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आनंद गिरि जीते है आलीशान जिंदगी,जानिए उनकी निजी जिंदगी से जुड़ी कुछ बातें

आंनद

आंनद गिरी की आलीशान जिंदगी

वैसे तो एक संत सादी जिंदगी जीता है लेकिन आनंद गिरि हमेशा आलीशान जिंदगी का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं.

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    अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत के बाद मिले 12 पेज के सुसाइड नोट में आनंद गिरि का नाम आया. जिसके बाद से ही वह पुलिस हिरासत में हैं. उन्हें हरिद्वार से लाकर प्रयागराज के नैनी सेंट्रल जेल में रखा गया है.
    वैसे तो एक सन्यासी संसार की मोह-माया से दूर सादगी की जिंदगी जीता है लेकिन आनंद गिरि कभी भी इस पैमाने पर फिट नहीं बैठते. वह महंगी गाड़ियों, फोन आदि का शौक रखते हैं. इस समय भी सोशल मीडिया पर पहले की कई ऐसी तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिसमें आनंद गिरि महंगी कार और बाइक में घूमते नजर आ रहे हैं. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक उनके पास प्राइवेट ‌याच, लग्जरियस कारें हैं. वह ब्रांडेड कपड़े हैं और आभूषण पहनते हैं. बिजनेस क्लास में हवाई यात्रा, विदेशों में घूमना, अक्सर ऐसा करते हुए दिखाई पड़ते हैं. एक सन्यासी का भौतिकवादी समाज में इस कदर डूबे होना, सवाल खड़े करता है कि क्या एक सन्यासी ऐसा होता है? अमीरों की तरह आलीशान जिंदगी जीना एक संत की जीवन शैली नहीं हो सकती .

    कई बार रह चुके हैं विवादों में
    निरंजनी अखाड़े के संत आनंद गिरि का विवादों से गहरा नाता रहा है. वह अक्सर अपनी जीवनशैली और हरकतों के चलते विवादों में रहते हैं.2016 , 2018 में उन पर छेड़खानी के आरोप लगे. मई 2019 में तो छेड़खानी के आरोप में वह हफ्तों तक ऑस्ट्रेलिया के जेल में बंद थे. जून 2019 में वह वहां से छूटे थे. आनंद गिरि की हवाई जहाज में एक आपत्तिजनक फोटो भी वायरल हुई थी, जिसमें आनंद गिरि बिजनेस क्लास में यात्रा कर रहे थे और साथ ही पास में गिलास में पेय पदार्थ रखा था जिसे शराब बताया गया था.
    अभी हाल ही में नरेंद्र गिरी और उनके शिष्य आनंद गिरि की आपसी कड़वाहट भी सुर्खियों में रही थी, जिसमें गुरु शिष्य ने एक दूसरे पर बड़े-बड़े आरोप-प्रत्यारोप किए थे.

    ऐसा रहा शुरूआती जीवन
    अगर बात करें आनंद गिरि के निजी जीवन की तो, उनका असली नाम अशोक कुमार चोटिया है. वह राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के ब्राह्मणों की सरेरी गांव के रहने वाले हैं. उनके परिवार में तीन भाई भंवरलाल, कैलाश, रामस्वरूप है. उनकी एक बहन भी हैं जिनका नाम पुष्पा है. आनंद गिरी 10 वर्ष की उम्र में एक संत के साथ हरिद्वार चले गए थे वहीं पर उनकी मुलाकात नरेंद्र गिरी से हुई थी. इसके बाद वह नरेंद्र गिरी के शरण में ही आ गए थे. कानपुर से उन्होंने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद प्रयागराज से स्नातक और बनारस से परास्नातक की डिग्री हासिल की और बड़े हनुमान मंदिर की जिम्मेदारी संभालने लगे.

    अब कौन होगा उत्तराधिकारी
    मठ-मंदिरों की व्यवस्था गुरु-शिष्य परंपरा पर आधारित होती है. गुरु की मृत्यु के बाद शिष्य ही उत्तराधिकारी बनता है या जीते जी गुरु भी अपने किसी प्रिय शिष्य को मठ मंदिर का उत्तराधिकारी घोषित करते हैं. महंत नरेंद्र गिरि के भी कई शिष्य उनके करीबी माने जाते हैं, आनंद गिरि भी उनमें से एक थे. हालांकि गुरु शिष्य में बड़ा विवाद पिछले दिनों हुआ और अब वह गुरु की मौत के आरोप को लेकर जेल में है. जिसके चलते उनकी दावेदारी लगभग खत्म हो चुकी है.
    महंत नरेंद्र गिरि ने सुसाइड नोट में बालवीर गिरी का नाम उत्तराधिकारी के रूप में लिया है लेकिन सुसाइड नोट की सत्यता को लेकर भी मठ के लोगों के बीच संशय बना हुआ है. ऐसे में फिलहाल उत्तराधिकारी के रूप में किसी का नाम आगे नहीं है.

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