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दलित प्रोफेसर का आरोप- इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में जाति के आधार पर दिए जाते हैं अंक

News18 Uttar Pradesh
Updated: October 21, 2019, 11:38 AM IST
दलित प्रोफेसर का आरोप- इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में जाति के आधार पर दिए जाते हैं अंक
असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विक्रम हरिजन ने अब जातिवाद का आरोप लगाया है.

असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विक्रम हरिजन ने कहा है कि इलाहाबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी (Allahabad Central University) में जाति के आधार पर छात्रों के साथ भेदभाव किया जाता है. उनका आरोप है कि जाति के आधार पर ही अंक भी दिए जाते हैं.

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इलाहाबाद. हिन्‍दू देवी-देवताओं पर अशोभनीय टिप्पणी कर सुर्खियों में आए इलाहाबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी (Allahabad Central University) के इतिहास विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विक्रम हरिजन (Dr. Vikram Harijan) ने विश्वविद्यालय प्रशासन की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाया है. उन्होंने विश्वविद्यालय के शिक्षकों और छात्रों पर जातिवादी होने और जाति के आधार पर छात्रों को अंक देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं. डॉ. विक्रम हरिजन ने कहा है कि विश्वविद्यालय में छात्र और शिक्षक जाति के आधार पर बंटे हुए हैं और रिसर्च कर रहे छात्रों को बंधुआ मजदूर की तरह से रखा जाता है. रिसर्च कराने वाले छात्र अपने रिसर्च गाइड के अलावा किसी दूसरे शिक्षक से भी नहीं मिल पाते हैं.

डॉ. विक्रम हरिजन ने आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी के हर विभाग के अंदर सीनियर और जूनियर शिक्षकों में आपस में खींचतान और लड़ाई चलती रहती है, जिससे रिसर्च का स्तर और गरिमा भी गिर रही है. डॉ. विक्रम हरिजन ने कुलपति से ऐसे तमाम मामलों को सुलझाने और इसके समाधान की भी मांग की है. उन्होंने मानव संसाधन विकास मंत्रालय से भी मांग की है कि उत्तर भारत और खासतौर पर पूर्वांचल के विश्वविद्यालयों में जातिवाद की समस्या सबसे ज्यादा है. इसलिए इसके समाधान के लिए ठोस कदम उठाया जाना चाहिए.

चीफ प्रॉक्टर ने आरोप को खारिज किया
डॉ. विक्रम हरिजन की ओर से लगाए गए आरोपों को इलाहाबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के चीफ प्राॅक्टर और विवि शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. रामसेवक दुबे ने सिरे से खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा है कि विश्वविद्यालय में जातिवाद जैसी कोई समस्या नहीं है. हांलाकि, उन्होंने कहा है कि जिस कैटेगरी में जो व्यक्ति जिस पद के लिए आवेदन करता है, उस कैटेगरी में उस शिक्षक की नियुक्ति होती है. लेकिन, जाति के आधार पर न ही शिक्षकों और न ही छात्रों से कोई भेदभाव की विश्व विद्यालय में कोई परंपरा रही है और न ही ऐसी कोई शिकायत ही अब तक सामने आई है.

मामले की जांच कराई जाएगी
प्रो. रामसेवक दुबे ने कहा है कि जहां तक डॉ. विक्रम हरिजन को इस वर्ष रिसर्च स्कॉलर न मिलने का सवाल है तो इसकी जानकारी मध्यकालीन और आधुनिक इतिहास विभाग से मिल सकती है. लेकिन, यदि किसी शिक्षक के ऐसे बर्ताव के बारे में डॉ. विक्रम हरिजन कोई शिकायत करेंगे तो उस मामले की जांच कराई जा सकती है. वहीं, ईश निंदा के बाद मॉब लिंचिंग के डर से पचास दिनों तक विश्वविद्यालय कैंपस से दूर रहने के मामले पर चीफ प्रॉक्‍टर ने कहा है कि उन्हें मॉब लिंचिंग का कोई खतरा नहीं है. जिला प्रशासन की ओर से डॉ. विक्रम हरिजन को सुरक्षा गार्ड मुहैया करा दिया गया है.

रिपोर्ट- सर्वेश दुबे
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First published: October 21, 2019, 10:56 AM IST
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