इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला, DJ बजाया तो 5 साल की जेल और 1 लाख जुर्माना

News18 Uttar Pradesh
Updated: August 21, 2019, 5:07 PM IST
इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला, DJ बजाया तो 5 साल की जेल और 1 लाख जुर्माना
हाईकोर्ट ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण कानून का उल्लंघन नागरिकों के मूल अधिकारों का भी उल्लंघन है. (File Photo)

ध्वनि प्रदूषण (Noise pollution) पर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने बड़ा फैसला सुनाया है. डीजे (D J) बजाने की अनुमति देने पर हाईकोर्ट (High Court) ने पूरी तरह पाबंदी लगा दी है.

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ध्वनि प्रदूषण (Noise pollution) पर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने बड़ा फैसला सुनाया है. डीजे (D J) बजाने की अनुमति देने पर हाईकोर्ट (High Court) ने पूरी तरह पाबंदी लगा दी है. इसके साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि आदेश का उल्लंघन करने वालों को 5 साल की जेल (Jail) और एक लाख का जुर्माना लगाया जा सकता है. अगर डीजे बजाने की शिकायत मिलती है तो उस एरिया से संबंधित पुलिस थाना इंचार्ज इसके लिए जवाबदेह होंगे. कोर्ट ने कहा कि बच्चों, बुजुर्गों व हॉस्पिटल (Hospital) में भर्ती मरीजों के साथ मानव स्वास्थ्य के लिए ध्वनि प्रदूषण खतरा है.

जस्टिस पी के एस बघेल और जस्टिस पंकज भाटिया की खंडपीठ ने यह आदेश दिया है. हाईकोर्ट ने यह फैसला हाशिमपुर, प्रयागराज के निवासी सुशील चन्द्र श्रीवास्तव व अन्य की याचिका पर सुनाया. याची का कहना था कि जिला प्रशासन ने रिहायशी क्षेत्र हासिमपुर रोड पर एलसीडी लगाया है, जो सुबह चार बजे से आधी रात तक बजता रहता है. याची की मां 85 वर्ष की है. आसपास कई अस्पताल हैं. इस शोर से स्थानीय लोगों व मरीजों को परेशानी हो रही है. इससे बच्चों को पढ़ाई में दिक्कत आ रही है. अधिकारी ध्वनि प्रदूषण रोकने में नाकाम हैं.

नागरिकों के मूल अधिकारों का भी उल्लंघन
इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण कानून का उल्लंघन नागरिकों के मूल अधिकारों का भी उल्लंघन है. कोर्ट ने सभी डीएम को टीम बनाकर ध्वनि प्रदूषण की निगरानी करने और दोषियों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा कि सभी धार्मिक त्योहारों से पहले डीएम और एसएसपी बैठक कर कानून का पालन सुनिश्चित कराएं. कोर्ट ने कहा कि कानून का उल्लंघन करने पर 5 साल तक की कैद और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है.

राज्य सरकार को दिया निर्देश
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को भी आदेश दिया है कि वो ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण कानून के तहत होने वाले अपराध की एफआईआर दर्ज की जाए. सरकार को निर्देश दिया है कि वह प्रदेश के सभी शहरीय क्षेत्रों को औद्योगिक, व्यवसायिक, रिहायशी या साइलेंस जोन के रूप में श्रेणीबद्ध करें. कोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव को सभी अधिकारियों को आदेश का पालन करने का निर्देश जारी करने को कहा है. हाईकोर्ट में याची अधिवक्ता अनिल भूषण और अर्पण श्रीवास्तव ने मामले में बहस की थी.

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First published: August 21, 2019, 4:45 PM IST
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