COVID-19: UP की जेलों में कैदियों को 60 दिन का पैरोल या अंतरिम जमानत, जानिए किसे मिलेगा लाभ?

उत्तर प्रदेश की जेलों में कोरोना संक्रमण को देखते हुए रिहाई योजना लाई गई है  (कॉन्सेप्ट इमेज)

उत्तर प्रदेश की जेलों में कोरोना संक्रमण को देखते हुए रिहाई योजना लाई गई है (कॉन्सेप्ट इमेज)

Prayagaraj News: कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय यादव की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने व्यापक पैमाने पर सजायाफ्ता व विचाराधीन कैदियो की रिहाई की योजना घोषित की है. इस कमेटी ने यह फैसला जेलों मे क्षमता से अधिक कैदियो की संख्या व कोरोना संक्रमण प्रकोप से निपटने के तहत लिया है.

  • Share this:
प्रयागराज. उत्तर प्रदेश  की जेलों में कोरोना संक्रमण (COVID-19 Infection in UP Prisons) फैलने पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय यादव की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने व्यापक पैमाने पर सजायाफ्ता व विचाराधीन कैदियो की रिहाई की योजना घोषित की है. कमेटी ने न्यायिक अधिकारियों को  जेलों में जाकर योजना के तहत कैदियों को 60 दिन के पैरोल या अंतरिम जमानत पर रिहा करने की कार्यवाही करने का निर्देश दिया गया है.

इसके साथ ही महानिदेशक, कारागार से उन कैदियों का डाटा मांगा गया है, जो सजा पूरी करने के बाद अर्थदण्ड जमा न कर पाने के कारण जेल में हैं. ताकि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के जरिये जुर्माने का भुगतान कर उन्हे रिहा किया जा सके. एके अवस्थी प्रमुख सचिव गृह व आनंद कुमार महानिदेशक कारागार कमेटी के सदस्य हैं. यह कमेटी सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कोरोना संक्रमण की निगरानी के लिए गठित की गई है.

उप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के महानिबंधक आशीष गर्ग को पत्र लिखकर योजना का अनुपालन कराने का अनुरोध किया है. जिसमें सभी जेल अधीक्षक को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव के लगातार संपर्क बनाए रखने का भी निर्देश दिया गया है. एक प्रदेश स्तरीय निगरानी टीम भी बनी है, जिसे जेलों में जाकर न्यायिक अधिकारियो की कार्यवाही की रिपोर्ट 15 मई तक हाई पावर कमेटी को सौपने को कहा गया है. हाई पावर कमेटी की अगली बैठक 22 मई को होगी.

Youtube Video

हाई पावर कमेटी ने यह फैसला जेलों मे क्षमता से अधिक कैदियो की संख्या व कोरीना संक्रमण प्रकोप से निपटने के तहत लिया है.  योजना के तहत 30 मई तक कैदियो को कोर्ट मे पेश पर रोक लगा दी गई है. अब पेशी वीडियो कांफ्रेन्सिंग के जरिए ही की जायेगी.

इन्हें मिलेगा लाभ

- जो कैदी पेरोल पर हैं, उनकी पैरोल अगले 60 दिन के लिए बढ़ा दी जाएगी.



- जो शांतिपूर्ण पेरोल के बाद समर्पण कर चुके हैं, उन्हें फिर से 60 दिन की पैरोल दी जायेगी.

- जो सात साल से कम सजा के अपराधी या आरोपी हैं, उन्हें 60 दिन की विशेष पैरोल या अंतरिम जमानत दी जाएगी, बशर्ते जेल मे प्रतिकूल कार्यवाही न की गयी हो.

- जो कैदी 2020-21 में या 5 साल के भीतर कभी पैरोल पर छूटे हों, उन्हे भी 60 दिन की पेन्डेमिक पेरोल दी जाएगी.

- जिनकी अर्जी सरकार के समक्ष लंबित है. एक हफ्ते मे 60 दिन के पैरोल पर रिहाई का फैसला लिया जाएगा.

प्राधिकरण ने एसपी व जिलाधिकारी को पेन्डेमिक पैरोल देने का आंकलन करने को कहा है. प्राधिकरण ने अपने पत्र मे कहा है कि न्याय प्रशासन के हित में, लोक शांति, सुरक्षा व संरक्षा बनाये रखने के लिए जेलों में बंद 65 साल से अधिक के महिला-पुरूष कैदियों, 50 साल से अधिक की महिला कैदियों, सजायाफ्ता गर्भवती महिलाओं, कैंसर, हार्ट, जैसी गंभीर बीमारियों से ग्रस्त सभी कैदियों को 60 दिन का पैरोल पाने का हक हैं. जिला एवं सत्र न्यायाधीश व संबंधित न्यायिक अधिकारियो को जेल मे जाकर कार्यवाही पूरी करने को कहा गया है.

इन्हे पेरोल या अंतरिम जमानत नहीं

हत्या, आजीवन कारावास, फिरौती के लिए अपहरण, हत्या के लिए अपहरण या उत्प्रेरण, जिनकी उम्र 65 साल से कम हो, राज्य व सेना के विरूद्ध अपराध, स्टैम्प अपराध, डकैती, उद्दापन व इसके उत्प्रेरण, दुराचार, दुराचार का प्रयास, मनी लॉन्ड्रिंग, यूपीकोका, पॉक्सो, संगठित अपराध, विदेशी नागरिक, बैंक नोट, करेंसी, एसिड अटैक, समाज या पीडित के लिए खतरा, सुप्रीम कोर्ट मे अर्जी लंबित या खारिज की हो. ऐसे आरोपियो व सजायाफ्ता कैदियों को योजना का लाभ नहीं मिलेगा. सभी सत्र न्यायालयों से कहा गया है कि अर्जी पर 45 दिन की जमानत दे सकते हैं. 2018 में बनी योजना अनुसार भी कार्य किये जाने की छूट दी गयी है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज