए निमंत्रण दिया गया है.

उत्तर प्रदेश के हाथरस में पिछले महीने एक दलित युवती से कथित गैंगरेप के बाद उसकी हत्‍या करने का मामला सामने आया था. इस मामले में एफएसएल रिपोर्ट पर सवाल उठाने वाले अलीगढ़ के डॉक्टर अजीम मलिक को जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की नौकरी से निकाल दिया था. डॉ. मलिक अस्पताल में इमरजेंसी एंड ट्रॉमा सेंटर में मेडिकल ऑफ़िसर के पद पर तैनात थे. हाथरस पीड़िता की एमएलसी रिपोर्ट भी इन्हीं की टीम ने बनाई थी. डॉ. मलिक के अलावा उनकी टीम के सहयोगी डॉ ओबेद हक़ को भी पद से हटा दिया गया है. डॉ हक़ ने पीड़िता की मेडिकल लीगल केस रिपोर्ट पर दस्तख़त किए थे.

क्‍या कहते हैं एएमयू मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर
इससे पहले डॉक्टर अज़ीम ने मीडिया से बात करके बताया था कि पीड़ित की जांच हादसे के दस दिन के बाद हुई, जिससे ज़्यादातर सबूत नष्ट हो गए थे. डॉक्टरों का आरोप है कि इससे वाइस चांसलर तारिक मंसूर खासे नाराज़ हुए थे. उसके बाद दोनों डॉक्टरों का कार्यकाल अचानक ख़त्म कर दिया था.
(रिपोर्ट- रंजीत सिंह)
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