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प्रयागराज: संगम नगरी भी स्मॉग की चपेट में, सांस लेना हुआ मुश्किल

संगम नगरी में स्मॉग की चादर

संगम नगरी में स्मॉग की चादर

प्रयागराज (Pryagraj) में बीते चार-पांच दिनों से स्मॉग (Smog) छाया हुआ है. जो सेहत के लिए बेहद खतरनाक है. शहर की सड़कों पर धुंध ही धुंध दिखाई दे रही है. लोगों को कई तरह की दिक्कतों का भी सामना करना पड़ रहा है. किसी की आंख में जलन हो रही है तो किसी को चक्कर आ रहे हैं सबसे बुरा हाल तो सांस के मरीजों का है...

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प्रयागराज. संगम नगरी की आबोहवा में भी स्मॉग का जहर घुल गया है. दीपावली पर फोड़े गए पटाखों और वाहनों से निकलने वाले धुएं को इसकी मुख्य वजह बताया जा रहा है. पटाखों और वाहनों के धुएं और उसकी राख के हवा में मिलने से प्रयागराज की आबोहवा दूषित हो गई है.

धुंध ही धुंध
स्मॉग के चलते शहर की सड़कों पर धुंध ही धुंध दिखाई दे रही है, जिसकी वजह से लोगों को कई तरह की दिक्कतों का भी सामना करना पड़ रहा है. किसी की आंख में जलन हो रही है तो किसी को चक्कर आ रहे हैं सबसे बुरा हाल तो सांस के मरीजों का है. कई लोगों को स्किन की बीमारी हो गई है. संगमनगरी में छाई इस धुंध की चादर को एक्सपर्ट स्मॉग बता रहे हैं.

प्रयागराज में स्मॉग के चलते सड़कों पर छाई धुंध


स्मॉग के चलते यहां विजिबिलिटी भी लो हो गई है. रिटायर्ड रक्षा वैज्ञानिक डॉ. मोहम्मद आरिफ के मुताबिक इस साल स्मॉग के ज्यादा फैलने की भी संभावना है. दीपावली के बाद मौसम के रुख में आए बदलाव ने लोगों को ठंड का एहसास करा दिया है. लेकिन दीपावली में हुई जमकर आतिशबाजी और शहर में वाहनों की आवाजाही के चलते वातावरण में हल्की धुंध छाई हुई है. धुंध का असर शहर की सड़कों पर साफ़ तौर पर देखने को मिल रहा है.

बेहद खतरनाक है स्मॉग
प्रयागराज में दीपावली के बाद अब एयर क्वालिटी इंडेक्स में कुछ सुधार तो हुआ है, लेकिन यह अभी भी खतरनाक स्तर पर बना हुआ है. प्रयागराज में बीते चार-पांच दिनों से स्मॉग छाया हुआ है. जो सेहत के लिए बेहद खतरनाक है. मार्निंग वॉक के लिए घर से निकलने वाले लोगों को शिकायत है कि उन्हें फ्रेश एयर नहीं मिल रही है. वहीं ई-रिक्शा चलाने वाले रवि शंकर आदिवासी news 18 से बातचीत में कहते हैं कि उनके वाहन से प्रदूषण नहीं हो रहा है. लेकिन डीजल और पेट्रोल के वाहनों से होने वाले प्रदूषण से उन्हें भी काफी परेशानी होती है.

प्रयागराज में धुंध ही धुंध


क्योंकि उन्हें तो दस से 12 घंटे तक सड़क पर ही ई-रिक्शा चलाना पड़ता है. जबकि छात्र राहुल यादव बताते हैं कि सुबह स्मॉग की वजह से कोचिंग जाने में और सांस लेने में तकलीफ महसूस हो रही है. वहीं संगम नगरी में फैले स्मॉग को लेकर रिटायर्ड रक्षा वैज्ञानिक डॉ. मोहम्मद आरिफ का कहना है कि स्मॉग पटाखों से निकलने वाले सल्फर डीजल के वाहनों से निकलने वाले धुएं, कृषि में काम आने वाले डीजल से संचालित कृषि यंत्रों के साथ ही उद्योगों और ईंट भट्टों से निकलने वाले धुएं से हो रहा है. उन्होंने इसे लोगों के स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक भी बताया है. खासतौर पर स्कूल जाने वाले बच्चों को इससे बचाए जाने की जरुरत बताई है.

रिटायर्ड रक्षा वैज्ञानिक डॉ. मोहम्मद आरिफ लोगों को स्मॉग से बचने के लिए मॉस्क या स्कार्फ से मुंह ढ़ंक कर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी है. इसके साथ ही स्मॉग से बचाव के लिए खान-पान पर भी विशेष ध्यान देने को कहा है. उन्होंने कहा है कि महानगरों की तरह ही यदि इसी तरह स्मॉग छोटे शहरों में भी बढ़ता रहा तो सर्दियों में बच्चों के स्कूल तक बंद करने की नौबत आ सकती है. हांलाकि उन्होंने कहा है कि अगर वातावरण को शुद्ध रखना है तो सरकार को सख्त कदम उठाने होंगे.

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