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    हाईकोर्ट का आदेश- तहसीलदार को भूमि का प्रकृति बदलने का नहीं है अधिकार

    इलाहाबाद हाईकोर्ट (File Photo)
    इलाहाबाद हाईकोर्ट (File Photo)

    इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने तहसीलदार, मछलीशहर के 23 फरवरी 2020 को पारित आदेश को रद्द किया है. कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार को किसी भी भूमि को लेने का अधिकार नहीं है.

    • News18Hindi
    • Last Updated: November 14, 2020, 3:00 PM IST
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    प्रयागराज. जौनपुर (Jaunpur) के मछलीशहर में तहसीलदार के जमीन की प्रकृति बदलने के निर्णय को चुनौती देती एक याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने कहा है कि तहसीलदार को भूमि का प्रकृति बदलने का अधिकार नहीं है. इसके साथ ही हाईकोर्ट ने बंजर भूमि को नवीन पर्ती कर सड़क भूमि घोषित करने का आदेश रद्द कर दिया है. कोर्ट ने तहसीलदार, मछलीशहर के 23 फरवरी 2020 को पारित आदेश को रद्द किया है. कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार को किसी भी भूमि को लेने का अधिकार नहीं है. बंजर भूमि गांव सभा की होने के नाते सरकार की है. कोर्ट ने कहा कि यदि सड़क बनाना जरूरी हो तो सरकार जमीन लेकर सड़क बना सकती है.

    याची विश्वनाथ बाबुल सिंह की ओर से याचिका दाखिल की गई. इसमें कहा गया कि जौनपुर की मछली शहर तहसील के नीभापुर गांव के प्लाट 473 व 474 को तहसीलदार ने नवीन पर्ती दर्ज कर सडक बनाने का आदेश दिया है. जिसके खिलाफ यह याचिका दायर की गई है. जस्टिस अंजनी कुमार मिश्र की एकल पीठ ने ये आदेश दिया.

    आपराधिक केस होने पर पिता को नाबालिग बच्चे की कस्टडी मांगने का हक नहीं: HC



    उधर नाबालिग बच्चों की कस्टडी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने कहा है कि आपराधिक केस होने पर पिता को नाबालिग बच्चों की कस्टडी मांगने का हक नहीं है. केस से बरी होने के बाद ही पिता बच्चों की कस्टडी की मांग कर सकता है. नानी की अभिरक्षा को अवैध नहीं कहा जा सकता.
    दरअसल हाथरस के अवधेश गौतम की ओर से बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की गई थी. इसमें गौतम ने अपने दो नाबालिग बच्चों की कस्टडी की मांग की थी. कोर्ट ने कहा कि नानी की अभिरक्षा अवैध नहीं कह सकते. यदि पिता आपराधिक मुकदमे का ट्रायल फेस कर रहा है तो उनसे मिलने का हक नहीं रखता है. कोर्ट ने कहा कि केस मे बरी होने के बाद पिता बच्चों की कस्टडी की मांग कर सकता है. बरी होने के बाद बच्चे नाबालिग हैं तो वह नैसर्गिक संरक्षक के नाते कस्टडी की मांग कर सकता है.

    कोर्ट ने पत्नी की हत्या के आरोपी पति को अपने नाबालिग दो बच्चों की कस्टडी देने से इंकार कर दिया है. कोर्ट ने सुनवाई के बाद याचिका खारिज कर दी. जस्टिस जेजे मुनीर की एकल पीठ ने ये आदेश दिया है.
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