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PM केयर्स फंड की वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाएं ली गईं वापस

PM केयर्स फंड की वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाएं ली गईं वापस

सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट

याचिका में पीएम केयर्स फंड, पीएम नेशनल रिलीफ फंड और राज्यों में सीएम रिलीफ फंड को इस आधार पर चुनौती दी गई थी, कि ये किसी कानून के तहत नहीं बनाये गए हैं.

प्रयागराज. पीएम केयर्स फंड (PM Cares Fund) की वैधता को चुनौती देने वाली सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में दाखिल जनहित याचिका (PIL) अदालत के सख्त रुख के बाद याचिकाकर्ताओं ने वापस ले ली है. सुप्रीम ने वीडियो कांफ्रेन्सिंग से मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि याची याचिका वापस ले लें, नहीं तो कोर्ट हर्जाने के साथ याचिका खारिज करने को बाध्य होगी. जिसके बाद इलाहाबाद के याचिकाकर्ता अधिवक्ता शाश्वत आनन्द और तीन अन्य ने अपनी याचिका वापस ले ली हैं. याचिकाकर्ताओं ने जनहित याचिका में मुख्य रुप से तीन  मांगे रखी थी. याचिका में पीएम केयर्स फंड, पीएम नेशनल रिलीफ फंड और राज्यों में सीएम रिलीफ फंड को इस आधार पर चुनौती दी गई थी, कि ये किसी कानून के तहत नहीं बनाये गए हैं.

याचिका में दी गई थी ये दलील

याचिका में कहा गया था कि देश में द डिज़ास्टर मैनेजमेंट एक्ट 2005 के सेक्शन 46 के तहत एनडीआरएफ फंड पहले से ही मौजूद है. इसलिए किसी दूसरे फंड की कोई आवश्यकता ही नहीं है. ये भी आरोप लगाया गया था कि पीएम केयर्स फंड, पीएम नेशनल रिलीफ फंड और राज्यों में सीएम रिलीफ फंड का कोई ऑडिट नहीं होता है और न ही आरटीआई का कानून इस पर लागू होता है. इसलिए इसमें गड़बड़ी और दुरुपयोग की पूरी संभावना रहती है. जबकि एनडीआरएफ फंड का ऑडिट भी होता है और सरकार हर वर्ष इसकी एनुअल रिपोर्ट भी संसद के पटल पर रखती है. इसलिए सभी फंड को एक जगह एनडीआरएफ फंड में शामिल करने की मांग याचिका में की गई थी.

कोरोना टेस्ट बढ़ाये जाने की भी थी मांग

साथ ही जनहित याचिका में द डिज़स्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत ही इसे कलेक्शन ऐजेंसी घोषित करने की मांग की गई थी. ताकि लोगों द्वारा दी जा रही सहायता का ऑडिट कराया जा सके और लोगों को भी इसकी सही जानकारी हो सके. वहीं पूरे देश में बड़े स्तर पर कोविड 19 टेस्ट कराये जाने की भी याचिका में मांग की गई थी. आईसीएमआर की रिपोर्ट के आधार पर आरोप लगाया गया था कि कोरोना के लक्षण के आधार पर ही टेस्ट कराये जा रहे हैं. जबकि बहुत से ऐसे लोग भी कोरोना पॉजिटिव हैं जिनमें कोई लक्षण ही नहीं दिखायी देते हैं. लेकिन कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों को सुनने के बाद उनसे याचिका वापस लेने या हर्जाने का साथ खारिज करने को कहा. जिसके बाद याचिकाकर्ताओं ने याचिका वापस ले ली. इलाहाबाद के अधिवक्ता शाश्वत आनन्द, फैज अहमद, अंकुर आजाद और लॉ स्टूडेंट सागर की ओर से आठ अप्रैल को ऑनलाइन दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों जस्टिस एनवी रमन्ना, जस्टिस बीआर गावी, जस्टिस एसके कौल की पीठ ने सुनवाई की.

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Tags: Allahabad high court

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