ज्ञानवापी मस्जिद विवाद मामले में वाराणसी जिला अदालत में मुकदमे की सुनवाई पर लगी रोक
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ज्ञानवापी मस्जिद विवाद मामले में वाराणसी जिला अदालत में मुकदमे की सुनवाई पर लगी रोक
इलाहाबाद हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने डे-टू-डे बेसिस पर सुनवाई करने के वाराणसी की एडीजे कोर्ट के इसी साल के 4 फरवरी के आदेश को फौरी तौर पर गलत मानते हुए उस पर रोक लगाई है.

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प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad high Court) ने वाराणसी (Varanasi) की ज्ञानवापी मस्जिद व काशी विश्वनाथ मंदिर विवाद (Gyanvapi Mosque and Vishwanath Temple Dispute) मामले में वाराणसी की जिला अदालत में चल रहे मुक़दमे की सुनवाई पर रोक लगा दी है. यह रोक 17 मार्च को हाईकोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई तक जारी रहेगी. हाईकोर्ट ने इस मामले में दूसरे पक्षकार को भी नोटिस जारी कर तीन हफ्ते में जवाब तलब किया है. हाईकोर्ट ने डे-टू-डे बेसिस पर सुनवाई करने के वाराणसी की एडीजे कोर्ट के इसी साल के 4 फरवरी के आदेश को फौरी तौर पर गलत मानते हुए उस पर रोक लगाई है. मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अजय भनोट की सिंगल बेंच ने ये आदेश दिया है।

मस्जिद की इंतजामिया कमेटी ने रोक लगाने की थी मांग

हाईकोर्ट में ज्ञानवापी मस्जिद की इंतजामिया कमेटी ने अर्जी दाखिल कर वाराणसी जिला कोर्ट में मुकदमे की सुनवाई शुरु करने पर रोक लगाये जाने की मांग की थी. गौरतलब है कि वर्ष 1991 में वाराणसी की जिला अदालत में एक अर्जी दाखिल कर यह आरोप लगाया गया था कि वाराणसी शहर के चौक इलाके की ज्ञानवापी मस्जिद अवैध तरीके से बनी है. मस्जिद की जगह पहले मंदिर स्थापित था और मुग़ल बादशाह औरंगजेब ने अपने शासनकाल में मंदिर को गिराकर मस्जिद का निर्माण कराया था. यह अर्जी एंसिएंट आइडल आफ स्वयंभू लार्ड विश्वेश्वर के मित्र के तौर पर वाराणसी के ही विजय शंकर रस्तोगी ने दाखिल की थी. यह अर्जी अयोध्या मंदिर के विवाद की तर्ज पर दाखिल की गई थी.



1991 में दाखिल हुआ था मुकदमा



ज्ञानवापी मस्जिद इंतजामिया कमेटी की तरफ से दो आधार पर इस अर्जी का विरोध किया गया. पहली दलील यह दी गई कि 1991 के धार्मिक स्थलों पर बने नए एक्ट के लागू होने के बाद इस तरह का मुकदमा नहीं चलाया जा सकता. दूसरी दलील यह दी गई कि देश की आज़ादी के वक्त के स्टेटस को बदलने के लिए कोर्ट में अर्जी दाखिल नहीं की जा सकती है. वाराणसी की जिला अदालत ने इन दोनों दलीलों को नकारते हुए मुकदमा सुनने की मंजूरी दे दी. इस मामले में मस्जिद कमेटी ने साल 1998 में हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर निचली अदालत के केस सुनने के फैसले को चुनौती दी. हाईकोर्ट ने वाराणसी अदालत के फैसले पर रोक लगा दी. तब से अभी तक इस मुक़दमे की सुनवाई पर रोक लगी हुई थी. इस बीच सुप्रीम कोर्ट का एक सामान्य आदेश आया कि किसी मामले में अगर मुक़दमे की कार्यवाई पर लगी रोक छह महीने से ज़्यादा की हो जाती है और अदालत उसे आगे नहीं बढ़ाती है तो स्टे यानी रोक ख़त्म माना जाएगा.

यह विवाद भी अयोध्या की तरह काफी पुराना

एंसिएंट आइडल आफ स्वयंभू लार्ड विश्वेश्वर की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के इसी फैसले के आधार पर वाराणसी की एडीजे कोर्ट में फिर से अर्जी दाखिल की गई और सुनवाई शुरू किये जाने की अपील की गई. एडीजे कोर्ट ने इस मामले में अर्जी को मंजूर करते हुए सुनवाई शुरू करने और डे-टू-डे बेसिस पर मामले को सुनने का आदेश इसी साल चार फरवरी को पारित किया था. निचली अदालत ने मस्जिद कमेटी के एतराज को नकार दिया था. इस फैसले के खिलाफ मस्जिद कमेटी ने फिर से हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की. मामले की सुनवाई बुधवार को जस्टिस अजय भनोट की बेंच में हुई. अदालत ने मस्जिद कमेटी के एतराज को फौरी तौर पर सही माना और निचली अदालत द्वारा सुनवाई किये जाने के फैसले पर रोक लगा दी. ज्ञानवापी मस्जिद वाराणसी के चौक इलाके में काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में ही है. इसका विवाद भी अयोध्या की तरह ही काफी पुराना है.

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First published: February 27, 2020, 8:25 AM IST
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