HC: 34 साल से सिख विरोधी दंगा पीड़ितों को नहीं दिया मुआवजा, केन्द्र व राज्य से जवाब तलब

यह आदेश न्यायमूर्ति भारती सपू्र और न्यायमूर्ति जयन्त बनर्जी की खण्डपीठ ने पीलीभीत के प्यारा सिंह व बरेली के हरपाल सिंह की याचिका पर दिया है.

Sarvesh Dubey | News18 Uttar Pradesh
Updated: November 15, 2018, 10:40 PM IST
HC: 34 साल से सिख विरोधी दंगा पीड़ितों को नहीं दिया मुआवजा, केन्द्र व राज्य से जवाब तलब
इलाहाबाद हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
Sarvesh Dubey | News18 Uttar Pradesh
Updated: November 15, 2018, 10:40 PM IST
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पीलीभीत और बरेली में वर्ष 1984 में हुए सिख विरोधी दंगा पीड़ितों को मुआवजे के भुगतान मामले में केन्द्र व राज्य सरकार से एक माह में जवाब मांगा है. यह आदेश न्यायमूर्ति भारती सपू्र और न्यायमूर्ति जयन्त बनर्जी की खण्डपीठ ने पीलीभीत के प्यारा सिंह व बरेली के हरपाल सिंह की याचिका पर दिया है.

दंगों में प्यारा सिंह की पत्नी व पुत्री की हत्या कर घर में आग लगा दी गई थी और उनकी लाश जलते हुए घर में फेंक दी गयी थी. कुछ मवेशी भी घर में लगी आग में जल मरे. सरकार ने मृतक के लिए 20 हजार रूपये व घायलों को 10 हजार की सहायता दी गयी थी. इसी प्रकार हरपाल सिंह के घर में भी आग लगाकर पिता को जलते घर में फेंक कर हत्या कर दी गयी थी और मां को इतनी बुरी तरह से मारा—पीटा गया कि मरणासन्न अवस्था में पहुंच गईं. घर में बंधे मवेशी जल मरे थे.

सरकार की तरफ से 9 लाख 45 हजार का मुआवजा संस्तुति की गयी है किन्तु भुगतान नहीं किया जा सका. मृतक के लिए 20 हजार व घायल को 10 हजार का भुगतान किया गया है. याची अधिवक्ता दिनेश राय का कहना है कि केन्द्र सरकार ने 11 जनवरी 06 को पुर्नवास नीति घोषित की जिसके अनुसार मृतक को साढ़े तीन लाख, घायल को एक लाख 25 हजार रूपये देने का निर्देश दिया गया है. सम्पत्ति के नुकसान का दस गुना मुआवजा देने की घोषणा की है. राज्य सरकार ने भी नीति को लागू करने के निर्देश जारी किये हैं.

याची का कहना है कि फरवरी 15 में पांच लाख देने की बात कही गयी लेकिन आयुक्त सिख विरोधी दंगा कानपुर मंडल 34 साल बाद भी मुआवजे का भुगतान न कर सके. याचीगण ने हाईकोर्ट की शरण ली है, जिस पर कोर्ट ने दोनों सरकारों से याचिका के आरोपों पर जवाब मांगा है.

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First published: November 15, 2018, 10:40 PM IST
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