इलाहाबाद HC: यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के आवंटियों को बड़ी राहत
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इलाहाबाद HC: यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के आवंटियों को बड़ी राहत
दिल्ली हाई कोर्ट ने हिंसा की जांच को लेकर निर्देश दिए हैं. (सांकेतिक फोटो)

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad Highcourt) ने कहा है कि किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा देकर प्राधिकरण को उसकी भरपाई आवंटियों से करने का अधिकार नहीं है. कोर्ट ने 29 अगस्त 2014 के शासनादेश को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है.

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प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने गौतमबुद्धनगर (Gautam Budh Nagar) में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (Yamuna Expressway Industrial Development Authority) के आवंटियों को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने कहा है कि किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा देकर प्राधिकरण को उसकी भरपाई आवंटियो से करने का अधिकार नहीं है. कोर्ट ने 29 अगस्त 2014 के शासनादेश को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है. साथ ही कहा है कि गजराज सिंह केस का फैसला नोएडा व ग्रेटर नोएडा के अधिग्रहण पर ही लागू होगा. यह अन्य प्राधिकरणों के अधिग्रहण पर लागू नहीं होगा.

29 अगस्त 2014 के शासनादेश से राज्य सरकार ने गजराज सिंह केस के निर्देश अनुसार किसानों को 64.70 फीसदी अधिक मुआवजा देने का फैसला लिया है. कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार का फैसला कानून के खिलाफ है. उसे ऐसा करने का क्षेत्राधिकार नहीं है. कानून के खिलाफ साम्या न्याय (इक्विटी) नहीं दी जा सकती. सरकार भी मनमानी नही कर सकती. कोर्ट ने यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण की भूमि आवंटियो से अतिरिक्त धनराशि मागने को अवैध करार दिया है.

20 याचिकाओं को स्वीकार करते हुए दिया आदेश



यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति वीसी दीक्षित की खंडपीठ ने मेसर्स शकुन्तला एजुकेशनल एण्ड वैलफेयर सोसाइटी, जय प्रकाश एसोसिएट सहित 20 याचिकाओं को स्वीकार करते हुए दिया है.
सरकार का ये है आदेश

मालूम हो कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की पूर्णपीठ ने गजराज सिंह केस में नोएडा अथॉरिटी को किसानों की अधिगृहीत भूमि का 64.70 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश दिया. जिसे सावित्री देवी केस मे सुप्रीम कोर्ट ने सही माना किन्तु कहा कि विशेष स्थिति में याचियों को राहत दी गई है. यह सामान्य समादेश नहीं है. इससे पहले राज्य सरकार ने सभी किसानों को अधिगृहीत भूमि का अतिरिक्त मुआवजा देने का शासनादेश जारी कर दिया. यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने इसे स्वीकार करते हुए मुआवजे का भुगतान कर दिया और आवंटियो से इस राशि की मांग की. जिसे यह कहते हुए चुनौती दी गई थी कि यह पट्टा करार का उल्लंघन है.

सरकार चाहे तो किसानों को मुआवजा बढ़ा कर दे लेकिन...

कोर्ट ने कहा कि सरकार चाहे तो किसानो को अधिक मुआवजा दे सकती है. ऐसा करना गलत नहीं होगा. किन्तु यह मनमाना नहीं हो सकता. वह पिक एंड चूज नहीं कर सकती. भाई-भतीजवाद नहीं कर सकती. वह कानूनी उपबंधों के अधीन रहते हुए ही ऐसा कर सकती है. कानून के विपरीत नहीं.

कोर्ट ने कहा कि सरकार की कोई नीति पहले हुए करार को बदल नहीं सकती. प्राधिकरण के सीइओ को प्रीमियम घटाने बढ़ाने का अधिकार है किन्तु वह करार में बदलाव नहीं कर सकता इसलिए प्राधिकरण आवंटियो से अतिरिक्त धनराशि मांग नहीं सकता.

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