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UP: ओवैसी की पार्टी भी करेगी सम्मेलन की शुरुआत, सपा-बसपा से गठबंधन पर ये है पार्टी का रुख

शौकत अली के मुताबिक़ असदउद्दीन ओवैसी के सम्मेलनों की शुरुआत दस अगस्त के आसपास कानपुर या प्रयागराज से की जाएगी.

शौकत अली के मुताबिक़ असदउद्दीन ओवैसी के सम्मेलनों की शुरुआत दस अगस्त के आसपास कानपुर या प्रयागराज से की जाएगी.

UP News: प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली के मुताबिक़ उनकी पार्टी और भागीदारी मोर्चा सपा या बीएसपी के साथ गठबंधन के दरवाजे अब भी खोले हुए हैं. अगर इन दोनों में से कोई भी पार्टी हकीकत में बीजेपी को हराना चाहती है तो उसे भागीदारी मोर्चे के साथ तालमेल करके ही विधानसभा चुनाव लड़ना चाहिए.

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इलाहाबाद. यूपी में इन दिनों जातियों के नाम पर सम्मेलन की सियासत ज़ोरों पर चल रही है. बीएसपी के साथ ही बीजेपी और समाजवादी पार्टी सम्मेलनों के ज़रिये ब्राह्मणों को रिझाने की मुहिम छेड़े हुए हैं. इन बड़ी पार्टियों की उठापटक के बीच असदउद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम भी अगले महीने से मंडलों में सम्मेलन की शुरुआत करने जा रही है. मंडल स्तर पर होने वाले इन सम्मेलनों में खुद पार्टी मुखिया ओवैसी भी शामिल होंगे. हालांकि एमआईएम के सम्मेलन किसी जाति विशेष को फोकस करने के बजाय सभी के लिए होंगे.

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हाजी शौकत अली के मुताबिक़ उनकी पार्टी किसी एक जाति या मज़हब का ठप्पा अपने ऊपर नहीं लगाना चाहती. पार्टी जातियों के बजाय समाज के सभी वर्गों के अधिकारों का मुद्दा उठाना चाहती है, इसलिए अगले महीने शुरू हो रहे असदउद्दीन ओवैसी के सम्मेलनों में सभी वर्गों को बुलाया जाएगा और उन्हें पार्टी की नीतियों के बारे में बताते हुए पार्टी से जोड़ने की कोशिश की जाएगी. शौकत अली के मुताबिक़ असदउद्दीन ओवैसी के सम्मेलनों की शुरुआत दस अगस्त के आस पास कानपुर या प्रयागराज से की जाएगी. उन्होंने साफ़ किया कि पार्टी इन दिनों कई जिलों में कार्यकर्ता सम्मेलन कर रही है, लेकिन मंडल स्तर पर होने वाले ओवैसी के सम्मेलनों में समाज के अलग अलग तबके के प्रबुद्ध लोगों को बुलाकर उनसे बातचीत की जाएगी. उन्होंने जानकारी दी कि कोरोना के हालात सामान्य होने के बाद ओवैसी जिलों में जाकर जनसभाएं भी करेंगे.

प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली के मुताबिक़ उनकी पार्टी और भागीदारी मोर्चा सपा या बीएसपी के साथ गठबंधन के दरवाजे अब भी खोले हुए हैं. अगर इन दोनों में से कोई भी पार्टी हकीकत में बीजेपी को हराना चाहती है तो उसे भागीदारी मोर्चे के साथ तालमेल करके ही विधानसभा चुनाव लड़ना चाहिए. उन्होंने कांग्रेस को डूबता हुआ जहाज़ बताकर उससे गठबंधन की संभावनाओं को खारिज करने की कोशिश की. यह आरोप ज़रूर लगाया कि ब्राह्मण सम्मेलन के ज़रिये इस तबके को रिझाने की कोशिश करने वाली पार्टियों को कतई इस वर्ग से कोई हमदर्दी नहीं है, यह सिर्फ ब्राह्मणों का वोट हासिल करने की सियासत है.

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Mahant Narendra Giri Suicide Case: सीबीआई ने तीनों आरोपियों की मांगी कस्टडी रिमांड, आज होगी CJM कोर्ट में सुनवाई

Prayagraj: सीबीआई जांच महंत नरेंद्र गिरी केस (File photo)

Prayagraj News: जिसके बाद 22 सितंबर को पोस्टमार्टम के बाद महंत नरेंद्र गिरि के पार्थिव शरीर को समाधि दी गई थी. साधु संतों की मांग पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने सीबीआई जांच की संस्तुति की थी.

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प्रयागराज. देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के दिवंगत अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी (Mahant Narendra Giri) की संदिग्ध मौत की गुत्थी सुलझाने में लगी है. अखाड़ा परिषद के दिवंगत अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की खुदकुशी के मामले में सीबीआई ने गिरफ्तार तीनों आरोपियों का कस्टडी रिमांड मांगी है. सीबीआई के मुख्य जांच अधिकारी केएस नेगी की ओर से दाखिल की गई अर्जी में मजिस्ट्रेट से 10 दिनों की कस्टडी रिमांड मांगी गई है. सीबीआई ने मुख्य आरोपी स्वामी आनंद गिरि, हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी रहे आद्या तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी की कस्टडी रिमांड मांगी है.

गौरतलब है कि महंत नरेंद्र गिरि की मौत के बाद तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था. कोर्ट ने तीनों आरोपियों को 14 दिनों की ज्यूडिशियल कस्टडी में नैनी सेंट्रल जेल भेज दिया था. सीबीआई की ओर दाखिल की गई रिमांड अर्जी पर प्रयागराज की सीजेएम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हो सकती है. ऐसा माना जा रहा है कि आनंद गिरि के वकील सीबीआई की अर्जी का विरोध करेंगे. बता दें कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि 20 सितंबर को श्री मठ बाघम्बरी गद्दी में ग्राउंड फ्लोर पर स्थित कमरे में फांसी के फंदे पर लटके पाए गए थे.

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जिसके बाद 22 सितंबर को पोस्टमार्टम के बाद महंत नरेंद्र गिरि के पार्थिव शरीर को समाधि दी गई थी. साधु संतों की मांग पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने सीबीआई जांच की संस्तुति की थी. जिसके बाद 25 सितंबर को सीबीआई ने प्रयागराज आकर अपनी जांच शुरू कर दी है. इससे पहले रविवार को सीबीआई टीम के साथ आए सीएफएसएल के फारेंसिक एक्सपर्ट ने पूरे मठ की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी कराई. इसके साथ ही जिस कमरे में महंत नरेंद्र गिरी फांसी के फंदे पर लटके पाए गए थे, उस कमरे में सेवादारों के सामने क्राइम सीन रीक्रिएट किया गया.

UP Government Jobs 2021: यूपी में फार्मासिस्ट सहित विभिन्न पदों पर नौकरियां, आवेदन की अंतिम तिथि नजदीक

UP Government Jobs 2021:यूपी चिकित्सा आपूर्ति निगम लिमिटेड की ओर से निकाली गई विभिन्न पदों पर भर्तियों के लिए अभ्यर्थी 30 सितंबर तक आवेदन कर सकते हैं.

UP Government Jobs 2021: यूपी चिकित्सा आपूर्ति निगम लिमिटेड ने फार्मासिस्ट सहित विभिन्न पदों के लिए भर्तियां निकाली हैं. इन पदों के लिए अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट के जरिए 30 सितंबर तक आवेदन कर सकते हैं.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 27, 2021, 06:20 IST
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नई दिल्ली (UP Government Jobs 2021). यूपी चिकित्सा आपूर्ति निगम लिमिटेड (Uttar Pradesh Medical Supplies Corporation Limited) ने फार्मासिस्ट सहित विभिन्न पदों पर भर्तियां (UPMSCL Recruitment 2021) निकाली हैं. इन पदों के लिए 6 सितंबर 2021 से आवेदन की प्रक्रिया जारी है. आवेदन की अंतिम तिथि में 4दिनों का समय और बचा है. ऐसे में जिन अभ्यर्थियों ने अभी तक इन पदों के लिए आवेदन नहीं किया है. वह आधिकारिक वेबसाइट upmsc.in के जरिए 30 सितंबर 2021 तक आवेदन कर सकते हैं.

कुल 18 रिक्त पदों पर भर्तियां की जानी हैं.अभ्यर्थी इस भर्ती से संबंधित अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर जारी नोटिफिकेशन को देख सकते हैं. चयनित अभ्यर्थी की नियुक्ति प्रदेश के विभिन्न जिलों में रिक्त पदों पर की जाएगी.

UP Government Jobs 2021: रिक्त पदों की संख्या
असिस्टेंट मैनेजर (वेयरहाउस) सप्लाई चेन – 3 पद
बायोमेडिकल इंजीनियर (क्वालिटी कंट्रोल) – 1 पद
पर्सनल असिस्टेंट (मैनेजिंग डायरेक्टर और एडिशनल मैनेजिंग डायरेक्टर) – 2 पद
फार्मासिस्ट (ड्रग प्रोक्योरमेंट) – 2 पद
ऑफिस असिस्टेंट – 3 पद
कंपनी सचिव – 1
जनरल मैनेजर –  1
मैनेजर – 1
मैनेजर (एचआर) – 1
मैनेजर (लीगल) – 1

UP Government Jobs 2021: शैक्षणिक योग्यता
कंपनी सचिव पद के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थी के पास सीएस की डिग्री होनी चाहिए. जनरल मैनेजर पद के लिए अभ्यर्थी के पास बीटेक की डिग्री होनी चाहिए. पर्सनल असिस्टेंट और ऑफिस असिस्टेंट पद के लिए अभ्यर्थी का कंप्यूटर स्ट्रीम में ग्रेजुएशन होना अनिवार्य हैं.

