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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चीफ सेक्रेटरी को जारी किया अवमानना नोटिस, जानें क्या है वजह

याची का कहना है कि अनुदेशकों को मानदेय के रूप में 8 हजार रुपये दिये जा रहे हैं, जबकि केन्द्र सरकार ने मानदेय बढ़ा कर 17 हजार प्रतिमाह कर दिया है. फाइल फोटो).

याची का कहना है कि अनुदेशकों को मानदेय के रूप में 8 हजार रुपये दिये जा रहे हैं, जबकि केन्द्र सरकार ने मानदेय बढ़ा कर 17 हजार प्रतिमाह कर दिया है. फाइल फोटो).

यह आदेश जस्टिस एम के गुप्ता (Justice MK Gupta) की एकल पीठ ने भदोही के अनुदेशक आशुतोष शुक्ल की ओर से दाखिल अवमानना याचिका पर दिया है.

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प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने यूपी के चीफ सेक्रेटरी राजेन्द्र प्रसाद तिवारी (Chief Secretary Rajendra Prasad Tiwari) और परियोजना निदेशक सर्व शिक्षा अभियान को अवमानना नोटिस (Contempt Notice) जारी किया है. कोर्ट ने पूछा है कि क्यों न अवमानना के आरोप में दंडित किया जाये. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 23 नवंबर तक जवाब भी मांगा है. कोविड के चलते हाईकोर्ट ने चीफ सेक्रेटरी को राहत देते हुए अधिवक्ता के माध्यम से स्पष्टीकरण दाखिल करने का आदेश दिया है. यह आदेश जस्टिस एम के गुप्ता (Justice MK Gupta) की एकल पीठ ने भदोही के अनुदेशक आशुतोष शुक्ल की ओर से दाखिल अवमानना याचिका पर दिया है.

याची का कहना है कि अनुदेशकों को मानदेय के रूप में 8 हजार रुपये दिये जा रहे हैं, जबकि केन्द्र सरकार ने मानदेय बढ़ा कर 17 हजार प्रतिमाह कर दिया है. राज्य सरकार इस आदेश का पालन नहीं कर रही है. जिस पर याचिका दाखिल की गयी. कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए केन्द्र सरकार के आदेश का पालन कर निर्णय लेने का निर्देश दिया था. पालन नहीं किया गया तो अवमानना याचिका की गई जिस पर कोर्ट ने छह हफ्ते में पालन का निर्देश दिया. फिर भी अवहेलना की गयी तो दोबारा यह याचिका दाखिल की गयी है. याचिका पर याची अधिवक्ता दुर्गा तिवारी ने याची और निदेशक का पक्ष रखा. मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को हाईकोर्ट में होगी.

हाईकोर्ट ने पीसीएस मेंस में शामिल होने वाले अभ्यर्थी को राहत दी है
वहीं, इससे पहले खबर सामने आई थी कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पीसीएस मेंस में शामिल होने वाले अभ्यर्थी को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने 22 सितम्बर से होने वाली यूपी लोक सेवा आयोग की पीसीएस मुख्य परीक्षा (PSC Exam) फॉर्म की याची अभ्यर्थी की हार्ड कॉपी स्वीकार कर परीक्षा में बैठने देने का निर्देश दिया है. दरअसल, कोविड-19 के चलते देशव्यापी लॉकडाउन और कन्टेनमेन्ट जोन में फंसे होने के कारण ऑनलाइन भरे गए फॉर्म की हार्ड कापी निर्धारित अवधि के बाद अभ्यर्थी जमा करने गया तो आयोग से स्वीकार नहीं किया गया. इस पर अभ्यर्थी ने हाईकोर्ट की शरण ली. कोर्ट ने कहा है कि विशेष स्थिति के कारण फॉर्म जमा करने में देरी हुई, जिस पर उसका कोई नियंत्रण नहीं था. कोर्ट ने कहा कि आयोग दाखिल दस्तावेजों का सत्यापन कर मुख्य परीक्षा में बैठने की अनुमति दे.
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