अधिग्रहित भूमि का बैनामा लेने वाले को मुआवजा पाने का हक नहीं: हाईकोर्ट

कोर्ट ने अधिग्रहित भूमि का बैनामा कराकर मुआवजा लेने वाले से मुआवजे की वसूली नोटिस को वैध करार दिया है और चुनौती याचिका खारिज कर दी है.

Sarvesh Dubey | News18 Uttar Pradesh
Updated: April 17, 2018, 9:51 AM IST
अधिग्रहित भूमि का बैनामा लेने वाले को मुआवजा पाने का हक नहीं: हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट की फाइल फोटो.
Sarvesh Dubey | News18 Uttar Pradesh
Updated: April 17, 2018, 9:51 AM IST
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि जमीन अधिग्रहित होने के बाद भूमि मालिक का उस पर कोई हक नहीं रह जाता और भूमि अधिसूचना जारी होने के बाद सरकार में निहित हो जाती है. कोर्ट ने कहा है कि अधिग्रहण के बाद यदि कोई भूमि के मूल स्वामी से बैनामा कराता है तो उसे अधिग्रहित भूमि का मुआवजा पाने का हक नहीं है, क्योंकि वह बैनामा शून्य होगा. कोर्ट ने अधिग्रहित भूमि का बैनामा कराकर मुआवजा लेने वाले से मुआवजे की वसूली नोटिस को वैध करार दिया है और चुनौती याचिका खारिज कर दी है.

यह आदेश न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता तथा न्यायमूर्ति जयन्त बनर्जी की खण्डपीठ ने विपिन अग्रवाल की याचिका पर दिया है. याचिका पर मुहम्मद अफजल व राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिवक्ता प्रांजल मेहरोत्रा ने बहस किया. बता दें कि दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस वे के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने 14 सितम्बर 2011 में 244013.42 वर्गमीटर जमीन अधिग्रहित की. धारा 3 डी (1) का सात अगस्त 2012 को प्रकाशन भी हो गया. 29 जून 2013 को अवार्ड भी घोषित हो गया.

इसके बाद जमीन मालिक रियासत अली से याची ने जमीन का बैनामा करा लिया और मुआवजे का भुगतान ले लिया. गलत भुगतान पर एडीएम ने मुआवजा राशि की वापसी को 11 नवम्बर 2017 को नोटिस जारी की. जिसे चुनौती दी गयी थी. कोर्ट ने कहा अधिग्रहण के बाद जमीन केन्द्र सरकार की हो गयी थी, उसके बाद भूमि के मूल स्वामी को बैनामा करने का अधिकार नहीं था.
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