UP Government Jobs 2021: आयु सीमा
इन पदों के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थी की उम्र 40 वर्ष से 45 वर्ष के बीच होनी चाहिए. अभ्यर्थियों के आयु गणना 31 जुलाई 2021 से की जाएगी.

UP Government Jobs 2021: चयन प्रक्रिया
इन पदों पर अभ्यर्थियों का चयन इंटरव्यू के जरिए किया जाएगा. अंतिम चयन इंटरव्यू के आधार पर तैयार की गई मेरिट लिस्ट के जरिए किया जाएगा.

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UP Government Jobs 2021: इन तिथियों का रखें ध्यान
आवेदन शुरू होने की तिथि – 6 सितंबर 2021
आवेदन की अंतिम तिथि- 30 सितंबर 2021

यहां देखें नोटिफिकेशन

Scene Recreate: मठ में नरेंद्र गिरी के वजन की डमी को पंखे से लटकाकर सीबीआई ने देखा

रविवार को बाघंबरी मठ में 7 घंटे से भी ज्यादा समय तक जांच की सीबीआई की टीम.

Suicide or Murder : रविवार को 7 घंटे तक मठ में जांच करती रही सीबीआई टीम. टीम सोमवार को भी बाघम्बरी गद्दी में आकर जांच करेगी. रविवार को सेवादारों से कई सवाल टीम ने पूछे. महंत नरेंद्र गिरी के कमरे से फोरंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए.

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प्रयागराज. देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के दिवंगत अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी की संदिग्ध मौत की गुत्थी सुलझाने में लगी है. रविवार को लगातार दूसरे दिन सीबीआई की टीम बाघम्बरी गद्दी पहुंची. तकरीबन 11 बजे बाघम्बरी गद्दी पहुंची सीबीआई की टीम 7 घंटे से ज्यादा समय तक मठ में मौजूद रही. मठ के पीछे के गेट से जहां एक टीम ने प्रवेश किया था, तो वहीं दूसरी टीम फ्रंट गेट से दाखिल हुई थी.

सीबीआई टीम के साथ आए सीएफएसएल के फारेंसिक एक्सपर्ट ने पूरे मठ की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी कराई. इसके साथ ही जिस कमरे में महंत नरेंद्र गिरी फांसी के फंदे पर लटके पाए गए थे, उस कमरे में सेवादारों के सामने क्राइम सीन रीक्रिएट किया गया. फारेंसिक एक्सपर्ट की टीम ने जिस कमरे में महंत नरेंद्र गिरी की मौत हुई थी उस कमरे में भी साक्ष्य जुटाए हैं. इसके साथ ही महंत नरेंद्र गिरी जिस कमरे में रहते थे, उस बेडरूम की भी सील तोड़कर सीबीआई टीम ने कई घंटे तक गहन छानबीन और पड़ताल की और सबूत जुटाए. सीएफएसएल टीम ने घटनास्थल वाले कमरे से फिंगरप्रिंट व अन्य सबूत जुटाए और उन्हें सुरक्षित किया.

बलवीर गिरी, अमर गिरी और रवींद्र पुरी से पूछताछ

सीबीआई टीम के संयुक्त निदेशक वीके चौधरी और मुख्य जांच अधिकारी केएस नेगी के नेतृत्व में सीएफएसएल टीम लगभग 7 घंटे तक मठ में रही. सीबीआई टीम के साथ एसआईटी प्रभारी अजीत सिंह चौहान भी मौजूद थे. उन्होंने सीबीआई को जांच में जानकारी देकर उनका सहयोग दिया. सीबीआई टीम ने महंत नरेंद्र गिरी की वसीयत के मुताबिक घोषित उत्तराधिकारी बलवीर गिरी से भी पूछताछ की. इसके साथ ही एफआईआर दर्ज कराने वाले अमर गिरी और निरंजनी अखाड़े के सचिव रवींद्र पुरी से भी पूछताछ की है.

पुतले के साथ क्राइम सीन रीक्रिएट करवाया

सीबीआई टीम ने दरवाजा खोलने वाले शिष्य सर्वेश, सुमित और धनंजय सहित अन्य सेवादारों से घटना का सीन रीक्रिएट कराया. कैसे दरवाजा खोला, अंदर पहले क्या देखा, कैंची कहां से लाए और फिर कैसे शव नीचे उतारा गया. पंखा कैसे चला – इस सवाल का कोई शिष्य संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया. सीबीआई टीम के साथ सीएफएसएल की टीम भी मौजूद रही. सीबीआई टीम ने महंत नरेंद्र गिरी के वजन का पुतला तैयार कराया था. इसके साथ उनके पुतले को पंखे से लटकाया और फिर इसे उसी तरीके से उतरवाकर देखा गया.

सेवादार से सीबीआई ने पूछे ये सवाल

सीबीआई ने सेवादार सुमित तिवारी से कई सवाल पूछे.‌ सीबीआई ने पूछा कि महंत नरेंद्र गिरी को फांसी के फंदे पर देखने के बाद क्या प्रतिक्रिया थी. सबसे पहले किसको सूचना दी. सबसे पहले कौन बाहरी व्यक्ति मौके पर पहुंचा? इसके साथ ही सीबीआई ने पूछा कि डॉक्टर को बुलाये कैसे महंत नरेंद्र गिरी को मृत बता दिया गया. मौत से पहले दो-तीन दिन में कौन व्यक्ति मिलने आया था. शाम करीब 6 बजे सीबीआई टीम संगम स्थित बड़े हनुमान मंदिर भी पहुंची और दर्शन कर लौट गई.

सोमवार सुबह भी मठ आएगी सीबीआई

सीबीआई की जांच टीम सोमवार को भी बाघम्बरी गद्दी में आकर जांच करेगी. सुबह सीबीआई की जांच टीम 8 बजे ही श्री मठ बाघम्बरी गद्दी पहुंचकर अपनी जांच आगे बढ़ाएगी. इसके साथ ही नैनी सेंट्रल जेल और बड़े हनुमान मंदिर भी जा सकती है. सूत्रों से ऐसी जानकारी मिल रही है कि सीबीआई जल्द ही प्रयागराज में एक कैंप कार्यालय भी खोल सकती है. ताकि महंत नरेंद्र गिरी की मौत हत्या है या फिर आत्महत्या इसकी गुत्थी जल्द सुलझाई जा सके.

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष का होगा चुनाव, 13 अखाड़ों में हलचल, 5 अक्टूबर के बाद बैठक

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद पर चुनाव को लेकर साधु संतों में हलचल शुरू हो गई.

Akhara Parishad: साधु-संतों की सर्वोच्च संस्था अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी की मौत के बाद अध्यक्ष के चुनावों को लेकर सभी तेरह अखाड़ों के साधु-संतों में हलचल है. ऐसे में बैरागी संप्रदाय के संत अपने संप्रदाय को प्रतिनिधित्व दिए जाने की मांग भी उठा सकते हैं.

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पुलकित शुक्ला

हरिद्वार. साधु-संतों की सर्वोच्च संस्था अखाड़ा परिषद (Akhara Parishad) के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी (Mahant Narendra Giri) की मौत के बाद परिषद के अध्यक्ष के चुनावों को लेकर सभी 13 अखाड़ों के साधु-संतों के बीच हलचल शुरू हो गई है. ऐसे में कुछ बैरागी संप्रदाय के संत अपने संप्रदाय को प्रतिनिधित्व दिए जाने की मांग भी उठा सकते हैं. यहां परिषद की बैठक में बैरागी साधु संन्यासी अध्यक्ष पद पर अपने प्रतिनिधि को काबिज़ करने की मांग कर सकते हैं.

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद साधु संतों की सर्वोच्च संस्था है. अखाड़ा परिषद का मुख्य उद्देश्य कुंभ मेलों के दौरान सरकार और साधु-संतों के बीच समन्वय बनाना है. कुंभ मेलों के लिए सरकार संतों को कई सुविधाएं देती हैं. इन सुविधाओं का लाभ दूसरे संतों तक पहुंचाना और संतों की समस्याओं से सरकार को रूबरू कराने का काम अखाड़ा परिषद करती है. इसलिए अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष साधु संतों के बीच में एक महत्वपूर्ण पद होता है.

परिषद के उपाध्यक्ष का कहना है कि 5 अक्टूबर के बाद अखाड़ा परिषद की बैठक बुलाई जाएगी. अखाड़ा परिषद के उपाध्यक्ष देवेंद्र शास्त्री का कहना है कि दिवंगत नरेंद्र गिरी के षोडषी संस्कार के बाद अखाड़ा परिषद की बैठक बुलाई जाएगी. हालांकि फिलहाल कोई कुंभ मेला नहीं है इसलिए बैठक बुलाए जाने की कोई जल्दी नहीं है.

