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Iglas Assembly Seat: अलीगढ़ का जाट लैंड है इगलास, 2017 में रालोद से छीन भाजपा ने जमाया कब्जा

UP Chunav 2022: लोकदल के दबदबे वाली इगलास विधानसभा पर जीत हासिल करना बड़ी चुनौती.

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Iglas Assembly Seat Election: इगलास विधानसभा सीट को अलीगढ़ के जाट लैंड के नाम से जाना जाता है. पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी ...अधिक पढ़ें

अलीगढ़. जाटलैंड के नाम से मशहूर इगलास को लोकदल के दबदबे के कारण राजनीतिक गलियारों में मिनी छपरौली भी कहा जाता है. यह सीट शुरू से ही पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के प्रभाव में रही है. शुरुआती चुनावों में चौधरी साहब के खासमखास रहे शिवदान सिंह यहां से चुनाव लड़ा करते थे. चौधरी साहब की पत्‍नी गायत्री देवी और बेटी ज्ञानवती सिंह भी इस सीट से विधायक रह चुकी हैं. अब तक हुए 17 चुनावों में इस सीट से नौ बार चौधरी चरण सिंह के परिवार या उनके नजदीकी और पार्टी के नेता ही निर्वाचित हुए हैं. 2008 में परिसीमन के बाद खैर सीट की तरह यह भी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई. वर्तमान में भाजपा के राजकुमार सहयोगी इस सीट से विधायक हैं.

कहा जाता है कि चौधरी चरण सिंह के कांग्रेस के अलगाव की एक वजह इगलास सीट भी थी. दरअसल हुआ यह कि 1967 के चुनाव में इलाके दिग्‍गज कांग्रेस नेता रहे मोहनलाल कपूर ने चौधरी साहब के करीबी शिवदान सिंह का टिकट कटवाकर खुद इस सीट से चुनाव लड़ गए थे. चौधरी साहब को इस बात की टीस इतनी हुई कि अपनी पार्टी भारतीय क्रांति दल (बीकेडी) गठित करने के बाद उन्‍होंने 1969 के चुनाव में यहां से अपनी पत्‍नी गायत्री देवी को चुनाव लड़वाया और मोहनलाल कपूर से बदला लिया. इसके बाद उन्‍होंने शिवदान सिंह के बेटे राजेंद्र सिंह को इस सीट का वारिस बनाया. राजेंद्र सिंह ने 1974, 77 और 85 में यहां से जीत दर्ज की. राजेंद्र सिंह प्रदेश के ताकतवर मंत्री रहे. वह लोकदल के प्रदेश अध्‍यक्ष भी बने. चौधरी चरण सिंह के निधन के बाद राजेंद्र सिंह और चौधरी अजित के बीच खटास पैदा हो गई. जिसका लाभ कांग्रेस नेता चौधरी विजेंद्र सिंह ने उठाया. 1989 के चुनाव में उन्‍होंने इगलास पर कब्‍जा जमा लिया. इसके बाद लंबे समय तक यह सीट उनके प्रभाव में रही. 1993 और 2002 में भी वह कांग्रेस के बैनर तले जीते. 1991 इस सीट पर अजित सिंह की बहन ज्ञानवती देवी जनता दल से उतरीं और जीतीं भी.

1993 में एक और जाट नेता चौधरी मलखान सिंह भी इस सीट पर सपा के टिकट पर किस्‍मत आजमाने उतरे लेकिन कांग्रेस के विजेंद्र से पराजित हो गए. 1996 के चुनाव में पार्टी बदलकर वह भाजपा के उम्‍मीदवार बन गए और पहली बार इगलास से भाजपा का परचम फहराया. 2007 में रालोद के टिकट से मलखान सिंह की पत्‍नी बिमलेश सिंह जीतीं. अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने के बाद 2012 में भी यह सीट रालोद के कब्‍जे में रही. 2017 में भाजपा नेता राजवीर सिंह दिलेर ने रालोद से यह सीट छीन ली. इस चुनाव में रालोद प्रत्‍याशी सुलेखा सिंह खिसककर तीसरे नंबर पर पहुंच गईं. दिलरे के सांसद बनने के बाद 2019 में हुए उपचुनाव में रालोद प्रत्‍याशी का पर्चा खारिज हो गया था. नतीजतन भाजपा के राजकुमार सहयोगी ने आसान जीत दर्ज की.

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3.59 लाख मतदाताओं वाली इगलास विधानसभा सीट पर जाट मतदाताओं की संख्‍या करीब एक लाख है. ब्राह्मण 80 हजार और दलित वोटर 50 हजार के करीब हैं. विधानसभा चुनाव 2022 में इगलास सीट भाजपा की कड़ी परीक्षा ले सकती है. कृषि कानूनों को लेकर हुए आंदोलन चलते हुई नाराजगी अपना रंग दिखा सकती है.

Tags: Aligarh news, UP Election 2022, UP news

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