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मॉब लिंचिंग का खौफ: लंबी छुट्टी के बाद वापस लौटे इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विक्रम हरिजन
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विक्रम हरिजन

गौरतलब है कि डॉ विक्रम हरिजन का विवादित वीडियो 20 अगस्त 2019 को वायरल हो गया था. जिसके बाद मामले के तूल पकड़ने पर डॉ विक्रम हरिजन को मॉब लिंचिंग की धमकी मिली थी.

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प्रयागराज. इलाहाबाद विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विक्रम हरिजन को मॉब लिंचिंग का डर था. डॉ. विक्रम हरिजन पचास दिनों के बाद शुक्रवार को वापस अपना कामकाज फिर से शुरु कर दिया है. हालांकि डॉ विक्रम हरिजन को अभी भी मॉब लिंचिंग का डर सता रहा है और एसएसपी प्रयागराज ने उनके अनुरोध पर उन्हें दो सुरक्षा गार्ड भी मुहैया करा दिया है. जिसके साथ ही डॉ विक्रम हरिजन इतिहास विभाग में अपना कामकाज निबटा रहे हैं. डॉ विक्रम हरिजन ने अभी भी अपनी जान को खतरा बताया है. और विश्वविद्यालय प्रशासन पर उन्हें सुरक्षित माहौल न देने का गंभीर आरोप भी लगाया है.

उन्होंने विवादित वीडियो को लेकर अपनी सफाई देते हुए कहा है कि विवादित वीडियो 14 अप्रैल 2017 का प्रयागराज का ही है. जिसमें अम्बेडकर जयंती के मौके पर दलित छात्रों के मन से ईश्वर का डर निकालने के लिए उन्होंने अपने बचपन की एक घटना की जिक्र किया था. डॉ हरिजन के मुताबिक वे बचपन से ही ब्रह्म समाज से काफी प्रभावित थे और ईश्वर में विश्वास नहीं करते हैं. यही वजह है कि वे छात्रावास के बच्चों को कर्म करने की सीख दे रहे थे.

बचपन की घटना का जिक्र करते हुए उन्हें बताया था कि कक्षा-6 में पढ़ने के दौरान उन्होंने शिवलिंग पर मूत्र विसर्जित किया था. लेकिन उसके बाद भी उनका कुछ नहीं बिगड़ा और उन्होंने न केवल जेएनयू से उच्च शिक्षा हासिल की. बल्कि कई विश्वविद्यालयों में भी उन्हें नौकरी मिली. गौरतलब है कि डॉ विक्रम हरिजन का विवादित वीडियो 20 अगस्त 2019 को वायरल हो गया था. जिसके बाद मामले के तूल पकड़ने पर डॉ विक्रम हरिजन को मॉब लिंचिंग की धमकी मिली थी.



जिसके चलते ही 27 अगस्त को उन्हें शहर छोड़कर बाहर जाना पड़ा था. पचास दिनों की लंबी छुट्टी के बाद डॉ विक्रम हरिजन वापस तो लौट आये हैं. लेकिन अभी भी वे हालात को लेकर सहमे और डरे हुए हैं.  वहीं अपने विवादित वीडियो के लिए भी लोगों से माफी मांगी है. डॉ विक्रम हरिजन ने देश में जातिवादी व्यवस्था को खत्म करने के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, एचआरडी मिनिस्टर डॉ रमेश पोखरियाल निशंक को पत्र लिखकर एक आयोग के गठन की मांग की है. ताकि जाति व्यवस्था को खत्म कर भेदभाव को खत्म किया जा सके.
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