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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज बाल कल्याण समिति के चेयरमैन की बर्खास्तगी पर लगाई रोक

डॉ अखिलेश मिश्र को सचिव महिला एवं बाल कल्याण के आदेश से पद से बर्खास्त कर दिया गया था.

डॉ अखिलेश मिश्र को सचिव महिला एवं बाल कल्याण के आदेश से पद से बर्खास्त कर दिया गया था.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाल कल्याण समिति यानि सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष डॉ अखिलेश कुमार मिश्र के बर्खास्तगी आदेश पर रोक लगा द ...अधिक पढ़ें

प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाल कल्याण समिति यानि सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष डॉ अखिलेश कुमार मिश्र के बर्खास्तगी आदेश पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने इस संबंध में राज्य सरकार से 3 सप्ताह में जवाब तलब किया है. डॉ अखिलेश मिश्र को सचिव महिला एवं बाल कल्याण के एक नवंबर 2022 के आदेश से पद से बर्खास्त कर दिया था. इस आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर चुनौती दी गई है. याचिका पर जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस अजीत सिंह की खंडपीठ ने सुनवाई की.

याचिका पक्ष रख रही अधिवक्ता सुभाष राठी का कहना था कि सचिव का आदेश एकतरफा और नियम विरुद्ध है. आदेश पारित करने में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 27(7 )के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया. उनका यह भी कहना था कि सिर्फ जिलाधिकारी द्वारा गठित दो सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट को आधार बनाकर एक तरफा कार्रवाई की गई है. यहां तक कि याची द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण पर भी विचार नहीं किया गया. जांच समिति द्वारा की गई जांच की रिपोर्ट भी याची को अब तक नहीं दी गई है. कोर्ट ने याची के अधिवक्ता की दलीलों में प्रथम दृष्टया बल पाते हुए एक नवंबर 2022 के बर्खास्तगी आदेश पर रोक लगा दी है. साथ ही प्रदेश सरकार को 3 सप्ताह में इस मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.

गौरतलब है कि बाल कल्याण समिति ने जगवंतीदेवी बाल गृह राजरुपुर  में एक बालक के यौन शोषण की रिपोर्ट जिला अधिकारी और जिला प्रोबेशन अधिकारी को भेजी थी. इस संबंध में स्थानीय समाचार पत्रों में भी बालक के यौन शोषण की खबर प्रकाशित हुई. जिसे आधार बनाकर जिलाधिकारी ने दो सदस्य जांच कमेटी गठित की. जांच कमेटी की रिपोर्ट में बाल कल्याण समिति की शिकायतों के गलत होने का दावा किया गया साथ ही अध्यक्ष बाल कल्याण समिति को यह जानकारी मीडिया में लीक करने का दोषी ठहराया गया. इस रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए सचिव महिला एवं बाल कल्याण ने अध्यक्ष अखिलेश मिश्र से स्पष्टीकरण मांगा था. अध्यक्ष ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि समिति ने पीड़ित बालक व उसकी मां का बयान रिकॉर्ड करने के बाद अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को प्रेषित की थी, जबकि जिलाधिकारी द्वारा गठित समिति ने बिना पीड़ित बालक और उसकी मां का बयान लिए ही बाल कल्याण समिति को की रिपोर्ट को झुठला दिया. याचिका में यह भी कहा गया है कि बाल कल्याण समिति द्वारा सभी निरीक्षण  की रिपोर्ट समय बद्ध तरीके से संबंधित अधिकारियों को प्रेषित की जाती है इसलिए अध्यक्ष पर कार्य में लापरवाही बरतने का आरोप निराधार है. मामले की अगली सुनवाई 9 जनवरी 2023 को होगी.

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Tags: Allahabad high court, UP news

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