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Mahant Narendra Giri Suicide Case: चेले ही नहीं ये SP नेता भी थे संपत्ति विवाद के घेरे में

पुलिस के लिए पहेली बनी है महंत नरेंद्र गिरि की मौत (File photo)

पुलिस के लिए पहेली बनी है महंत नरेंद्र गिरि की मौत (File photo)

Mahant Narendra Giri death: अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और बाघंबरी मठ के प्रमुख महंत नरेंद्र गि​रि की मौत यूपी पुलिस के लिए अबूझ पहेली बनी हुई है. इस मामले में सुसाइड नोट में महंत ने मौत की वजह साफ तो कर दी है, लेकिन अब संपत्ति विवाद में सपा विधायक का नाम भी सामने आ गया है.

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लखनऊ. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (All India Akhara Parishad) के अध्यक्ष और बाघंबरी मठ (Baghmbri Math) के प्रमुख महंत नरेंद्र गि​रि की मौत यूपी पुलिस के लिए अबूझ पहेली बनी हुई है. यह घटना सूबे में सुर्खियां बनी है. सुसाइड नोट सामने आने के बाद महंत का चेला गिरफ्तार हो गया है, लेकिन कई और ऐसे राजदार हैं जो पूरे मामले को संदिग्ध बना रहे हैं. पुलिस एक एक कड़ी को जोड़कर आगे बढ़ रही है, हालांकि महंत नरेंद्र गिरि की मौत की असली वजह क्या है इस रहस्य से जांच के बाद ही पर्दा उठेगा. इतना तो तय है कि मठ बाघम्बरी गद्दी और बड़े हनुमान मंदिर की संपत्ति को लेकर जो विवाद शुरू हुआ था, उसने महंत नरेंद्र गिरि की जान ले ली.

दरअसल, अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि का हंड़िया के सपा विधायक से जमीन को लेकर विवाद हुआ था. यह विवाद 2012 में सपा नेता और हंडिया से विधायक रहे महेश नारायण सिंह से जमीन की खरीद फरोख्त को लेकर हुआ था. फरवरी 2012 में महंत ने सपा नेता महेश नारायण सिंह, शैलेंद्र सिंह, हरिनारायण सिंह व 50 अज्ञात के खिलाफ जार्ज टाउन में मुकदमा दर्ज कराया गया था. इस मामले में दूसरे पक्ष ने भी नरेंद्र गिरि, आनंद गिरि व दो अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी.

मठ की जमीन का कुछ हिस्सा महंत नरेंद्र गिरि ने बेच दिया था, ताकि जीर्ण शीर्ण हो चुके मठ का जीर्णोद्धार किया जा सके. बताया जा रहा है कि सपा विधायक महेश नारायण दबंगई के बल पर बगैर पूरा पैसा दिए जमीन लिखवाना चाह रहे थे. इसके लिए वह लगातार महंत नरेंद्र गिरि पर दबाव बना रहे थे. महंत नरेंद्र गिरी इस दबाव के आगे झुके नहीं और जमीन की रजिस्ट्री के लिए तैयार नहीं हुए.

जिसके बाद मठ में सपा विधायक असलहों के साथ पहुंचे थे काफी हो हंगामा भी हुआ था. बाद में पैसे देने के बाद ही महंत नरेंद्र ​गिरि ने जमीन की रजिस्ट्री की थी. मौजूदा समय में 7 बीघे जमीन की कीमत 40 करोड़ रुपये बताई जा रही हैं. इस जमीन बिक्री को लेकर भी समय समय पर महंत नरेंद्र गिरी पर आरोप लगते रहे हैं.

करोड़ों में है मठ की संपत्ति

मठ बाघम्बरी गद्दी और बड़े हनुमान मंदिर दोनों पंचायती अखाड़ा निरंजनी के तहत नहीं आते हैं, बल्कि सम्पत्ति मठ बाघंबरी गद्दी के अधीन आती है. मौजूदा समय में मठ की गद्दी में जहां महंत विचारानंद संस्कृत महाविद्यालय संचालित हो रहा है, वहीं पर एक गौशाला के साथ ही कुंभ के दौरान यहां पर तीन मंजिला एक बड़ा भव्य गेस्ट हाउस भी बनाया गया है. कुल मिलाकर इस मठ और संस्कृत महाविद्यालय की संपत्ति करोड़ों में है, जिसको लेकर महंत नरेंद्र ​गिरि और स्वामी आनंद ​गिरि के बीच विवाद शुरू हो गया था.

महंत नरेंद्र गिरि केस की जांच के लिए DIG प्रयागराज ने SIT का गठन किया गया है. यूपी सरकार ने इस मामले की जांच के निर्देश दिए हैं.

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