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हाईकोर्ट का आगरा यूनिवर्सिटी को आदेश, फर्जी डिग्री से शिक्षक बने 3517 लोगों के बारे में 10 दिन में करे फैसला
Agra News in Hindi

Sarvesh Dubey | News18 Uttar Pradesh
Updated: January 29, 2020, 11:31 PM IST
हाईकोर्ट का आगरा यूनिवर्सिटी को आदेश, फर्जी डिग्री से शिक्षक बने 3517 लोगों के बारे में 10 दिन में करे फैसला
आगरा विश्वविद्यालय में फर्जी डिग्री से शिक्षक बने 3517 लोग.

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने फर्जी डिग्री और मार्कशीट पर नौकरी कर रहे 3517 अभ्यर्थियों के मामले में आगरा विश्वविद्यालय (Agra University) को 10 दिन में निर्णय लेने का निर्देश दिया है. इसके अलावा कोर्ट ने याची छात्रों को प्रत्युत्तर दाखिल करने की भी छूट दी है.

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इलाहाबाद. इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने फर्जी डिग्री और मार्कशीट पर सहायक अध्यापक की नौकरी कर रहे 3517 अभ्यर्थियों के मामले में आगरा विश्वविद्यालय (Agra University) को 10 दिन में निर्णय लेने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा है कि विश्वविद्यालय द्वारा जारी नोटिस में दिया गया 15 दिन का समय बीत चुका है, लिहाजा विश्वविद्यालय 10 दिन में इस मामले पर निर्णय लेकर कर अदालत में जवाब दाखिल करे. जबकि कोर्ट ने विश्वविद्यालय का जवाब दाखिल होने के बाद याची छात्रों को प्रत्युत्तर दाखिल करने की भी छूट दी है.

न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी ने दिया आदेश
अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के सैकड़ों छात्रों की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी ने दिया है. याचिका में आगरा विश्वविद्यालय द्वारा 28 दिसंबर 2019 को जारी नोटिस को चुनौती दी गई है. नोटिस में एसआईटी जांच में फर्जी पाए गए 3517 छात्रों को 15 दिन के भीतर 15 बिंदुओं पर जानकारी उपलब्ध कराने के लिए कहा गया था. एसआईटी जांच में इन सभी छात्रों की मार्कशीट या तो फर्जी पाई गई या मार्कशीट में किसी प्रकार की छेड़छाड़ की गई थी. इन मार्कशीटों के आधार पर तमाम अभ्यर्थी सहायक अध्यापक पद पर नौकरी कर रहे हैं. विश्वविद्यालय द्वारा नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है. इससे पूर्व त्रिलोक सिंह और 495 अन्य के मामले में हाईकोर्ट ने 20 जनवरी के आदेश में विश्वविद्यालय को यह बताने को कहा था उसने किस आधार पर मार्कशीट को फर्जी करार दिया है. इसका कारण नहीं बताया गया है. कोर्ट ने विश्वविद्यालय को कारण स्पष्ट करते हुए हर छात्र को कारण बताओ नोटिस जारी कर सकारण आदेश पारित करने का निर्देश दिया था.
नोटिस कराया तामील

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि नोटिस पर्याप्त रूप से तामील कराया गया है और 15 दिन का समय भी बीत चुका है. लिहाजा विश्वविद्यालय अब 10 दिन के भीतर इस मामले में निर्णय लेकर अदालत को अवगत कराए. याचिका पर अगली सुनाई 10 फरवरी को होगी.

 

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First published: January 29, 2020, 11:26 PM IST
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