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प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की दखल के बाद मिड-डे मील में नमक-रोटी मामला उठाने वाले पत्रकार को मिली राहत
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News18 Uttar Pradesh
Updated: December 18, 2019, 7:44 PM IST
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया की दखल के बाद मिड-डे मील में नमक-रोटी मामला उठाने वाले पत्रकार को मिली राहत
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष जस्टिस चंद्रमौली कुमार प्रसाद ने की प्रेस कांफ्रेंस

जस्टिस चंद्रमौली कुमार प्रसाद (Justice Chandramauli Kumar Prasad) ने इस बात पर भी चिंता जताई कि इस गंभीर मामले को लेकर किसी पत्रकार संगठन (Press organization) ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (Press Council of India) में कोई शिकायत नहीं की. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रेस काउंसिल आफ इंडिया ने सुओ मोटो (Suo moto) लेते हुए जांच की...

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प्रयागराज. यूपी के मिर्जापुर जिले (Mirzapur district) में एक प्राइमरी स्कूल में मिड डे मील (mid day meal) में बच्चों को नमक रोटी दिए जाने को लेकर खबर छापने और वीडियो वायरल करने वाले पत्रकार पवन जायसवाल को बड़ी राहत मिली है. प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (Press Council of India) के दखल के बाद मिर्जापुर पुलिस (Mirzapur Police) ने केस से पत्रकार का नाम हटा दिया है.

प्रेस संगठनों के रवैये पर चिंता भी जताई
इस बात की जानकारी खुद पत्रकार मामलों से जुड़ी सर्वोच्च संस्था प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (Press Council of India) के अध्यक्ष जस्टिस चंद्रमौली कुमार प्रसाद (Justice Chandramauli Kumar Prasad) ने प्रेस कांफ्रेंस (Press conference) कर दी है. उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई है कि इस गंभीर मामले को लेकर किसी पत्रकार संगठन (Press organization) ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (Press Council of India) में कोई शिकायत नहीं की थी. लेकिन मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रेस काउंसिल आफ इंडिया ने सुओ मोटो (Suo moto) लेते हुए जांच की. जिसके बाद मिर्जापुर पुलिस (Mirzapur Police) का जवाब आया है कि पत्रकार के खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है और केस से भी उसका नाम हटा दिया गया है. हालांकि प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष जस्टिस चंद्रमौली कुमार प्रसाद ने कहा है कि इस कार्रवाई से प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया पूरी तरह से संतुष्ट नहीं है. उन्होंने कहा है कि दोषी अफसरों के खिलाफ प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया कार्रवाई की भी सिफारिश करेगी.

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (Press Council of India) के अध्यक्ष ने कहा कि यह घटना पत्रकार के खिलाफ क्रूर कार्रवाई है. जिसमें व्यवस्था को ठीक करने के बजाए मैसेंजर के खिलाफ ही कार्रवाई कर दी गई. प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के हस्तक्षेप के बाद पत्रकार के खिलाफ दर्ज केस वापस लिए जाने पर योगी सरकार (Yogi Government) के अफसरों के कामकाज पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. गौरतलब है कि प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष जस्टिस चंद्रमौलि कुमार प्रसाद प्रेस पर हमले और पत्रकारों की शिकायतों की जनसुनवाई करने पहुंचे थे. प्रयागराज में दो दिनों तक हुई जन-सुनवाई में प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने 45 केसों की सुनवाई की और 33 केसों पर निर्णय सुनाया जबकि 18 मामलों का निस्तारण भी हुआ. प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के सामने लगभग 40 मामले यूपी के और अन्य मामले आंध्र प्रदेश व दूसरे राज्यों से संबंधित थे.



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First published: December 18, 2019, 7:44 PM IST
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