मदरसे के भीतर मंदिर की मौजूदगी देगी धार्मिक सहिष्णुता का संदेश

अलीगढ़ के चाचा नेहरू मदरसे में मंदिर बनाने का फैसला किया गया है. यह फैसला मदरसे के संचालक अल नूर ट्रस्ट ने किया है.

News18 Uttar Pradesh
Updated: July 16, 2019, 5:27 PM IST
मदरसे के भीतर मंदिर की मौजूदगी देगी धार्मिक सहिष्णुता का संदेश
अल नूर ट्रस्ट की संचालक पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की पत्नी सलमा अंसारी हैं.
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Updated: July 16, 2019, 5:27 PM IST
अलीगढ़ के चाचा नेहरू मदरसे में मंदिर बनाने का फैसला किया गया है. यह फैसला मदरसे के संचालक अल नूर ट्रस्ट ने किया है. ट्रस्ट का मानना है कि मदरसे के भीतर मंदिर निर्माण से सामाजिक सद्भावना का संदेश जाएगा और उसमें पढ़ रहे बच्चों का धार्मिक रूप से सहिष्णु माहौल में विकास हो सकेगा.

इस ट्रस्ट की संचालक पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की पत्नी सलमा अंसारी हैं. ट्रस्ट के इस फैसले के बाद जब मीडिया में सुर्खियां बनीं तो सलमा अंसारी ने रविवार को मदरसे के भीतर के नजरे खबरिया कैमरों के लिए खोल दिए. मदरसे के भीतर एक तरफ हिंदू भगवानों की प्रार्थना के लिए जगह बनाई गई है तो वहीं दूसरी तरफ मुसलमान बच्चों के लिए कुरान पढ़ने की जगह. सलमा अंसारी कहती हैं कि यह निर्णय छात्रों की सुरक्षा के मुद्देनजर लिया गया है क्योंकि उन्हें प्रार्थना के लिए बाहर जाना पड़ता था. हमारे यहां बहुत कम उम्र के बच्चे भी पढ़ते हैं. बच्चों को मंगलवार, शुक्रवार और शनिवार को प्रार्थना के लिए बाहर ले जाना पड़ता है. आजकल बच्चों के साथ अपराध की घटनाएं खूब सुनाई देती हैं. इस वजह से हमने मदरसे के भीतर ही मस्जिद-मंदिर बनवाने का फैसला किया. हमारे पास उनकी प्रार्थना के लिए व्यवस्था तो पहले से मौजूद है ही. अब हमने एक मंदिर और एक मस्जिद बनवाने का फैसला भी किया है.

गौतरलब है कि 400 बच्चों वाले इस अंग्रेजी माध्यम के मदरसे का संचालन साल 1999 से किया जा रहा है. यह संस्थान यूपी मदरसा बोर्ड के अंतर्गत जलाया जा रहा है. यहां सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जाती है.

सलमा अंसारी कहती है कि हम बहुत पहले से मदरसे में अंग्रेजी माध्यम से मॉडर्न एजुकेशन के साथ धार्मिक शिक्षा दे रहे हैं. केंद्र सरकार ने मदरसों के आधुनिकीकरण का फैसला तो बाद में किया हम इस पर काफी पहले से काम कर रहे हैं. सलमा कहती हैं कि उन्हें यह सिद्ध करना है कि झुग्गी-झोपड़ियों के बच्चे भी बेहतरीन अंग्रेजी तालीम पा सकते हैं. उनके मुताबिक मदरसे से शिक्षा पाए बच्चे योग के क्षेत्र में आगे बढ़े हैं.

सलमा अंसारी का मानना है कि जो लोग कहते हैं कि दूसरे धर्मों के बच्चों को मदरसे के भीतर प्रार्थना का अधिकार नहीं है, वो इस्लाम के मूलभूत सिद्धांतों को नहीं जानते. जब उनसे पूछा गया कि इस कदम के बाद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में भी मंदिर बनाने की मांग की जा सकती है तो उन्होंने कहा कि इन दोनों के बीच कोई संबंध नहीं है. वो कहती हैं कि मैं अपने बच्चों की जरूरतों की चिंता कर रही हूं. उन्हें हर तरह की धार्मिक स्वतंत्रता मिलनी चाहिए.
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First published: July 16, 2019, 5:18 PM IST
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