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Atrauli Assembly Seat: कल्याण सिंह की सीट, जहां से वे 9 बार विधायक रहे; पहले बहू, अब पोता है काबिज

UP Chunav 2022: पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के दिग्गज कल्याण सिंह का गढ़ रही है अतरौली विधानसभा सीट.

UP Chunav 2022: पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के दिग्गज कल्याण सिंह का गढ़ रही है अतरौली विधानसभा सीट.

Atrauli Assembly Seat Election: अपनी कड़कमिजाजी और राम मंदिर आदोलन के चलते चर्चित रहे पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने ...अधिक पढ़ें

अलीगढ़. प्रदेश में विधानसभा की कुछ जो चर्चित और वीआईपी सीटें हैं, उनमें एक अलीगढ़ जिले की अतरौली सीट भी है. अतरौली यानी राम मंदिर आंदोलन के झंडाबरदार रहे पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह यानी बाबूजी की अपनी सीट. यहां से वह नौ बार  विधायक रहे. 1967 से लेकर 2007 तक. उन्होंने जनसंघ, जनता पार्टी, भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय क्रांति पार्टी का अतरौली से प्रतिनिधित्व किया.  बीच में 1980 का चुनाव अपवाद है, जिसमें ‘बाबूजी’ कांग्रेस के अनवर खान से शिकस्त खा गए थे. वर्तमान में कल्याण सिंह के पोते संदीप सिंह इस सीट से विधायक हैं.

1967, 69 और 74 का चुनाव कल्याण सिंह ने जनसंघ से लड़ा था. आपातकाल के बाद 1977  में हुए चुनाव में वह जनता पार्टी के सिंबल पर मैदान में उतरे. इसके बाद भाजपा से विधायक रहे. 1999 में अनबन के बाद कल्याण सिंह भाजपा से अलग हो गए थे. इसके बाद उन्होंने एक पार्टी बनाई, जिसका नाम रखा राष्ट्रीय क्रांति पार्टी. इस दौरान तमाम सिपहसालार बाबूजी का साथ छोड़ गए, लेकिन अतरौली उनके साथ बनी रही. 2002 का चुनाव वह अपनी राष्ट्रीय क्रांति पार्टी से लड़े और बंपर वोटों से जीते. इसके बाद वह विधानसभा का चुनाव नहीं लड़े. अतरौली सीट बहू प्रेमलता को सौंप दी. 2007 में भाजपा के टिकट पर प्रेमलता अतरौली से विधायक चुनी गईं. इस बीच बेटे राजवीर सिंह के समायोजन को लेकर कल्याण सिंह की पार्टी से फिर अनबन हो गई.

2009 में कल्‍याण ने दोबारा से पार्टी छोड़ दी. इसके बाद आया 2012 का चुनाव. इलेक्शन से पहले ही उन्होंने जनक्रांति पार्टी बनाई. बहू प्रेमलता को फिर चुनावी मैदान में उतारा, लेकिन इस बार अतरौली ने साथ नहीं दिया. प्रेमलता सपा उम्मीदवार वीरेश यादव के हाथों 8867 वोटों से परास्‍त हो गईं. 2014 में कल्याण सिंह फिर से अपनी पार्टी का भाजपा में विलय कर दिया. 2017 के विधानसभा चुनाव में मां प्रेमलता की हार का बदला संदीप सिंह ने लिया और वीरेश यादव को 50 हजार से अधिक वोटों से हराया. 3.82 लाख मतदाताओं वाली अतरौली विधानसभा सीट पर कल्‍याण सिंह की लोध बिरादरी के 75 हजार वोटर हैं. समाजवादी पार्टी के परंपरागत वोटर यादव भी 75 हजार हैं. ब्राह्मण 35 हजार, जाट और मुस्लिम 30-30 हजार, जाटव वोटरों की संख्या करीब 25 हजार है. बाबूजी और अतरौली के रिश्‍ते के बीच हर जातीय समीकरण यहां ध्‍वस्‍त होते रहे हैं. कल्‍याण अब नहीं रहे. देखना यह होगा कि उनका परिवार अतरौली को कब तक साधकर रखता है.

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इस सीट से जुड़ा हुआ एक ‌किस्सा और. 1980 में कांग्रेस के जिन अनवर खान ने कल्याण को हराया था, वह 2002 तक लगातार इस सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते रहे. 1985 से लेकर 1996  के चुनाव तक पहले नंबर पर कल्याण रहते और दूसरे नंबर पर अनवर. 2002 में अनवर खिसककर चौथे स्‍थान पर पहुंच गए. इसके बाद अतरौली से न तो कल्याण चुनाव लड़े और न ही अनवर खान.

Tags: Aligarh news, UP Election 2022, UP news

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