एक पद संन्यासियों और दूसरा बैरागियों को मिलता है

साधु संतों के 13 प्रमुख अखाड़े हैं. ये अखाड़े चार संप्रदाय में बंटे हैं. 13 अखाड़ों में 7 संन्यासी और 3 बैरागी संप्रदाय के अखाड़े हैं. हरिद्वार कुंभ मेले के दौरान नरेंद्र गिरी को परिषद का अध्यक्ष और महंत हरी गिरी को दोबारा महामंत्री बनाया गया था, जिसको लेकर बैरागी संप्रदाय के संतों में नाराजगी थी और वे परिषद को भंग करने की मांग कर रहे थे. बैरागी संप्रदाय के संत बाबा हठयोगी का कहना है कि नियम के अनुसार अध्यक्ष और महामंत्री में एक पद संन्यासी अखाड़ा और दूसरा पद बैरागी अखाड़ों को मिलना चाहिए. अगर ऐसा नहीं होता है तो अखाड़ा परिषद को भंग कर देना चाहिए.

Mahant Death Case: महंत नरेंद्र गिरि की समाधि के कुछ घंटे बाद 'बाघंबरी मठ' में हुई चमत्कारी घटना, जानें मामला

Prayagraj: तेज गड़गड़ाहट के साथ गिरी आकाशीय बिजली

Mahant Narendra Giri Death Case: प्रयागराज के बाघम्बरी मठ में 20 सितंबर को हुई थी महंत नरेंद्र गिरि की मौत. दो दिन बाद उन्हें समाधि दिए जाने के कुछ ही देर बाद अचानक तेज गड़गड़ाहट के साथ वज्रपात की घटना ने सबको चौंका दिया.

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प्रयागराज. अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत (Mahant Narendra Giri Death Case) जांच सीबीआई ने तेज कर दी है. उधर, महंत नरेंद्र गिरि की मौत के बाद श्री मठ बाघंबरी गद्दी में हुई एक घटना की चर्चा हो रही है. महंत नरेंद्र गिरि को समाधि दिए जाने के बाद मठ में एक चमत्कारिक घटना हुई है. जिसको लेकर लोग तरह तरह की चर्चाएं कर रहे हैं. महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत 20 सितंबर को हुई थी. उनका शव कमरे में फांसी के फंदे पर लटका मिला था. जिसके दो दिन के बाद 22 सितंबर को महंत नरेंद्र गिरि को समाधि दी गई थी. इसी दिन समाधि देने के 12 घंटे बाद मौसम खराब हुआ और तेज गड़गड़ाहट के साथ आकाशीय बिजली गिरी.

यह आकाशीय बिजली मठ के ऊपर लगे धर्म ध्वजा पर गिरी. जिससे मठ के शिखर पर लगे चार धर्म ध्वजा पताकाओं में से एक ध्वज पताका गिर गई. जबकि एक पताका बुरी तरह से झुलस कर फट गई है. जिसे अभी भी साफ तौर पर मठ के शिखर पर देखा जा सकता है. वहीं दो पताकाएं अभी भी पूरी तरह से सुरक्षित हैं. हालांकि पताकाओं के बीच स्थित प्लास्टिक की पानी की टंकी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है.

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मठ में रहने वाले सेवादार इसे ही चमत्कारिक घटना मान रहे हैं. लोगों के मुताबिक महंत नरेंद्र गिरि एक पुण्य आत्मा थे. दीन दुखियों की हमेशा मदद करते थे. इसलिए श्री मठ बाघंबरी गद्दी पर आकाशीय बिजली गिरने के बाद कोई नुकसान नहीं हुआ. बाघंबरी गद्दी में हुई इस घटना को लेकर मठ में रहने वाले लोगों से लेकर बाहर तक के लोगों में इसकी चर्चा तेज हो गई है. इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने संत समाज के आग्रह पर सीबीआई जांच की सिफारिश की थी. महंत नरेंद्र गिरि की मौत की घटना से संत समाज स्तब्ध है.

Mahant Death Case: CBI टीम दूसरे दिन पहुंची बाघम्बरी मठ, क्राइम सीन का रिक्रिएशन, सेवादारों से पूछताछ

Pratapgarh: प्रयागराज में सीबीआई की टीम पहुंची बाघम्बरी मठ.

UP News: प्रयागराज में सीबीआई ने दूसरे दिन की जांच शुरू कर दी है. बाघम्बरी मठ पहुंचते ही सीबीआई की टीम अलग-अलग एंगल से तस्वीरें खींच रही है. फारेंसिक एक्सपर्ट भी एवीडेंस कलेक्ट कर रहे हैं. सीबीआई के ज्वाइंट डायरेक्टर विप्लव चौधरी के नेतृत्व में ये जांच हो रही है.

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प्रयागराज. अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत (Mahant Narendra Gitri Death Case) मामले की जांच कर रही सीबीआई (CBI) की टीम आज दूसरे दिन श्री मठ बाघम्बरी गद्दी पहुंची. दो हिस्सों में टीम ने मठ के अंदर प्रवेश किया. सीबीआई की एक टीम पिछले गेट से अंदर दाखिल हुई. जबकि दूसरी टीम मेन गेट से अंदर दाखिल हुई. टीम के साथ फॉरेंसिक एक्सपर्ट भी मौजूद हैं. टीम आज क्राइम सीन का रिक्रिएशन और सेवादारों से पूछताछ करेगी. साथ ही वसीयत में उत्तराधिकारी घोषित बलवीर गिरि से भी पूछताछ करेगी. कल भी सीबीआई ने बलवीर गिरि और अन्य सेवादारों से पूछताछ की थी.

सीबीआई ने दूसरे दिन की जांच शुरू कर दी है. आश्रम पहुंचते ही सीबीआई की टीम मठ में अलग-अलग एंगल से तस्वीरें खींच रहे हैं. फारेंसिक एक्सपर्ट भी एवीडेंस कलेक्ट कर रहे हैं. सीबीआई के ज्वाइंट डायरेक्टर विप्लव चौधरी के नेतृत्व में ये जांच हो रही है. सीबीआई ने पूछताछ के लिए सबसे पहले बलवीर गिरी को बुलाया है. निरंजनी अखाड़े के सचिव रवीन्द्र व एक अन्य संत से भी पूछताछ चल रही है.

नरेंद्र गिरि के ड्राइवर का बड़ा खुलासा, बोला- घटना वाले दिन मठ से कहीं बाहर नहीं गए थे महंत

इस समय सीबीआई की एक टीम महंत नरेंद्र गिरि के कमरे के बाहर मौजूद है. इसी कमरे में फांसी के फंदे पर शव लटका मिला था. कमरे के बाहर रखे गमले के आस पास भी तलाशी हुई. एसआईटी टीम के अध्यक्ष सीओ अजीत सिंह चौहान सीबीआई टीम को जानकारी दे रहे हैं.

महंत नरेंद्र गिरि मौत मामले में अहम मोड़, अब CBI के रडार पर हरिद्वार के प्रॉपर्टी डीलर

जानकारी के अनुसार आज सीबीआई महंत नरेंद्र गिरि के सील कमरे को खोल सकती है. क्राइम सीन का भी रिक्रिएशन कर सकती है.

UP Madarsa Result: मदरसा बोर्ड का रिजल्ट घोषित, बिना परीक्षा पास हुए 1 लाख 21 हजार स्टूडेंट

UP Madarsa Result: मदरसा बोर्ड का सेकेंडरी व सीनियर सेकेंडरी परीक्षाओं का रिजल्ट घोषित हो गया है.

इस साल सेकेंडरी में कुल 96213 परीक्षार्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था जिसके सापेक्ष 95624 परीक्षार्थी पास हुए हैं. वहीं सीनियर सेकेंडरी में इस साल कुल 25919 परीक्षार्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था जिसके सापेक्ष 25659 परीक्षार्थी पास हुए हैं.

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प्रयागराज. यूपी मदरसा शिक्षा परिषद ने सेकेंडरी व सीनियर सेकेंडरी परीक्षाओं के लिए वर्ष 2021 का रिजल्ट जारी कर दिया है. इस साल मुंशी, मौलवी और आलिम के कुल एक लाख 22 हजार 132 परीक्षार्थियों का रिजल्ट जारी किया गया है. बता दें कि कोविड के चलते परीक्षायें आयोजित नहीं की गई थीं ऐसे में स्टूडेंट्स को बिना परीक्षा लिए ही प्रमोट कर दिया गया है. सर्किट हाउस प्रयागराज में रिजल्ट की घोषणा की गई.

बता दें कि जारी रिजल्ट में सेकेंडरी में 99.38 प्रतिशत परीक्षार्थी पास हुए हैं. इस साल सेकेंडरी में कुल 96213 परीक्षार्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था जिसके सापेक्ष 95624 परीक्षार्थी पास हुए हैं. इनमें 54630 छात्र और 40994 छात्राएं शामिल हैं. वहीं सीनियर सेकेंडरी 98.99 प्रतिशत परीक्षार्थी पास हुए हैं. सीनियर सेकेंडरी में इस साल कुल 25919 परीक्षार्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था जिसके सापेक्ष 25659 परीक्षार्थी पास हुए हैं. सीनियर सेकेंडरी में पास होने वालों में 13734 छात्र और 11925 छात्राएं शामिल हैं.

शासन की ओर से तय मानक के आधार पर किए गए हैं प्रमोट
बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार के तय मानक और यूपी बोर्ड की तर्ज़ पर, यूपी मदरसा शिक्षा परिषद ने सेकेंडरी व सीनियर सेकेंडरी परीक्षार्थियों को प्रमोट किया है. दोनों कक्षाओं को मिलाकर पास होने वाले स्टूडेंट्स की संख्या 1 लाख 21 हजार से ज्यादा है.

