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अयोध्या विवाद : कल्याण सिंह ने किया दावा, जस्टिस गोगोई के रिटायरमेंट से पहले आ जाएगा राम मंदिर पर फैसला

News18 Uttar Pradesh
Updated: October 28, 2019, 6:17 PM IST
अयोध्या विवाद : कल्याण सिंह ने किया दावा, जस्टिस गोगोई के रिटायरमेंट से पहले आ जाएगा राम मंदिर पर फैसला
जस्टिस गोगोई के रिटायरमेंट से पहले आ जाएगा राम मंदिर पर फैसला

अयोध्या मामले (Ayodhya Case) पर कल्याण सिंह (Kalyan Singh) ने कहा कि सबको सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसले का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि उससे पहले कुछ भी कहना उचित नहीं है.

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अलीगढ़. राजस्थान (Rajasthan) के पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह (Kalyan Singh) दिवाली के मौके पर रविवार को अलीगढ़ (Aligarh) पहुंचे. कल्याण सिंह ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में राम मंदिर (Ram Temple) पर बड़ा बयान दिया है. बीजेपी (BJP) के वरिष्ठ नेता कल्याण सिंह ने कहा कि राम मंदिर (Ram Mandir) को लेकर सभी सुनवाई पूरी हो चुकी है, अब निर्णय में ज्यादा समय नहीं लगेगा. उन्होंने कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे रहे हैं, उससे पहले ही वह राम मंदिर मामले पर निर्णय देकर जाएंगे. क्या जजमेंट देकर जाएंगे, ये तो तभी पता चलेगा. कल्याण सिंह ने कहा कि आज इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है.

SC के फैसले का सम्मान करना चाहिए
कल्याण सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सबको सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि निर्णय से पूर्व किसी भी पक्ष के लिए कुछ भी कहना उचित नहीं है.

40 दिन चली सुनवाई

बता दें, 40 दिन तक चली सुनवाई के बाद पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ ने इस मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. सुप्रीम कोर्ट नवंबर के दूसरे सप्ताह तक इस मामले में अपना फैसला सुना सकता है.



‘निर्मोही अखाड़ा’ और ‘निर्वाणी अखाड़ा’ दोनों ही पूजा अर्चना और प्रबंधन के अधिकार चाहते हैं
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इस प्रकरण में ‘निर्मोही अखाड़ा’ और उसका प्रतिद्वंद्वी ‘निर्वाणी अखाड़ा’ दोनों ही रामलला विराजमान के जन्मस्थल पर पूजा अर्चना करने और प्रबंधन का अधिकार चाहते हैं. निर्मोही अखाड़ा ने अनुयायी के रूप में अधिकार की मांग करते हुए 1959 में वाद दायर किया था, जबकि निर्वाणी अखाड़ा को यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड ने 1961 में प्रतिवादी बनाया. देवकी नंदन अग्रवाल के माध्यम से राम लला की ओर से 1989 में दायर वाद में उसे प्रतिवादी बनाया गया है.

मुस्लिम पक्ष ने अपने नोट में की ये अपील
इससे पहले, मुस्लिम पक्षकारों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन द्वारा तैयार किए गए इस नोट में कहा गया था, ‘इस मामले में न्यायालय के समक्ष मुस्लिम पक्ष यह कहना चाहता है कि इस न्यायालय का निर्णय चाहे जो भी हो, उसका भावी पीढ़ी पर असर होगा. इसका देश की राज्य व्यवस्था पर असर पड़ेगा.’

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First published: October 28, 2019, 3:54 PM IST
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