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Koil Assembly Seat: कभी भाजपा की गढ़ रही इस सीट पर जीत को दोहराना चुनौती, जानें 2022 का समीकरण

UP Chunav 2022: कोल विधानसभा सीट पर भाजपा को चुनौती दे पाएंगे विपक्षी दल?

UP Chunav 2022: कोल विधानसभा सीट पर भाजपा को चुनौती दे पाएंगे विपक्षी दल?

Koil Assembly Seat Election: 2008 के परिसीमन के बाद कोल विधानसभा सीट पर समीकरण भाजपा के बहुत अनुकूल नहीं रहे. इस सीट पर ...अधिक पढ़ें

अलीगढ़. जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के एक नेता थे. किशनलाल दिलेर. अलीगढ़ जिले की कोल विधानसभा सीट 38 साल तक उनकी कर्मभूमि रही. दिलेर साहब की दिलेरी से हर कोई वाकिफ है. वह इस सीट पर इतने लोकप्रिय रहे कि 1967 से लेकर 1993 तक पांच बार विधायक चुने गए. उनकी वजह से ही यह सीट भगवा दल की गढ़ बनी. 2008 में परिसीमन के बाद इस सीट के भौगोलिक क्षेत्र में हुए कुछ बदलाव के चलते जातीय समीकरण भाजपा के अनुकूल नहीं रहे. इसके बावजूद ध्रुवीकरण और ‘मोदी मैजिक’ के बल पर अनिल पाराशर 2017 में 15 साल बार इस सीट पर भाजपा की वापसी कराई.

बात फिर किशनलाल दिलेर की. सबसे पहले 1967 में दिलेर जनसंघ के बैनर तले निर्वाचित हुए. अगले चुनाव यानि 1969 में वह कांग्रेस नेता पूरन चंद के हाथों पराजित हो गए. पूरन चंद भी उस जमाने में कांग्रेस के दिग्‍गज हुआ करते थे. 1980 के चुनाव तक दिलेर और पूरन चंद के बीच परस्‍पर प्रतिद्वंद्विता चलती रही. इस दौरान हुए चार चुनावों में तीन बार बाजी पूरन चंद के हाथ लगी. 67 के अलावा किशनलाल दिलेर 77, 85, 91 और 93 में इस सीट से निर्वाचित हुए. 1996 में भी इस सीट पर भाजपा की जीत हुई, लेकिन इस बार मैदान दिलेर नहीं थे. उनकी जगह रामसखी उतरीं. उन्‍होंने बहुजन समाज पार्टी के उम्‍मीदवार गंगा प्रसाद को साढ़े 23 हजार वोटों से हराया. इसके बाद के दो चुनावों में इस सीट पर बसपा के महेंद्र सिंह का कब्‍जा रहा. 2012 में समाजवादी पार्टी के जमीर उल्‍ला खान जीते थे.

लगभग तीन लाख वोटरों वाली इस सीट पर मुस्‍लिम मतदाताओं की संख्‍या भारी है. 1.45 लाख वोटरों के साथ मुस्‍लिम निर्णायक भूमिका में हैं. ब्राह्मण 60 हजार, क्षत्रिय 50 हजार, वैश्‍य 35 हजार, जाटव 30 हजार और लोध वोटरों की संख्‍या करीब 20 हजार है. जातीय समीकरणों को देखते हुए विधानसभा चुनाव में अनिल पाराशर के लिए यहां से जीत दोहराना चुनौती होगा.

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Tags: Aligarh news, UP Election 2022, UP news

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