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मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने घोषित किया रिजल्ट
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने रिजल्ट घोषित किया है. इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार सबका साथ सबका विकास की भावना से काम कर रही है. उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि मदरसा बोर्ड में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स के एक हाथ में कुरान हो तो दूसरे हाथ में लैपटॉप हो. सरकार ने एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू किया है. मदरसा पोर्टल भी सरकार ने शुरु किया है. इस दौरान उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि दूसरे दलों ने सिर्फ वोट के लिए इस्तेमाल किया लेकिन बीजेपी ने मदरसों के आधुनिकीकरण के लिए काम किया है. अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को सरकार एजुकेशन लोन देकर आगे बढ़ाने का काम कर रही है.

हाईकोर्ट ने दिया भर्ती के लिए निकले UPPSE का विज्ञापन रद्द करने का आदेश, जानें वजह

कोर्ट ने राज्य सरकार और लोक सेवा आयोग से जवाब मांगा है. (File photo)

UPPSE : आयोग के अधिवक्ता का कहना था कि आयोग की कई परीक्षाओं में धांधली के आरोप की सीबीआई जांच चल रही है. इसलिए आयोग ने पूर्व में लिया गया टेस्ट निरस्त करने का निर्णय किया है. याचिका पर 27 अक्तूबर को अगली सुनवाई होगी.

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प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग प्रयागराज के प्रदेश सचिवालय में अपर निजी सचिवों की भर्ती के लिए 24 अगस्त 2021 को जारी विज्ञापन को रद्द करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने इस बारे में दाखिल याचिका पर राज्य सरकार व यूपी लोक सेवा आयोग से दो सप्ताह में याचिका पर जवाब मांगा है. बता दें कि इससे पहले अपर निजी सचिवों की भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2013 में भी शुरू की गई थी. लेकिन तब भी इसे बीच में ही रोक दिया गया था और 9 साल बाद पूर्व की चयन प्रक्रिया रद्द कर नई अधिसूचना जारी की गई है. इस बार इसकी वैधता को चुनौती दी गई है.

विज्ञापन रद्द करने का आदेश जस्टिस सरल श्रीवास्तव की सिंगल बेंच ने जय करन व अन्य की याचिका पर दिया है. याची का कहना है कि लोक सेवा आयोग की वर्ष 2013 में जारी भर्ती के तहत स्टेनोग्राफी व टाइप टेस्ट के अलावा कंप्यूटर टेस्ट होना था. स्टेनोग्राफी व टाइप टेस्ट में याचीगण सफल रहे और कंप्यूटर टेस्ट कई तारीखें तय करने के बाद भी नहीं लिया जा सका. और अब 9 साल बाद 24 अगस्त 21 के आदेश से परीक्षा नियंत्रक लोक सेवा आयोग ने उन्हीं पदों की नए सिरे से भर्ती प्रक्रिया शुरू की है. याची का कहना है कि स्टेनोग्राफी और टाइपिंग के लिए नियमित अभ्यास की आवश्यकता होती है. चूंकि याचीगण इस चरण को पास कर चुके थे, इसलिए उनको सिर्फ कंप्यूटर टेस्ट की उम्मीद थी. इसे निरस्त करने का कोई ठोस कारण भी नहीं बताया गया है.

लोक सेवा आयोग का तर्क

आयोग के अधिवक्ता का कहना था कि आयोग की कई परीक्षाओं में धांधली के आरोप की सीबीआई जांच चल रही है. इसलिए आयोग ने पूर्व में लिया गया टेस्ट निरस्त करने का निर्णय किया है. याचिका पर 27 अक्तूबर को अगली सुनवाई होगी.

ओवैसी का बयान: यादव ने अखिलेश, जाटव ने माया और ठाकुर ने योगी को चुना, मुस्लिम अपना नेता चुनें

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि यूपी में मुस्लिम अखलियत की कोई आवाज ही नहीं है.

Asaduddin Owaisi: उत्तर प्रदेश में पांव जमाने को आतुर असदुद्दीन ओवैसी जातीय नब्ज पर हाथ रखने की कोशिश की है. उन्होंने कहा कि जिस तरह से यादवों ने अखिलेश, जाटवों ने मायावती, ठाकुरों ने योगी आदित्यनाथ को नेता मान लिया है, उसी तरह मुस्लिम भी अपना नेता चुन लें. ओवैसी आपको हिस्सा दिलाने आया है.

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प्रयागराज. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (Uttar Pradesh Assembly Election) के पहले ही असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की एंट्री ने यहां चुनावी माहौल गर्माना शुरू कर दिया है. शनिवार को प्रयागराज पहुंचकर असदुद्दीन ओवैसी ने जनसभा को संबोधित किया. इस दौरान ओवैसी ने अतीक अहमद को पार्टी में शामिल करने पर कहा कि वह कानून की नजर में चुनाव लड़ सकते हैं. आने वाले विधानसभा चुनाव में अतीक अहमद आपके वोट से जरूर जीतेंगे. उन्होंने कहा कि मुजफ्फरनगर दंगे के आरोपियों पर दर्ज मुकदमे बीजेपी सरकार ने वापस ले लिए हैं, लेकिन इस पर मीडिया में कोई चर्चा नहीं हुई.

ओवैसी ने नाथूराम गोडसे को आजाद भारत का पहला दहशतगर्द बताया. भारत की सियासत की ये तल्ख हकीकत है. उन्होंने कहा कि जिस समाज का नेता होगा उसके मसले हल किए जाते हैं. ओवैसी इसीलिए आया है कि हमको अपना हिस्सा लेना है. आपको अपना हक कब मिलेगा. ओवैसी ने कहा कि जिस तरह से यादव ने अखिलेश को अपना नेता माना, जिस तरह से जाटवों ने मायावती को अपना नेता माना, जिस तरह से ठाकुर योगी आदित्यनाथ को अपना नेता मानते हैं, जिस तरह कुर्मी अनुप्रिया पटेल को अपना नेता मानते हैं, जिस तरह से ब्राह्मण और अन्य समाज के लोग मोदी को अपना नेता मानते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में मुस्लिम अखलियत की कोई आवाज ही नहीं है.

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उन्होंने कहा कि याद रखो कोई आसमान और जमीन से निकलकर नहीं आएगा. आपको खुद अपने हालात तब्दील करने होंगे. अगर आप एक करवट लेंगे तो मुझे यकीन है उत्तर प्रदेश में इंकलाब होगा. मैं वादा करता हूं अल्लाह जब तक मुझे जिंदा रखेगा, उत्तर प्रदेश में एक इंकलाब पैदा होगा.

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अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन की आंसुओं का वास्ता देते हुए ओवैसी ने कहा कि मेरी मां और बहनों की आंख से आंसू निकलना कम हो जाए मैं यही चाहता हूं. उन्होंने कहा कि न मोदी से डरना है, न योगी से डरना है, न अखिलेश से डरना है और न कांग्रेस से डरना है. मैं यही पैगाम देने आया हूं. मौलाना कलीम सिद्दीक़ी को लेकर ओवैसी ने कहा कि इस मामले में अखिलेश यादव नहीं बोले, क्योंकि फिर उन्हें हिंदू वोट नहीं मिलेगा.

धर्मांतरण कानून को बताया गलत

ओवैसी ने योगी सरकार के धर्मांतरण कानून को ही गलत बताया है. उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत कोई मुसलमान और ईसाई होता है तो उसे बताना पड़ेगा बगैर किसी फ्रॉड के उसने धर्म परिवर्तन किया. योगी सरकार का यह कानून को असंवैधानिक है. चीखकर चिल्लाकर बोलो कि यह नाइंसाफी है. हम नाइंसाफी को नाइंसाफी कहेंगे चाहे मुसलमान करे या हिन्दू करे.

यह बीज बोने का वक्त नहीं, फसल काटने का वक्त है

उन्होंने कहा कि दोबारा किसी की भी कीमत पर यूपी में बीजेपी की सरकार न बने. मैं आप को नेता बनाने आया हूं. मैं आपको पैगाम दे कर जा रहा हूं. यह फसल काटने का वक्त है, यह बीज बोने का वक्त नहीं है. मुसलमानों को साठ साल से धोखा मिलता रहा है. आजम खान जेल में हैं. मुख्तार अंसारी जेल में है. बड़ी संख्या में मुसलमान जेलों में बंद हैं. हम फिरका परस्त को भी हरायेंगे.

मोदी सरकार पर बोला हमला

उन्होंने कहा कि ओबीसी ने मोदी को अपना वोट देकर पीएम बनाया, लेकिन ओबीसी की जनगणना नहीं करा रहे हैं. मोदी की सरकार ओबीसी को धोखा दे रही है. साल 2024 में मोदी को भी हरायेंगे.

जेल से अतीक अहमद की चिट्ठी, कहा- मुस्लिमों की हालत के लिए SP जिम्मेदार, ओवैसी रहनुमा

अतीक अहमद ने साबरमती जेल से चिट्ठी लिखकर समाजवादी पार्टी पर हमला बोला है.

Muslim Politics: पूर्व सांसद अतीक अहमद ने एक पत्र भेजकर समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा है. अतीक अहमद ने पत्र में कहा कि आज जो उनकी, उनके परिवार और प्रदेश के मुसलमानों की हालत है वह समाजवादी पार्टी की वजह से है.

