इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पहली बार परिवार न्यायालयों में प्रधान न्यायाधीश की नियुक्ति 
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इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पहली बार परिवार न्यायालयों में प्रधान न्यायाधीश की नियुक्ति 
अपर जिला जजों को पदोन्नति भी दी गई है. (File)

परिवार न्यायालय (Family Court) के अलग कैडर का गठन होने के बाद पारिवारिक मुकदमों के निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद है. इनकी मॉनिटरिंग सीधे हाईकोर्ट (High Court) द्वारा किए जाने से भी मुकदमों की संख्या में कमी लाने और समयबद्ध निस्तारण करने में सहूलियत होगी.

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प्रयागराज. उत्तर प्रदेश में परिवार न्यायालय (Family Court) के अलग कैडर गठित होने के बाद पहली बार इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने सभी परिवार न्यायालयों के प्रमुख न्यायाधीशों  की नियुक्तियां कर दी है. जिला जज रैंक के इस पद पर तैनाती के लिए कई अपर जिला जजों को पदोन्नति भी दी गई है. तमाम न्यायिक अधिकारियों की प्रोन्नति और तैनाती के कारण कुल  171 न्यायिक अधिकारियों की शिफ्टिंग की गई है. गौरतलब है कि यूपी में परिवार न्यायालय नियमावली लागू होने के बाद परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश को जिला जज की रैंक दी गई है. अब ये सीधे हाईकोर्ट के अधीन काम करेंगे. अभी तक जिला जज के अधीन काम करते थे.

इसी क्रम में प्रयागराज में प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय रामकेश की जगह यहीं पर अपर जिला जज रहे सुनील कुमार चतुर्थ को प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय बनाया गया है. जबकि रामकेश अपर जिला जज के पद पर जिला न्यायालय इलाहाबाद में  ही नियुक्त किए गए हैं. इसी प्रकार से प्रतापगढ़ में प्रधान  न्यायाधीश परिवार न्यायालय जय प्रकाश पांडेय इसी पद रहेंगे. उनकी रैंक जिला जज के बराबर कर दी गई है. कौशांबी में अनुपम कुमार को अपर जिला जज के पद से प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय के पद पर नियुक्ति दी गई है. इस पद पर रहे दिनेश तिवारी कौशांबी में ही अपर जिला जज के पद नियुक्त किए गए हैं. इसी प्रकार से प्रदेश के अन्य जिलों में भी प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय के पदों पर नियुक्तियां की गई हैं.

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प्रदेश सरकार को भेजी गई नियुक्ति
परिवार न्यायालय के अलग कैडर का गठन होने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले दिनों प्रदेश सरकार को न्यायिक अधिकारियों की सूची के साथ परिवार न्यायालयों में नियुक्तियां करने की संस्तुति भेजी थी. प्रदेश सरकार की मंजूरी मिल जाने के बाद यह नियुक्तियां की गई हैं. परिवार न्यायालय के अलग कैडर का गठन होने के बाद पारिवारिक मुकदमों के निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद है. इनकी मॉनिटरिंग सीधे हाईकोर्ट द्वारा किए जाने से भी मुकदमों की संख्या में कमी लाने और समयबद्ध निस्तारण करने में सहूलियत होगी.
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