गोपाल दास नीरज पंचतत्व में विलीन, अलीगढ़ में हुआ अंतिम संस्कार

पूर्व में नीरज की इच्छा के मुताबिक उनके पार्थिव शरीर को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज को दान किया जाना था. लेकिन लगातार खराब स्वास्थ्य के कारण उनके विभिन्न अंग इस स्थिति में नहीं रह गये थे कि उन्हें चिकित्सा शोध कार्य में इस्तेमाल किया जाता.


Updated: July 21, 2018, 10:14 PM IST
गोपाल दास नीरज पंचतत्व में विलीन, अलीगढ़ में हुआ अंतिम संस्कार
गोपाल दास नीरज के अंतिम दर्शनों के लिए पहुंच अखिलेश यादव (फोटो-ट्विटर)

Updated: July 21, 2018, 10:14 PM IST
मशहूर कवि, गीतकार पद्मभूषण गोपाल दास नीरज का अंतिम संस्कार शनिवार को अलीगढ़ में पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ किया गया. प्रदर्शनी मैदान के पास स्थित श्मशान घाट पर उन्हें प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें अंतिम विदाई दी.

पूर्व में नीरज की इच्छा के मुताबिक उनके पार्थिव शरीर को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज को दान किया जाना था. लेकिन लगातार खराब स्वास्थ्य के कारण उनके विभिन्न अंग इस स्थिति में नहीं रह गये थे कि उन्हें चिकित्सा शोध कार्य में इस्तेमाल किया जाता. लिहाजा, परिजन ने ऐन वक्त पर अंतिम संस्कार का फैसला किया.

जब शराब से तौबा कर गए गोपालदास नीरज

गौरतलब है कि गोपाल दास नीरज का 19 जुलाई को दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया था. उन्हें तबियत खराब होने के बाद आगरा से दिल्ली रेफर किया गया था.

गोपाल दास नीरज के पार्थिव शरीर को सुबह दिल्ली से आगरा ले जाया गया. यहां सुबह आठ बजे सरस्वती नगर बल्केश्वर मे उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शनों के लिए रखा गया. उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव समेत कई नेताओं ने उन्हें यहां श्रद्धांजलि दी. अखिलेश यादव ने कहा कि अपने गीतों के माध्यम से नीरज हमेशा अमर रहेंगे.

गोपाल दास नीरज ने कहा था, मेरी मौत पर न एक आंसू बहाना, सिर्फ एक चादर ओढ़ा देना

समाजवादी पार्टी के प्रदेश की सत्ता में आने के बाद नीरज की स्मृति में इटावा स्थित उनके गांव को यादगार बनाया जाएगा. कवि कुमार विश्वास और हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा समेत तमाम गणमान्य लोग नीरज के दर्शनों के लिए पहुंचे.  आगरा में नीरज की अंतिम यात्रा मे भी सैकड़ों लोग शामिल हुए. कवि सम्मेलन समिति द्वारा तैयार रथ में उनका पार्थिव शरीर रखा गया.

“गीत उन्मन है, ग़ज़ल चुप है, रुबाई है दुखी, ऐसे माहौल में नीरज को बुलाया जाए” - - गोपाल दास ‘नीरज’

इस दौरान उनके लिखे गीत ...ऐ भई जरा देखकर चलो..गूंजते रहे. करीब एक किलोमीटर तक अंतिम यात्रा के बाद एंबुलेंस से नीरज की पार्थिव देह को अलीगढ़ ले जाया गया. हालांकि रथ पर अंतिम यात्रा को लेकर थोड़ा विवाद भी हुआ, नीरज के पुत्र मिलन प्रभात और नाती ने एंबुलेंस से पार्थिव देह को अलीगढ़ ले जाने को कहा ताकि वहां राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार हो सके.
(एजेंसी इनपुट के साथ)
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