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प्रयागराज. गुजरात के साबरमती जेल (Sabarmati Jail) में बंद बाहुबली पूर्व सांसद अतीक अहमद (Atiq Ahmed) ने एक पत्र भेजकर समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा है. अतीक अहमद ने पत्र में कहा कि आज जो उनकी, उनके परिवार और प्रदेश के मुसलमानों की हालत है वह समाजवादी पार्टी की वजह से है. उन्होंने कहा है कि बीजेपी जीते या हारे, लेकिन हमें अपनी ताकत दिखानी है. उन्होंने पत्र में एआईएमआईएम को वोट करने की अपील की है.

दरअसल, कुछ दिन पहले ही अतीक अहमद ने अपनी पत्नी समेत एआईएमआईएम ज्वाइन किया है. शनिवार को एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी प्रयागराज भी पहुंच रहे हैं.

अतीक ने पत्र में लिखी ये बात

अतीक अहमद की पत्नी शाईस्ता परवीन ने साबरमती जेल से भेजे गए अतीक अहमद के पत्र का संदेश पढ़ा. पत्र में लिखा है ‘ मैं और मेरा भाई अशरफ जेल में है. मेरे बेटे उमर अतीक को गलत फंसाया गया. बेटे पर सीबीआई ने इनाम घोषित किया है.’ पत्र में लिखा कि कुछ सियासी गलतियां हुई हैं. मैं आपका वोट लेकर दूसरे को दे आता था. आजदी के इतने साल बाद मुसलमानों का कोई सियासी रहनुमा नहीं है. हमको लेमनचूस और टाफियां खिलायी जाती हैं. इनको ऐसे मुसलमान सांसद और विधायक चाहिए जो जी हुजूरी करें.

फूलपुर सांसद बना तो कब्रिस्तान की बाउंड्री वॉल बनाने में लगा दिया. मुझे रोका गया कि यादवों के स्कूलों को भी सांसद निधि दो, लेकिन मैंने कभी दबाव में आकर काम नहीं किया. हमको हर नौकरी में और शिक्षा में हिस्सा दो. हमारे वोट सबसे ज्यादा है, हमें हिस्सा चाहिए. हम हिन्दू भाईयों को भी टिकट देंगे. अतीक ने पत्र में लिखा कि वोट एआईएमआईएम को दो. बीजेपी जीते तो जीत जाये, लेकिन हमें अपनी ताकत दिखाना है.

अतीक के घर जाएंगे ओवैसी

पत्र पढ़ने के बाद शाईस्ता परवीन ने बीजेपी सरकार के बजाय समाजवादी पार्टी को ही अपनी हालत का जिम्मेदार बताया. उन्होंने कहा कि वोट लेते हैं, लेकिन साथ खड़े नहीं हो सकते. गौरतलब, है कि एमआईएमआईएम मुखिया और सांसद असदुद्दीन ओवैसी शनिवार को एक दिन के प्रयागराज दौरे पर हैं. यहां उन्हें पहले एमआईसी ग्राउंड पर सम्मेलन में शामिल होना है. सम्मेलन में सिर्फ 100 लोगों को ही शामिल होने की इजाजत दी गई हैं. ओवैसी इसके बाद पूर्व बाहुबली सांसद अतीक अहमद के उस घर पर खाना खाने और नमाज पढ़ने के लिए जाएंगे, जिसे योगी सरकार ने पिछले साल ऑपरेशन माफिया के तहत बुलडोजर चलवा कर मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया था.

Prayagraj News: नरेंद्र गिरि के ड्राइवर का बड़ा खुलासा, बोला- घटना वाले दिन मठ से कहीं बाहर नहीं गए थे महंत

Prayagraj News: महंत नरेंद्र गिरि के ड्राइवर का बड़ा खुलासा

Mahant Narendra Giri Suicide Case: महंत नरेंद्र गिरि को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में तीन लोगों आनंद गिरि, आद्या तिवारी और संदीप तिवारी को यूपी पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है.

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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी (Mahant Narendra Giri) आत्महत्या (Suicide) मामले में प्रयागराज से बड़ी खबर आ रही है. शनिवार को महंत नरेंद्र गिरि के ड्राइवर दुर्गेश ओझा का बड़ा खुलासा सामने आया है. मीडिया से बातचीत में महंत नरेंद्र गिरि के ड्राइवर दुर्गेश ओझा ने बताया कि घटना वाले दिन महंत मठ से कहीं बाहर नहीं गए थे. ड्राइवर के मुताबिक घटना वाले दिन वो ड्यूटी पर नहीं था. लेकिन महंत जी ने उसे 10 बजे सुबह बुलाया और कहा तबीयत ठीक नहीं है जाकर आराम करो. दुर्गेश ओझा ने दावा करते हुए कहा कि उनको देखने से बिल्कुल नहीं लग रहा था वो इतना बड़ा कदम उठा सकते हैं.

महंत नरेंद्र गिरि के ड्राइवर ने बताया कि शाम को 6 बजे जानकारी हुई कि महंत जी ने खुदकुशी कर ली. उसके बाद बहुत भारी संख्या में पुलिस बल पहुंचकर शव को कब्जे में ले लिया. ड्राइवर ने बताया कि वो अपनी पर्सनल बात किसी से शेयर नहीं करते थे. आनंद गिरि से महंत नरेंद्र गिरि का विवाद किसी से छुपा नहीं है. सर्वेश कुमार द्विवेदी उनके मुशी हैं. महंत जी कुछ लिखने पढ़ने के लिए बुलाया करते थे.

फंदे से लटकते मिले महंत
सेवादार सर्वेश कुमार द्विवेदी, सुमित तिवारी व धनंजय के साथ कमरे के अंदर पहुंचे। सेवादार सर्वेश के मुताबिक, कमरे में महंत नरेंद्र गिरि का शव रस्सी के सहारे पंखे से फंदे पर लटकता हुआ मिला। रस्सी काटकर फंदे से महंत के शव को उतारा और पुलिस को घटना की जानकारी दी। सूचना के करीब 10-15 मिनट बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस को छानबीन में कमरे से 7 पन्नों का सुसाइड नोट मिला।

इससे पहले महंत नरेंद्र गिरि को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में तीन लोगों आनंद गिरि, आद्या तिवारी और संदीप तिवारी को यूपी पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है. सीबीआई पता लगाएगी कि महंत की मौत हत्या है या आत्महत्या.

प्रयागराज का किशोर वैज्ञानिक अब बना IAS अफसर, पढ़ें UPSC में 50वीं रैंक पाने वाले अभिषेक की कहानी

प्रयागराज के अभिषेक शुक्ला का UPSC में हुआ चयन

Prayagraj News: अभिषेक शुक्ला शुरू से ही मेधावी रहे हैं. इनकी शुरुआती पढ़ाई टूंडला के क्राइस्ट द किंग हाई स्कूल से हुई. इसके बाद सेंट जोसेफ कॉलेज प्रयागराज से इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण की. दोनों ही परीक्षाओं में अभिषेक शुक्ला ने जिले में टॉप किया था.

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प्रयागराज. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की ओर से शुक्रवार को जारी किए गए नतीजों में प्रयागराज (Prayagraj) के अभिषेक शुक्ला (Abhishek Shukla) का भी आईएएस के पद पर चयन हुआ है. प्रयागराज के इस लाल ने आईएएस की परीक्षा में 50वीं  रैंक हासिल हासिल कर देश और प्रदेश के साथ ही प्रयागराज का भी नाम रोशन किया है. अभिषेक शुक्ला शुरू से ही मेधावी रहे हैं. इनकी शुरुआती पढ़ाई टूंडला के क्राइस्ट द किंग हाई स्कूल से हुई. इसके बाद सेंट जोसेफ कॉलेज प्रयागराज से इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण की. दोनों ही परीक्षाओं में अभिषेक शुक्ला ने जिले में टॉप किया था. इसके बाद आईआईटी दिल्ली से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया. अपनी पढ़ाई के बाद पहली नौकरी एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया में जूनियर एक्जीक्यूटिव इलेक्ट्रिकल के पद पर मिली. इसके बाद से ही अभिषेक शुक्ला संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में जुट गए.

यूपीएससी से 2020 में इंडियन इंफॉर्मेशन सर्विसेज में चयन हुआ. इन दिनों दिल्ली के आईआईएमसी में इसकी ट्रेनिंग भी कर रहे हैं. अभिषेक शुक्ला के पिता आनंद शुक्ला नार्थ सेंट्रल रेलवे के प्रयागराज डिवीजन में चीफ कंट्रोलर इंचार्ज के पद पर कार्यरत हैं. उनके मुताबिक अभिषेक शुक्ला शुरू से मेधावी रहे हैं. उन्हें कभी पढ़ाई के लिए कहना नहीं पड़ा और बिना कोचिंग के सेल्फ स्टडी से उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है. उन्हें किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना की स्कालरशिप भी वर्ष 2010 में मिल चुका है. इसके साथ ही साथ राष्ट्रीय प्रतिभा खोज छात्रवृत्ति भी हासिल कर चुके हैं.

उपलब्धि पर परिवार में जश्न
इस बड़ी उपलब्धि से परिवार में जश्न का माहौल है. घर में मां कल्पना शुक्ला गृहणी हैं. उन्हें बेटे की सफलता पर गर्व भी है. अभिषेक शुक्ला की छोटी बहन प्रतिष्ठा शुक्ला ने लॉ की पढ़ाई की है और वकालत शुरु कर रही हैं. उन्हें भी अपने भाई की कामयाबी पर बेहद नाज है प्रतिष्ठा के मुताबिक उनके भाई ने आईएएस बनकर उन्हें जिंदगी का सबसे बड़ा तोहफा दिया है.

