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AMU हिंसा: हाईकोर्ट का सख्त रुख- पुलिसवालों पर कार्रवाई, घायल 6 छात्रों को मुआवजे का आदेश

1996 में हुई थी छह सिख कैदियों की हत्‍या.

1996 में हुई थी छह सिख कैदियों की हत्‍या.

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने राज्य सरकार को पुलिस की हिंसा का शिकार हुए एएमयू के 6 गम्भीर रूप से घायल छात्रों को मुआवजा देने का आदेश दिया है.

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इलाहाबाद. देश में नागरिकता संशोधन कानून लागू किए जाने के विरोध में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (Aligarh Muslim University AMU) में विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस हिंसा पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है. इस मामले को लेकर दाखिल की गई याचिका की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पुलिस की हिंसा का शिकार हुए एएमयू के 6 गम्भीर रूप से घायल छात्रों को मुआवजा देने का आदेश दिया है. हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की सिफारिशों के तहत मानवीय आधार पर मुआवजा देने का आदेश दिया है.

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने मुआवजे के लिए राज्य सरकार और एएमयू के कुलपति को नोटिस भी जारी किया है. हाईकोर्ट ने यूपी के चीफ सेक्रेटरी, डीजीपी, सीआरपीएफ के महानिदेशक, एएमयू के वीसी और रजिस्ट्रार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सिफारिशों पर अमल करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च से पहले सभी पक्षकारों से अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी है.

'हिंसक भीड़ से निपटने पुलिस को विशेष प्रशिक्षण दिलवाएं'
हाईकोर्ट ने यूपी के पुलिस महानिदेशक को सीसीटीवी कैमरे के फुटेज देखकर हिंसा के दौरान कार्रवाई करने वाले सिविल पुलिस और पीएसी के जवानों को भी चिन्हित कर कार्रवाई करने का आदेश दिया है, जिन्होंने बेवजह पार्किंग में खड़े वाहनों में तोड़फोड़ की है. कोर्ट ने राज्य सरकार को ये आदेश भी दिया है कि वो इन पुलिस कर्मियों को हिंसक भीड़ से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिलवाने की भी व्यवस्था करें.

'दंगों के समय कानून व्यवस्था बनाने पेशेवर तरीके अपनाएं'
कोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की सिफारिशों के तहत ही सीआरपीएफ के महानिदेशक को भी आदेश दिया है कि दंगों के समय कानून व्यवस्था की बहाली के लिए पेशेवर तरीके अपनाए जाएं, ताकि आम नागरिकों के मानवाधिकारों का हनन न हो. अदालत ने यूपी के डीजीपी को 6 जनवरी 2020 को गठित एसआईटी को तय समय में सीएए को लेकर हुई हिंसा से जुड़े मामलों की जांच पूरी करने का भी आदेश दिया है.

सोशल मीडिया पर अफवाहों को लेकर कोर्ट गम्भीर
इसके साथ ही कोर्ट ने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलने से रोकने के लिए राज्य सरकार से कारगर कदम उठाने को भी कहा है. कोर्ट ने एएमयू के वाइस चांसलर और रजिस्ट्रार को छात्रों के साथ संवाद बनाये रखने को कहा है, ताकि यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्र-छात्रायें बाहरी लोगों के प्रभाव में आने से बचें.

AMU के पूर्व छात्रों ने लगाई थी याचिका
एएमयू के पूर्व छात्र अमन खान और मोहम्मद आमिर ने याचिका दाखिल कर एएमयू में हुई हिंसा की न्यायिक जांच की मांग की थी, जिसके बाद हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार को मामले की जांच सौंपी थी. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की जांच रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में अदालत में पेश की गई थी जिसे देखने के बाद कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए ये आदेश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च को होगी. चीफ जस्टिस गोविंद माथुर और जस्टिस समित गोपाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई के बाद ये आदेश दिया है.

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