Order…Order: इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम आदेश- संदिग्ध संक्रमित की मौत को भी कोरोना से मौत में गिने सरकार

सदिग्ध संक्रमित के मौत को भी कोरोना से मौत में जोड़ने का निर्देश (फाइल फोटो)

सदिग्ध संक्रमित के मौत को भी कोरोना से मौत में जोड़ने का निर्देश (फाइल फोटो)

Allahabad High Court Order on Covid Deaths: जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस अजित कुमार की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार व सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों को निर्देश दिया है कि कोविड 19 से होने वाली संदिग्ध मौतों को भी कोरोना से हुई मौत माना जाए.

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प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने कोरोना प्रबंधन को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार और अस्पतालों को एक अहम निर्देश देते हुए कहा कि संदिग्ध संक्रमितों की मौत (Corona Deaths) को भी कोरोना संक्रमण से मौत मानते हुए आंकड़ों में जोड़ा जाए. हाईकोर्ट ने कहा कि संदिग्धों की मौत को संक्रमित न मानते हुए बिना कोविड प्रोटोकॉल के उनका अंतिम संस्कार करना बड़ी भूल होगी.

जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस अजित कुमार की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार व सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों को निर्देश दिया है कि जो कोविड संदिग्ध मौत होती है तो उसे भी कोरोना से हुई मौत माना जाये. कोई भी अस्पताल संदिग्ध मरीजों को गैर कोविड मरीज न समझे। यदि कोई सर्दी-जुकाम से भर्ती हुआ है और रिपोर्ट नहीं आयी है और मौत हो जाती है तो ऐसी मौत को कोरोना मौत ही माना जाए. बशर्ते कि उसे हार्ट या किडनी की अन्य गंभीर समस्या न हो. कोर्ट ऐसी मौत पर कोविड प्रोटोकॉल का दाह संस्कार में पालन कराने का भी आदेश दिया है.

पब्लिक ग्रीवांस कमेटी गठित करने का निर्देश

बता दें कोविड के बढ़ते संक्रमण को लेकर कायम जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हर जिले में 3 सदस्यीय पेन्डेमिक पब्लिक ग्रीवांस कमेटी गठित करने का निर्देश दिया है. जिसमें जिला जज से नामित सीजेएम या न्यायिक मजिस्ट्रेट, मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य द्वारा नामित कोई प्रोफेसर, जहां कालेज न हो वहां लेबल फोर के जिला अस्पताल के किसी अधिकारी या एडीएम रैंक अधिकारी की कमेटी बने. इसे 48 घंटे में गठित करने का निर्देश दिया है. साथ ही मुख्य सचिव को कहा है कि सभी जिलाधिकारियों को कमेटी गठन करने के संबंध में निर्देश जारी करें.
100 रुपए में मरीजों को नहीं मिल सकता पौष्टिक आहार

वहीं कोरोना मरीजों की खुराक के लिए 100 रूपये तय करने पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है. कोर्ट ने कहा है कि इतने में कोरोना मरीज को पौष्टिक आहार नहीं दिया जा सकता है. कोर्ट ने सरकार को मांगी गयी जानकारी न देने पर फटकार लगायी है और अस्पताल में आक्सीजन उत्पादन का ब्योरा मांगा है. कोर्ट ने 19 अप्रैल से 2 मई तक मौतों का आंकड़ा न देने पर खिंचाई की है और कहा कि जिले के नोडल अधिकारियों की रिपोर्ट कुछ और बताती है. अगली तिथि पर इस मुद्दे पर भी सुनवाई होगी. मामले की अगली सुनवाई 17 मई को होगी.

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