महंत नरेंद्र गिरि मौत मामले में अहम मोड़, अब CBI के रडार पर हरिद्वार के प्रॉपर्टी डीलर

अखाड़ा परिषद के प्रमुख थे महंत नरेंद्र गिरि.

Mahant Narendra Giri Death : प्रयागराज में हुई नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत की जांच में सीबीआई प्रॉपर्टी के एंगल से भी जांच में जुटी हुई है. उत्तराखंड तक पहुंच गई इस जांच के साथ ही ये भी जानिए कि कैसे हरिद्वार में प्रॉपर्टी की जंग पहले भी संतों की जान तक पहुंची है.

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पु​लकित शुक्ला
हरिद्वार. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत की गुत्थी उलझती जा रही है. गिरि के शिष्य आनंद गिरि को हरिद्वार से गिरफ्तार किए जाने के बाद उन्होंने अखाड़ों की ज़मीन और प्रॉपर्टी के विवाद के संबंध में बातचीत कही थी और अब जांच एजेंसी को नरेंद्र गिरि के कॉल रिकॉर्ड से हरिद्वार के कुछ रियल एस्टेट कारोबारियों से कई बार बात होने का पता चला है. पूरे मामले में जांच एजेंसी अब प्रॉपर्टी के एंगल से भी जांच कर रही है. यही कारण है कि जांच एजेंसी की रडार पर अब हरिद्वार के कुछ रियल एस्टेट कारोबारी भी आ गए हैं.

अखाड़ों के पास हैं बेशुमार संपत्तियां
हरिद्वार में कई अखाड़ों के मुख्यालय हैं. यहां अखाड़ों, आश्रमों और मठों के पास अकूत सम्पदाएं हैं. कुछ अखाड़ों के पास तो शहर के लगभग हर हिस्से में ज़मीनें हैं. हरिद्वार में अखाड़ों के महंतों और रियल स्टेट कारोबारियों के बीच में सांठगांठ काफी पुरानी रही है. यही कारण है कि धर्म, परमार्थ और जनहित के उद्देश्य से अर्जित की गई संपत्तियां अब अपार्टमेंट्स, शॉपिंग कॉंप्लेक्स और मॉल में तब्दील हो रही हैं.

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हरिद्वार स्थित कई अखाड़ों की संपत्तियों को लेकर विवादों की चर्चा आम है.

साल दर साल यहां ऐसे अपार्टमेंट और सोसाइटी की संख्या बढ़ रही है, जो अवैध ढंग से अखाड़ों की ज़मीनों पर खड़े हैं. दूसरी तरफ, ये भी दबे शब्दों में कहा जा रहा है कि राजस्व चोरी और नियमों को दरकिनार कर इमारतें खड़े करने का यह खेल शासन प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है.

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कई संतों की हो चुकी हैं हत्याएं
धर्म नगरी में धार्मिक संपत्तियों की खरीद-फरोख्त न सिर्फ विवादित बल्कि रक्त रंजित रही है. राज्य गठन के बाद से अब तक हरिद्वार के दर्जनों संतो की हत्या और संदिग्ध मौत हो चुकी है. ऐसी मौतों के पीछे संपत्तियों की खरीद-फरोख्त का विवाद बताया जाता है. अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता बाबा हठयोगी बताते हैं ‘अखाड़ा की ज़मीनों की खरीद-फरोख्त से कई बार अखाड़ों के पदाधिकारियों में भी आपसी तनातनी बढ़ जाती है इसलिए अब तक दर्जनों संतो की मौत संदिग्ध रही है.’

UP Elections: ओवैसी का प्रयागराज दौरा कल, पोस्टर में साथ दिखे अतीक अहमद

कल प्रयागराज में होंगे असदुद्दीन ओवैसी.  (फाइल फोटो)

Poster Viral : प्रयागराज में होने वाली रैली के लिए जारी पोस्टर में बाहुबली नेता अतीक अहमद भी दिख रहे हैं. AIMIM की ओर से जारी इस पोस्टर के बाद बड़ा सवाल यह है कि क्या ओवैसी की नैया अब बाहुबली अतीक अहमद पार लगाएंगे?

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 24, 2021, 22:48 IST
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प्रयागराज. ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन यानी AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी शनिवार को प्रयागराज आ रहे हैं. ओवैसी के प्रयागराज दौरे से पहले ही उनका पोस्टर वायरल हो गया है. प्रयागराज में होने वाली रैली के लिए जारी पोस्टर में बाहुबली नेता अतीक अहमद भी दिख रहे हैं. AIMIM की ओर से जारी इस पोस्टर के बाद बड़ा सवाल यह है कि क्या ओवैसी की नैया अब बाहुबली अतीक अहमद पार लगाएंगे?

बता दें कि हाल ही में अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन ने लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में AIMIM में शामिल हुई थीं. कुछ दिन पहले ओवैसी ने अतीक अहमद और उनकी पत्नी को चुनाव में टिकट देकर मनचाही सीट से चुनाव लड़ाने का भी ऐलान किया था. प्रयागराज के लिए जारी पोस्टर में पोस्टर में असदुद्दीन ओवैसी के साथ बाहुबली पूर्व सांसद अतीक अहमद और एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली की भी तस्वीर है. पोस्टर में अंग्रेजी में लिखा है कि बॉस इज कमिंग. ओवैसी की पार्टी यूपी की सभी सीटों पर लड़ने का दावा कर रही है.

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नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने पोस्टर को कहा – ड्रामा

एआईएमआईएम राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के प्रयागराज दौरे को लेकर बाहुबली पूर्व सांसद अतीक अहमद के साथ जो पोस्टर जारी किया गया है उसे यूपी के कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने ड्रामा करार दिया है. उन्होंने कहा है कि यूपी विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही असदुद्दीन ओवैसी ने ड्रामा शुरू कर दिया है. ओवैसी पहले अयोध्या गए, अब प्रयागराज आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि अयोध्या और प्रयागराज आने से ओवैसी पहले परहेज करते थे. कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने आरोप लगाया है कि चुनाव में वोटों के ध्रुवीकरण के मकसद से ओवैसी प्रयागराज आ रहे हैं. लेकिन ओवैसी चाहे जिसके साथ पोस्टर लगा लें अब कोई फर्क नहीं पड़ेगा‌, क्योंकि मोदी और योगी सरकार सबका साथ सबका विकास के संकल्प को लेकर काम कर रही है.

...तो इसलिए महंत नरेंद्र गिरि की मौत की गुत्‍थी सुलझाना CBI के लिए है बेहद जरूरी

सीबीआई महंत नरेंद्र गिरी की आत्महत्या या हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए कई स्तरों पर काम कर रही है.

Mahant Narendra Giri Death Investigation: महंत नरेंद्र गिरी का शव बीते सोमवार को प्रयागराज (Prayagraj) के बाघम्बरी मठ में फांसी से लटका मिला था. हाल के दिनों में यह दूसरा हाईप्रोफाइल मामला है, जो सीबीआई (CBI) के जिम्मे आया है. इससे पहले झारखंड के धनबाद कोर्ट के जज उत्तम आनंद (Judge Uttam Anand) की मौत के मामले की जांच भी सीबीआई के जिम्मे आई थी.

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नई दिल्ली. केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत (Narendra Giri Death Case) के मामले की जांच शुरू कर दी है. यूपी सरकार के अनुरोध के बाद भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DOPT) ने महंत नरेंद्र गिरि की मौत के मामले की सीबीआई जांच को मंजूरी दी है. बता दें कि महंत नरेंद्र गिरी का शव बीते सोमवार को प्रयागराज के बाघम्बरी मठ में पंखे से लटका मिला था. हाल के दिनों में यह दूसरा हाईप्रोफाइल मामला है, जो सीबीआई के जिम्मे आया है. इससे पहले झारखंड के धनबाद कोर्ट के जज उत्तम आनंद की मौत के मामले की जांच भी सीबीआई के जिम्मे आई थी. जज उत्तम आनंद की मौत में अभी तक सीबीआई को कुछ भी हाथ नहीं लगा है, जबकि इस मामले को हाई कोर्ट के निर्देश के बाद जुलाई महीने में ही सीबीआई के हवाले किया गया था. ऐसे में सवाल उठता है कि सीबीआई महंत नरेंद्र गिरी की हत्या या आत्महत्या के मामले को कितना जल्दी सुलझा लेगी? इस तरह के मामलों में क्या है सीबीआई का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड?

सूत्रों की मानें तो सीबीआई महंत नरेंद्र गिरी की आत्महत्या या हत्या को सुलझाने के लिए कई स्तरों पर काम करना शुरू कर दिया है. सबसे पहले देशभर के अलग-अलग फोरेंसिक टीमों को इस काम में लगाया गया है. ये एक्सपर्ट्स अलग-अलग तरीके से मामले की फोरेंसिक जांच कर सीबीआई को बताएंगे. वहीं, सीबीआई इस घटना को रिक्रिएशन कर यह समझने की कोशिश करेगी कि वाकई में गिरि की मौत आत्महत्या थी या फिर हत्या की गई?

