सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करने वाले याचियों की गिरफ्तारी पर रोक: HC
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सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करने वाले याचियों की गिरफ्तारी पर रोक: HC
सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करने वाले याचियों की गिरफ्तारी पर रोक (File)

यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति एसडी सिंह की खंडपीठ ने ताजगंज आगरा के मुन्ना व 6 अन्य की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है.

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प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने कोरोना वायरस (coronavirus) के प्रकोप को फैलने से रोकने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग (Social Distancing) का पालन न करने वालों को जेल में बंद करने के बजाय कोविड 19 की गाइडलाइन के प्रति जागरूक कर पालन की प्रेरणा जगाने की सलाह दी है. कोर्ट ने कहा है कि प्रदेश की जेलों में पहले से भारी भीड़ है. सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करने पर जेल भेजने से कोरोना महामारी फैलने को बढावा ही मिलेगा. कोर्ट ने कहा है कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह कोरोना वायरस से निपटने के लिए केंद्र सरकार की गाइडलाइन का पालन करे.

कोर्ट ने कहा है कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करने पर दर्ज एफआईआर से अपराध बनता है. किन्तु याचियों को एक मौका दिया जाय कि वे एसएसपी आगरा के समक्ष कोविड 19 की गाइडलाइन का पालन करने का आश्वासन दाखिल करे और भविष्य में उल्लंघन नहीं करेंगे तो एसएसपी विचार कर निर्णय ले.

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कोर्ट ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करने पर दर्ज एफआईआर की विवेचना में सहयोग करने की शर्त पर पुलिस रिपोर्ट दाखिल होने तक याचियों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है. यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति एसडी सिंह की खंडपीठ ने ताजगंज आगरा के मुन्ना व 6 अन्य की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है. याचिका पर अधिवक्ता दिनेश कुमार मिश्र ने बहस की। याची का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान लोगों को मोहल्लों- गली में खाने का पैकेट बाट रहे थे.
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खाने का पैकेट लेने वालों की भीड़ आ गयी. शीघ्र ही वितरित कर उन्हे भेज दिया गया. इसी बीच पुलिस ने बिना तथ्य का पता लगाये याचियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी है. लोगों के इकट्ठा होने पर कोई अप्रिय घटना के होने का आरोप नहीं है. कोर्ट ने कहा है कि इसमे संदेह नहीं कि सामूहिक रूप से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर कोविड 19 के प्रकोप से बचा जा सकता है. हर नागरिक को सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार कार्य करना चाहिए. लोगो मे बचाव के उपायों की जानकारी व पालन करने के प्रति जागरूकता पैदा करना जरूरी है.
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