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UP: मुगल म्यूजियम के बाद अब ताजमहल का नाम तेजोलय करने की उठी मांग

ताजमहल(file photo)

ताजमहल(file photo)

प्रयागराज (Prayagraj) में दिए बयान में भोले सिंह (Bhole Singh) ने कहा कि ताजमहल (Tajmahal) कभी भव्य शिव मंदिर था. मुस्लिम शासकों ने इसे इस्लामिक लुक दिया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 15, 2020, 2:07 PM IST
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प्रयागराज. उत्तर प्रदेश में अखिलेश सरकार के कार्यकाल के दौरान शुरू हुए निर्माणाधीन मुगल म्यूजियम (Mughal Museum) का नाम छत्रपति शिवाजी महाराज (Chhatrapati Shivaji Maharaj) के नाम पर किए जाने के बाद सियासत शुरू हो गई है. इस कड़ी में विश्वप्रसिद्ध ताजमहल (Tajmahal) का नाम बदलने की मांग की जा रही है. आगरा (Agra) के ताजमहल का नाम बदलने के पीछे दलीलें भी दी जा रही हैं. यूपी गौ सेवा आयोग के भोले सिंह ने कहा है कि अब सरकार को ताजमहल का भी नाम बदलकर तेजोलय कर देना चाहिए. उन्होंने ताजमहल को भगवान शिव का प्राचीन मंदिर बताते हुए इसका नाम बदलने की वकालत की.

दिया ये तर्क
प्रयागराज में दिए बयान में भोले सिंह ने कहा कि ताजमहल कभी भव्य शिव मंदिर था. यह इतिहास का शाश्वत सत्य है. उन्होंने कहा कि तेजोलय को बाद में मुस्लिम शासकों ने इस्लामिक लुक दिया. उन्होंने दावा किया कि आज भी ताजमहल में पानी की बूंदें टपकती हैं, यह बूंदें कहां से टपकती है इसका वैज्ञानिक भी पता नहीं लगा सके हैं. भोले सिंह ने मुगल म्यूजियम का नाम बदलकर छत्रपति शिवाजी के नाम पर किए जाने का स्वागत किया. उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि वे लगातार कड़े फैसले ले रहे हैं.

दरअसल, आगरा मंडल की समीक्षा बैठक के दौरान सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्माणाधीन मुगल म्यूजियम का नाम छत्रपति शिवाजी महाराज म्यूजियम करने का आदेश दिया. मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई मुग़ल हमारा नायक नहीं हो सकता. छत्रपति शिवाजी महाराज ही हमारे असली नायक हैं. मुख्यमंत्री ने इसे लेकर एक ट्वीट भी किया. जिसके बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर नाम बदलने का आरोप लगाया. समाजवादी पार्टी ने कहा कि यह सरकार सिर्फ नाम बदल रही है. कांग्रेस ने कहा कि नाम बदलने की क्या आवश्यकता है. आज असल मुद्दा गरीब, किसान, बेरोजगारी और कानून व्यवस्था है.
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