प्रयागराज में हवा हुई जहरीली, आसमान में छाई धुंध, सांस लेना हुआ मुश्किल

 वहीं प्रदूषण से लोगों के सांस फूलने-आंखों में जलन जैसी परेशानी होने लगी है.
वहीं प्रदूषण से लोगों के सांस फूलने-आंखों में जलन जैसी परेशानी होने लगी है.

खास तौर पर प्रयागराज (Prayagraj) के इलाके में दिन में धुन्ध छायी हुई है, जिससे लोगों को ज्यादा दूर तक साफ दिखायी नहीं दे रही है. धुन्ध की वजह से लोगों को कई तरह की दिक्कतों का भी सामना करना पड़ रहा है.

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प्रयागराज. ठंड का मौसम शुरु होने के साथ ही बड़े महानगरों के बाद अब अब संगम नगरी प्रयागराज (Prayagraj) की आबोहवा भी जहरीली (Poisonous) होने लगी है. यहां के वातावरण में स्मॉग (Smog) का जहर तेजी से घुलने लगा है. पिछले कई दिनों से संगम नगरी में जहां धुन्ध और कोहरे का असर देखा जा रहा है, तो वहीं स्मॉग के छाने से भी लोगों को कई तरह की दिक्कतें पेश आ रही हैं. प्रतिदिन मॉर्निंग वॉक के लिए निकलने वाले लोगों से लेकर सड़क पर चलने वाले लोगों को वातावरण में घुले स्मॉग से सांस लेने की समस्या भी शुरु हो गयी है. इसके साथ ही स्मॉग की परत वायुमण्डल में छाये रहने से सूर्य निकलने के बाद भी विजिबिलिटी (visibility) काफी लो नजर आ रही है.

खास तौर पर संगम के इलाके में दिन में धुन्ध छायी हुई है. जिससे लोगों को ज्यादा दूर साफ दिखायी नहीं दे रही है. धुन्ध की वजह से लोगों को कई तरह की दिक्कतों का भी सामना करना पड़ रहा है. किसी की आंख में जलन हो रही है तो किसी का सिर चकरा रहा है. कई लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है. नार्मल एयर क्वालिटी इंडेक्स जहां 50 रहना चाहिए. वहीं, प्रयागराज में एयर क्वालिटी इंडेक्स का लेवल 172 तक पहुंच गया है, जो कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. इसके साथ ही वातावरण का कन्सन्ट्रेशन भी 95.3 माइक्रोग्राम प्रति मीटर क्यूबेक तक पहुंच गया है जो कि स्वास्थ्य के लिहाज से ठीक नहीं है. मार्च और अप्रैल में लॉकडाउन के मुकाबले यह आंकड़ा तीन गुना तक बढ़ गया है. एक्यूआई लेवल बढ़ने से वातावरण में जहां अभी से हल्की धुंध नज़र आने लगी है, वहीं प्रदूषण से लोगों के सांस फूलने-आंखों में जलन जैसी परेशानी होने लगी है.

त्यौहार में होने वाली आतिशबाजी के बाद क्या होगा
अब लोगों की चिंता इस बात की है कि अभी ये हालात हैं तो दीपावली के त्यौहार में होने वाली आतिशबाजी के बाद क्या होगा. वहीं, जानकारों का मानना है कि डीजल के वाहनों से निकलने वाले धुयें, कृषि में काम आने वाले डीजल से संचालित कृषि यन्त्रों के साथ ही उद्योगों और ईंट भट्टों से निकलने वाले धुंये से प्रदूषण हो रहा है. खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों को स्मॉग से बचाने की जरुरत है. स्मॉग से बचने के लिए लोग मॉस्क या किसी कपड़े से मुंह ढ़ंक कर ही घर से बाहर निकल सकते हैं. हांलाकि, कोविड के चलते पहले ही लोगों को मास्क पहनने की सलाह दी गई है. इसके साथ ही स्मॉग से बचाव के लिए खान-पान पर भी विशेष ध्यान देने की जरुरत है, ताकि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बनी रही. मौसम के जानकारों का मानना है कि शीतलहर बढ़ने और दीपावली के त्यौहार के बाद स्मॉग की समस्या और ज्यादा बढ़ सकती है.
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