बेटे की आंखों के लिए गरीब परिवार की मुख्यमंत्री से गुहार
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बेटे की आंखों के लिए गरीब परिवार की मुख्यमंत्री से गुहार
आंखें इंसान के लिए ईश्वर की वो अनमोल इनायत है जिसके बगैर इस सुंदर संसार की कल्पना भी नहीं की जा सकती. बगैर आंखों के जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती. एटा में एक बेबस और लाचार पिता अपने पांच साल के मासूम बच्चे की आंखों की जाती रोशनी को लेकर बेबस है और यदि मासूम का शीघ्र आंखों का आपरेशन ना किया गया तो उसकी आंखों की रोशनी जा सकती है.

आंखें इंसान के लिए ईश्वर की वो अनमोल इनायत है जिसके बगैर इस सुंदर संसार की कल्पना भी नहीं की जा सकती. बगैर आंखों के जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती. एटा में एक बेबस और लाचार पिता अपने पांच साल के मासूम बच्चे की आंखों की जाती रोशनी को लेकर बेबस है और यदि मासूम का शीघ्र आंखों का आपरेशन ना किया गया तो उसकी आंखों की रोशनी जा सकती है.

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आंखें इंसान के लिए ईश्वर की वो अनमोल इनायत है जिसके बगैर इस सुंदर संसार की कल्पना भी नहीं की जा सकती. बगैर आंखों के जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती. एटा में एक बेबस और लाचार पिता अपने पांच साल के मासूम बच्चे की आंखों की जाती रोशनी को लेकर बेबस है और यदि मासूम का शीघ्र आंखों का आपरेशन ना किया गया तो उसकी आंखों की रोशनी जा सकती है.

अपने मासूम बच्चे की आंखों के उपचार के लिए इस लाचार पिता ने ईटीवी के माध्यम से मुख्यमंत्री से गुहार लगायी है. कहते हैं विधायलय शिक्षा का मंदिर है और गुरु शिष्य के लिए भगवान समान होता है. लेकिन एटा में शिक्षा के मंदिर में एक मासूम को प्रश्न का उत्तर ना देने पर टीचर के निर्देश पर कक्षा के मानीटर ने मासूम की ऑंखों में पेंसिल घुसेड़ दी जिससे ये मासूम कराह उठा और आज उसकी आंख का शीघ्र ही आपरेशन ना किया गया तो उसकी रोशनी चली जाएगी.

दरअसल पूरा मामला एटा के शहर कोतवाली क्षेत्र के धोबियान मोहल्ला का है जहां बाजार में झाड़ू-पोछा और साफ सफाई कर जीतू दिवाकर और उनकी पत्नी ने अपने बेटे को अच्छी तालीम दिलाने के लिए बाल विधा मंदिर में कक्षा दो में प्रवेश दिलाया था लेकिन उन्हें क्या मालूम था अपना पेट काट कर जिस शिक्षा के मंदिर में अपने बेटे को पढ़ा लिखाकर कुछ बनाने की तमन्ना पाले है वहां उनके बेटे की आंखों की रोशनी ही छीन ली जाएगी.



कक्षा में सबसे होशियार अर्जुन दिवाकर ने टीचर के एक प्रश्न का जवाब ना देने पर मानीटर को उसकी पिटाई के निर्देश दिए और उसी क्लास के मानीटर ने उसकी आंखों में पेंसिल मार दी. दर्द से कराह उठे इस मासूम को उपचार तो दूर उसे स्कूल से जाने भी नहीं दिया. घर पहुंचे अर्जुन की आंखों को देख गरीब मां-बाप अस्पताल ले गए जहां डॉक्टरों ने उसे अलीगढ़ ले जाने की बात कही वहि महीने में ढाई-तीन हजार रुपये की नौकरी करने वाले इस शख्स पर जैसे मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा और अपने बेटे के उपचार के लिए अपनी पत्नी के जेवर तक बिक गए लेकिन इस लाचार मां-बाप ने उम्मीद नहीं छोड़ी लेकिन हालात और मजबूरी ने उन्हें भले ही तोड़ दिया हो लेकिन अपने बेटे के उपचार के लिए कर्ज में डूबे एक पिता ने अपनी बेबसी के चलते ईटीवी के माध्यम से मुख्यमंत्री से गुहार लगायी है.
अपने ही स्कूल के इस छात्र के साथ हुई इस घटना से स्कूल प्रबंधन ने पल्ला झाड़ लिया और इस पूरे मामले पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया. स्कूल प्रबंधन के इस गैर जिम्मेदाराना रुख से पीड़ित मां-बाप हैरान हैं. वहीं तिल-तिल कर अपने मासूम के आपरेशन और उपचार के लिए बेबस भी हैं और आर्थिक तंगी के चलते पूरी तरह से लाचार हैं. अब देखना ये है कि मुख्यमंत्री से उम्मीद की किरण पाले इस परिवार की ये गुहार क्या एक मासूम की आंखों की रोशनी ला सकेगी.
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