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सीबीआई की आपराधिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अलग-अलग मामलों में निपटाने की सफलता का दर 69.19 प्रतिशत है.

सीबीआई के लिए क्यों है यह अहम केस?
कुछ महीने पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को लेकर एक सख्त टिप्पणी की थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ये धारणा है कि सीबीआई को मिलने वाले मामलों में सफलता दर कम रहता है. इसलिए सीबीआई अवरोधों को पहचान कर कोर्ट को अवगत कराए. न्यायमूर्ति एसके कौल और न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश की पीठ ने सीबीआई के निदेशक को निर्देश दिया था कि वह छह सप्ताह के भीतर हलफनामा दायर कर बताए कि एजेंसी कितने मामलों में निचली अदालतों और उच्च न्यायलयों में आरोपियों को दोषी साबित करने में सफल रही है.

क्या कहती है यह रिपोर्ट
बता दें कि पिछले साल केंद्रीय सतर्कता आयोग की एक रिपोर्ट के मुताबिक सीबीआई की आपराधिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अलग-अलग मामलों में निपटाने की सफलता का दर 69.19 प्रतिशत रही है. सीबीआई ने एक साल पहले की तुलना में 2019 में 21 फीसदी कम ममलों का रजिस्ट्रर्ड किया या पूछताछ की. साल 2018 में सीबीआई के पास 899 मामले आए थे और इतने मामलों में ही पूछताछ की, जबकि साल 2019 में 710 मामालों में ही ऐसा किया गया.

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पिछले दिनों ही सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को फटकार लगाई थी.

क्यों सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को फटकार लगाई?
पिछले दिनों ही सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को फटकार लगाई, जब उसे पता चला कि एक मामले में 542 दिनों की देरी के बाद अपील दायर की गई है. सुप्रीम कोर्ट ने इन्हीं सब बातों को ध्यान में रख कर अब सीबीआई के कामकाज का विश्लेषण करने का फैसला किया है. हालांकि, साल 2018 की तुलना में 2019 में सीबीआई की सफलता का दर 68 प्रतिशत से बढ़कर 69.19 प्रतिशत तक पहुंच गया है.

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कुलमिलाकर अगले कुछ दिनों में सीबीआई को सुप्रीम कोर्ट में कई अहम सवालों का जवाब देना है. जैसे, कितने मामलों में अभी तक सत्र न्यायालय और उच्च न्यायालयों में सीबीआई अभियुक्तों को दोषी ठहराने में सफल रही है? दूसरा, सीबीआई निदेशक कानूनी कार्यवाही के संबंध में विभाग को कितना मजबूत कर रहे हैं? तीसरा, सीबीआई को सुप्रीम कोर्ट को बताना होगा कि अब देश की अदालतों में कितने मामले लंबित हैं और कितने समय पर हैं? चौथा, अभी निपटाए जा रहे केसों और सफलतापूर्वक पूरे किए गए मामलों का पूरा लिस्ट सीबीआई को सुप्रीम कोर्ट को देना होगा.

Mahant Suicide Case: पुराना है संपत्ति को लेकर बाघंबरी मठ में संतों का विवाद

बाघंबरी मठ के एक महंत की पहले भी हुई है संदिग्ध परिस्थितियों मे मौत.

Suspicious death : इससे पहले 1978 में महंत विचारानंद गिरी की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी. बताया जाता है कि हरिद्वार से लौटते समय ट्रेन में जहर के सेवन से महंत विचारानंद गिरी की हुई थी मौत.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 24, 2021, 18:53 IST
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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की आत्महत्या के मामले में हर दिन नए-नए खुलासे हो रहे हैं. शुक्रवार को सवाल यह भी उठा कि कहीं मठ की करोड़ों की संपत्ति ने तो नहीं ले ली महंत नरेंद्र गिरि की जान. दरअसल बाघम्बरी मठ में पहले भी एक महंत की संदिग्ध मौत हुई है. इसलिए भी महंत नरेंद्र गिरि की मौत पर साजिश के लग रहे हैं आरोप. इससे पहले 1978 में महंत विचारानंद गिरी की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी. बताया जाता है कि हरिद्वार से लौटते समय ट्रेन में जहर के सेवन से महंत विचारानंद गिरी की हुई थी मौत.

सूत्रों ने बताया कि महंत बलदेव गिरी के बाद बने महंत भगवान गिरी की स्वाभाविक मौत हुई थी. उनकी मौत के बाद 2004 में महंत नरेंद्र गिरि मठ के उत्तराधिकारी बने. 20 सितंबर 2021 महंत नरेंद्र गिरि फांसी के फंदे पर लटके पाए गए.

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हालांकि महंत विचारानंद गिरी की मौत के बाद ही मठ की संपत्ति को लेकर विवाद शुरू हो गया था. तब शिवानंद गिरी ने मठ का उत्तराधिकारी घोषित करने की मांग थी. यह मामला पहले सिविल कोर्ट में दाखिल किया गया था. लेकिन शिवानंद गिरी ने कोर्ट फीस जमा नहीं कर पाए थे तो उनका दावा खारिज कर दिया गया था. हालांकि बाद में हाईकोर्ट जाने पर अदालत ने कोर्ट फीस जमा करने का मौका दिया, लेकिन शिवानंद गिरी फीस नहीं जमा कर पाए. आज भी यह मुकदमा जिला कोर्ट प्रयागराज में चल रहा है. महंत नरेंद्र गिरि के वकील महादेव द्विवेदी ने इस बात की जानकारी दी है. मतलब साफ है कि मठ की संपत्ति को लेकर विवाद कोई नया नहीं है. अब लोगों को सीबीआई जांच से ही राज खुलने की उम्मीद है.

Mahant Suicide: क्या 'हनी ट्रैप' के शिकार हुए महंत नरेंद्र गिरि, SIT ने बरामद किया वीडियो

Mahant Death: क्या 'हनी ट्रैप' के शिकार हुए थे महंत नरेंद्र गिरि (File photo)

Mahant Narendra Giri Suicide Case: आज जब हरिद्वार से सूचना मिली की आनंद एक दो दिन में फोटो वायरल करने वाला है, तो बदनामी से अच्छा मर जाना है. मेरी आत्महत्या का जिम्मेदार आनंद गिरि, पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी और उनका लड़का संदीप तिवारी है.

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प्रयागराज. अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) की मौत के मामले की जांच जल्द ही सीबीआई अपने हाथ में ले लेगी. इसी बीच एक सवाल उठा है कि महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत के पीछे हनी ट्रैप तो वजह नहीं है. सूत्रों के मुताबिक जांच के दौरान एसआईटी ने आनंद गिरि के ग्रुप से वीडियो बरामद किया है. इसी वीडियो को दिखाकर महंत नरेंद्र गिरि को ब्लैक मेल किया जा रहा था. महंत नरेंद्र गिरि ने सुसाइड नोट में भी इसका जिक्र किया है. पुलिस की जांच के मुताबिक मामला आत्महत्या का है, जबकि महंत के चाहने वालों के मुताबिक मामला साजिशन मौत का है, लेकिन सुसाइड लेटर के मुताबिक मामला अब एक महिला से जुड़ा दिखता है.

पुलिस के पास मौजूद सुसाइड नोट में महंत नरेंद्र गिरि ने लिखा है क‍ि “आनंद गिरि के कारण आज मैं विचलित हो गया. हरिद्वार से सूचना मिली कि आनंद कंप्यूटर के माध्यम से एक लड़की के साथ मेरा फोटो जोड़कर गलत काम करते हुए फोटो वायरल करने वाला है. वह मुझे बदनाम करने जा रहा है. मैंने सोचा कि एक बार बदनाम हो गया तो कहां-कहां सफाई दूंगा. बदनाम हो गया तो जिस पद पर हूं उसकी गरिमा चली जाएगी. इससे अच्छा तो मर जाना ठीक है. मेरे मरने के बाद सच्चाई तो सामने आ ही जाएगी. आगे नरेंद्र गिरि ने लिखा कि मैं जिस सम्मान से जी रहा हूं अगर मेरी बदनामी हो गई तो मैं समाज मैं कैसे रहूंगा, इससे अच्छा मर जाना ठीक रहेगा.

“13 सितंबर को ही करने वाला था आत्महत्या”

महंत नरेंद्र गिरि ने सुसाइड नोट में लिखा है कि मैं 13 सितंबर को ही आत्महत्या करने वाला था . लेकिन हिम्मत नहीं कर पाया. आज जब हरिद्वार से सूचना मिली की आनंद एक दो दिन में फोटो वायरल करने वाला है, तो बदनामी से अच्छा मर जाना है. मेरी आत्महत्या का जिम्मेदार आनंद गिरि, पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी और उनका लड़का संदीप तिवारी है. तीनों आरोपियों के नाम के साथ लिखा है कि मैं पुलिस अधिकारियों व प्रशासनिक अधिकारियों से प्रार्थना करता हूं कि इन तीनों पर कानूनी कार्रवाई की जाए, जिससे मेरी आत्मा को शांति मिल सके.

Narendra Giri Death: महंत नरेंद्र गिरि के कमरे से मिला अलवर की मिठाई दुकान का थैला, कौन आया था मिलने?

Prayagraj: महंत नरेंद्र गिरि के कमरे से मिला बाबा स्वीट शॉप अलवर का थैला

Mahant Narendra Giri News: सूत्रों के मुताबिक ऐसा लग रहा है महंत से हाल ही में कोई शख्स राजस्थान के अलवर से मिलने आया था. महंत नरेंद्र गिरि के शिष्य आनंद गिरि राजस्थान के भीलवाड़ा में आसींद क्षेत्र के सरेरी गांव के निवासी हैं.

