कासगंज जा रहे रालोद नेताओं का प्रतिनिधि मंडल अलीगढ़ में गिरफ्तार

रालोद नेताओं को अलीगढ में पत्रकार वार्ता के दौरान गिरफ्तार किया गया और थाना क्वार्सी में कुछ देर हिरासत में रखने के बाद रिहा दिया गया.

ETV UP/Uttarakhand
Updated: January 31, 2018, 10:01 PM IST
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Updated: January 31, 2018, 10:01 PM IST
कासगंज जा रहे रालोद नेताओं के एक प्रतिनिधि मंडल को पुलिस ने मंगलवार को अलीगढ़ में गिरफ्तार कर लिया है, जिसमें रालोद के 5 पूर्व विधायक भी शामिल हैं. प्रतिनिधि मंडल रालोद युवराज जयंत चौधरी के निर्देश कासगंज हिंसा का सच जानने वहां जा रहे थे. रालोद नेताओं को अलीगढ में पत्रकार वार्ता के दौरान गिरफ्तार किया गया और थाना क्वार्सी में कुछ देर हिरासत में रखने के बाद रिहा दिया गया.

रिपोर्ट के मुताबिक रामघाट रोड स्थित एक रेस्टोरेंट में मीडिया को संबोधित कर रहे रालोद नेताओं को पुलिस फोर्स ने घेर लिया और रालोद प्रतिनिधि मंडल कासगंज के लिए आगे बढ़ने ही वाला था कि सीओ पंकज श्रीवास्तव ने उन्हें कासगंज जाने की अनुमति नहीं दी. इस दौरान रालोद नेताओं की पुलिस से नोंक झोंक भी हुई और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए कई रालोद नेता जमीन पर धरने पर बैठ गए.



बताया जाता है धरने पर बैठे रालोद नेताओं और कार्यकर्ताओं को बाद में पुलिस ने गिरफ्तार कर थाना क्वार्सी ले गई. गिरफ्तार रालोद नेताओं में पश्चिमी यूपी के प्रदेश अध्यक्ष पूर्व विधायक डॉ अनिल चौधरी, मुजफ्फर नगर के पूर्व विधायक व पूर्व मंत्री योगराज सिंह, भगवती प्रसाद, त्रिलोकी राम दिवाकर, गेंदालाल चौधरी, छात्र नेता जियाउर्रहमान, के साथ दर्जनों कार्यकर्ता शामिल हैं.

रालोद प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व कर रहे पूर्व विधायक डॉ अनिल चौधरी ने कासगंज हिंसा के लिए भाजपा सरकार दोषी बताते हुए एटा से भाजपा सांसद राजू भैया पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि सांसद राजू भैया के भड़काऊ भाषणों से कासगंज में हिंसा फैली है.

अनिल चौधरी ने सांसद पर आरोप लगाते हुए कि उन्होंने एक समुदाय को टारगेट करके बयान दिया, जो लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है. उन्होंने कासगंज हिंसा की सीबीआई जांच करते हुए कहा कि भाजपा नेताओं पर कार्यवाही करने के साथ मामले में आरएसएस की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए . उन्होंने मृतक के परिजनों को 50 लाख का मुआवजा देने की मांग की.

वहीं, पूर्व मंत्री चौधरी योगराज सिंह ने कहा कि मुजफ्फरनगर के बाद अब कासगंज को भाजपा ने दंगों की आग में झोंका है. उन्होंने बताया कि रालोद प्रतिनिधि मंडल कासगंज जाकर अमन का पैगाम देना चाहती थी, लेकिन प्रशासन भाजपा नेताओं को बचा रही है. उन्होंने कहा कि कासगंज हिंसा की निष्पक्ष सीबीआई जांच से हकीकत सामने आएगी. रालोद प्रतिनिधि मंडल को कासगंज में जाने से रोकने को उन्होंने भाजपा की तानाशाही रवैया करार दिया.
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