इलाहाबादः राजकीय बाल गृह में 7 बच्चों की मौत से हड़कंप, डीएम को सौंपी गई रिपोर्ट
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इलाहाबादः राजकीय बाल गृह में 7 बच्चों की मौत से हड़कंप, डीएम को सौंपी गई रिपोर्ट
Allahabad: 47 दिनों में 7 बच्चों की मौत से हड़कंप

प्रशासन की दलील है कि बाल गृह में आने वाले ज्यादातर बच्चे कमजोर और संक्रमित होते हैं. हालांकि मामले का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने जिला विकास अधिकारी और जिला प्रोबेशन अधिकारी को जांच जिम्मेदारी सौंप दी है, जिसकी रिपोर्ट आज डीएम को सौंप दी गई है.

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इलाहाबाद जिले में स्थित एक राजकीय बाल गृह शिशु में बीते 7 बच्चों की मौत ने प्रशासन पर कई गम्भीर सवाल खड़े कर दिए हैं. मृतकों में ज्यादातर बच्चे लावारिस बताए जा रहे हैं, जिन्हें मजिस्ट्रेट और बाल कल्याण समिति के निर्देश पर राजकीय बाल गृह में रखा गया था. बताया जाता है पिछले 47 दिनों में अब तक 7 बच्चों की मौत हो चुकी है, जिसमें 6 लड़की और एक लड़का शामिल है.

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रिपोर्ट के मुताबिक खुल्दाबाद में स्थित राजकीय बाल गृह में मासूमों की मौत का मामला सामने आने के बाद प्रशासन बचाव की मुद्रा में आ गया है. प्रशासन का कहना है कि बाल गृह में हुई बच्चों की मौतें ज्यादातर गम्भीर रोगों की वजह से हुई हैं. प्रशासन की दलील है कि बाल गृह में आने वाले ज्यादातर बच्चे कमजोर और संक्रमित होते हैं. हालांकि मामले का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने जिला विकास अधिकारी और जिला प्रोबेशन अधिकारी को जांच जिम्मेदारी सौंप दी है, जिसकी रिपोर्ट आज डीएम को सौंप दी गई है.



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जिला प्रोबेशन अधिकारी नीलेश मिश्र के मुताबिक जांच में उन्हें ऐसी कोई गम्भीर खामी नहीं मिली है. उनके मुताबिक मरने वाले बच्चों में ज्यादातर बच्चों की उम्र एक या दो दिन से लेकर छह माह के करीब थी. राजकीय बाल गृह और राजकीय दत्तक ग्रहण ईकाई महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित किया जाता है. बताया जाता है राजकीय बाल गृह में शिशु की क्षमता 50 बच्चों की है जबकि मौजूदा समय में वहां सिर्फ 11 बच्चे हैं. जबकि राजकीय दत्तक ग्रहण ईकाई की क्षमता 10 बच्चों को रखने की है, लेकिन यहां क्षमता से अधिक 32 बच्चे रखे गए हैं.

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रिपोर्ट कहती है कि जुलाई माह में राजकीय दत्तक ग्रहण ईकाई में बच्चों की संख्या बढ़कर 56 हो गई थी, जिसके बाद जिला प्रोबेशन अधिकारी ने निदेशक से अनुरोध कर 20 बच्चों को दूसरे राजकीय दत्तक ग्रहण ईकाईयों में ट्रांसफर किया गया. वहीं, मामले पर समाजसेविका नाजिया नफीस ने प्रशिक्षित परिचायिकाओं की कमी को बच्चों की मौतों के लिए जिम्मेदार बताया है. इसके अलावा बच्चों की मौतों के लिए परिवारिक परिवेश का नहीं मिल पाना भी एक कारण माना जा रहा है.

(रिपोर्ट-सर्वेश पांडेय, इलाहाबाद)
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