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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के संदिग्ध मौत के बाद नए-नए खुलासे हो रहे है. शुक्रवार को पुलिस ने महंत नरेंद्र गिरि के कमरे से बाबा स्वीट शॉप अलवर का एक थैला बरामद किया. बता दें कि राजस्थान के अलवर शहर का कलाकंद पूरे देश में मशहूर है. जांच एजेंसी अब इस बात का पता लगाने में जुटी है कि आखिर अलवर का कौन शख्स महंत नरेंद्र गिरि से मिलने आया था. क्या महंत नरेंद्र गिरि को पसंद था कलाकंद. सूत्रों के मुताबिक ऐसा लग रहा है कि महंत से हाल ही में कोई शख्स अलवर से मिलने आया था. महंत नरेंद्र गिरि के शिष्य आनंद गिरि राजस्थान के भीलवाड़ा में आसींद क्षेत्र के सरेरी गांव के रहने वाले हैं.

महंत की मौत के मामले में आरोपी आनंद गिरि को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. महंत के और शिष्य की शिकायत पर आनंद गिरि के खिलाफ मामला दर्ज हुआ. हालांकि आनंद गिरि ने सभी आरोपों से इनकार किया है. अदालत ने इस मामले में दो आरोपियों-आनंद गिरि और आद्या प्रसाद तिवारी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था.

कौन हैं आनंद गिरी

आनंद गिरि राजस्थान के भीलवाड़ा में आसींद क्षेत्र के सरेरी गांव के निवासी हैं. उनका असली नाम अशोक है और उनके पिता का नाम रामेश्वर लाल चोटिया है. वो अपने चार भाइयों में सबसे छोटे हैं. दरअसल साल 1997 में आनंद 12 साल की उम्र में अपना घर छोड़कर हरिद्वार चले गए थे. हरिद्वार में उन्हें नरेंद्र गिरी मिले. मुलाकात होने पर नरेंद्र गिरि ने आनंद से पूछा कि तुम क्या चाहते हो? तो जवाब में आनंद ने कहा था कि वो पढ़ना चाहता है. इसलिए नरेंद्र गिरी ने आनंद की पढ़ाई करवाई और दीक्षा भी दी.

Exclusive: महंत नरेंद्र गिरि ने बनवाई थी तीन वसीयत, हर बार बदला था उत्तराधिकारी

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रहे महंत नरेंद्र गिरि की मौत के मामले की जांच अब सीबीआई कर रही है.

Mahant Narendra Giri Suicide Case: ऋषिशंकर द्विवेदी ने न्यूज़18 से बातचीत में बताया कि महंत नरेंद्र गिरि ने 4 जून 2020 को पहले की दोनों वसीयतों को निरस्त करवाते हुए तीसरी वसीयत लिखवाई जिसमें उन्होंने बलवीर गिरि को अपना उत्तराधिकारी बनवाया.

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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (Akhil Bhartiya Akhara Parishad) के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) की आत्महत्या के मामले में हर दिन नए-नए खुलासे हो रहे हैं. अपने सुसाइड नोट में उन्होंने जिस रजिस्टर्ड वसीयतनामा (Will) का जिक्र किया था वह न्यूज़18 के हाथ लगा है. इसमें उन्होंने महंत बलवीर गिरि को अपना उत्तराधिकारी बनाया है. इतना ही नहीं महंत नरेंद्र गिरि ने एक नहीं बल्कि तीन बार वसीयत बनवाई थी. हर बार उन्होंने अपना उत्तराधिकारी बदला दिया। पहला वसीयत 2010 में उन्होंने बनवाया जिसमें बलवीर गिरि को उत्तराधिकारी बनाया. इसके बाद 2011 में उन्होंने दूसरी वसीयत तैयार करवाई, जिसमे अपने शिष्य स्वामी आनंद गिरि को उत्तराधिकारी बनाया. इसके बाद 2020 में एक और वसीयत तैयार करवाई जिसमें पहले की दोनों वसीयतों को रद्द करवाते हुए बलवीर गिरि को फिर से उत्तरधिकारी घोषित किया.

महंत नरेंद्र गिरि के वकील ऋषिशंकर द्विवेदी ने न्यूज़18 से बातचीत में बताया कि महंत नरेंद्र गिरि ने 4 जून 2020 को पहले की दोनों वसीयतों को निरस्त करवाते हुए तीसरी वसीयत लिखवाई जिसमें उन्होंने बलवीर गिरि को अपना उत्तराधिकारी बनवाया. उन्होंने बताया कि नरेंद्र गिरि ने 7 जनवरी 2010 को पहली वसीयत तैयार करवाई थी. इसमें उन्होंने बलवीर गिरि को अपना उत्तराधिकारी बनाया था. इसके बाद 29 अगस्त 2011 को फिर उन्होंने दूसरी वसीयत तैयार करवाई और इस बार स्वामी आनंद गिरी को उत्तरधिकारी बनाया. उन्होंने बताया था कि बलवीर गिरि हरिद्वार में व्यस्त रहते हैं इसलिए आनंद गिरि ही उनके उत्तराधिकारी होंगे. इसके बाद 4 जून 2020 को महंत जी ने अपनी तीसरी वसीयत तैयार करवाई. इस बार उन्होंने अपनी पहले की दोनों वसीयतों को रद्द करवाते हुए एक नई वसीयत तैयार करवाई. इसमें उन्होंने एक बार फिर बलवीर गिरि को उत्तराधिकारी बनाया. उन्होंने स्वामी आनंद गिरि से अपने मनमुटाव का जिक्र भी वकील ऋषिशंकर द्विवेदी से किया था.

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4 जून 2020 को लिखी थी आखिरी वसीयत

वसीयत के मुताबिक बलवीर गिरि ही होंगे नए महंत 

वकील ऋषिशंकर द्विवेदी ने बताया कि अखाड़ा परिषद के नियम के मुताबिक वसीयत के अनुसार ही उत्तराधिकारी तय होता है. महंत नरेंद्र गिरि की आखिरी वसीयत के मुताबिक बलवीर गिरि ही अगले महंत बनेंगे. उन्हें पांच परमेश्वरों के मुताबिक अखाड़े का संचालन करना होगा.

Mahant Death Case: मौत से पहले महंत नरेंद्र गिरि के फोन पर आए थे 35 कॉल, जांच के घेरे में हरिद्वार के 2 बिल्डर

Prayagraj: एसआईटी इन लोगों से जल्द करेगी पूछताछ

Mahant Narendra Giri Suicide: एसआईटी महंत नरेंद्र गिरि के सुरक्षाकर्मियों की संपत्ति तलाश करने में जुटी है, तो वहीं उनके गनर अभिषेक मिश्रा पर भी एसआईटी की निगाहें टेढ़ी हो गई है, जिनके पास लग्जरी कारें और करोड़ों के बंगले भी है.

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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रहे महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri Death Case) की मौत के मामले की जांच अब सीबीआई के पास पहुंच चुकी है. इस मामले में शुक्रवार को एक नई जानकारी भी सामने आई है. सोमवार यानि जिस दिन महंत नरेंद्र गिरि की मौत हुई तब उनके फोन पर कुल 35 कॉल आई थी. इसमें से 18 पर उन्होंने बातचीत की थी. बातचीत करने वालों में हरिद्वार के कुछ लोग और 2 बिल्डर भी शामिल थे. फोन कॉल के बाद जांच एजेंसी हरिद्वार कनेक्शन की जांच करने में जुटी है. एसआईटी नरेंद्र गिरि के मोबाइल की सीडीआर निकालकर इन लोगों से भी पूछताछ करेगी. हरिद्वार से कॉल करने वालों का डिटेल खंगालने के लिए हरिद्वार पुलिस को भी जानकारी भेजी गई है.

सूत्रों के मुताबिक 13 सितंबर से पहले ही नरेंद्र गिरी को आपत्तिजनक वीडियो की जानकारी मिल गई थी. जिसके चलते मंहत नरेंद्र गिरि परेशान चल रहे थे. उधर, एसआईटी ने नरेंद्र गिरी की सुरक्षा में तैनात सिपाहियों की भी जांच शुरू कर दी है. 20 सितंबर को सुरक्षा में तैनात पुलिस कर्मियों की लोकेशन जांच टीम ने मंगी है. बताया जा रहा है कि पूरे घटनाक्रम की जानकारी जल्द एसआईटी सीबीआई के साथ साझा करेंगी.

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एसआईटी महंत नरेंद्र गिरि के सुरक्षाकर्मियों की संपत्ति तलाश करने में जुटी है, तो वहीं उनके गनर अभिषेक मिश्रा पर भी एसआईटी की निगाहें टेढ़ी हो गई है, जिनके पास लग्जरी कारें और करोड़ों के बंगले भी है. अभिषेक मिश्रा के घर और उसकी तस्वीरें न्‍यूज 18 के पास है जो यह बताती है कि वह कितना बड़ा आदमी बन चुका है. अब एसआईटी अभ‍िषेक के बारे में यह जानकारी जुटाने पर लगी है. महंत नरेंद्र गिरि के मामले में दो अन्य आरोपियों आनंद गिरि और आद्या प्रसाद तिवारी को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया और बुधवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया. अदालत ने इन दोनों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.

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