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चोरी गए कार की लोन रिकवरी जारी करने पर बैंक की फजीहत, मैनेजर को HC में मांगनी पड़ी माफी
Allahabad News in Hindi

News18 Uttar Pradesh
Updated: February 7, 2020, 10:19 AM IST
चोरी गए कार की लोन रिकवरी जारी करने पर बैंक की फजीहत, मैनेजर को HC में मांगनी पड़ी माफी
चोरी गए कार की लोन रिकवरी सर्टिफिकेट जारी करने पर बैंक ऑफ बड़ौदा बैंक के ब्रांच मैनेजर को हाईकोर्ट में माफी मांगनी पड़ी

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने शाखा प्रबंधक (Branch Manager) को चेतावनी दी है कि वो भविष्य में इस प्रकार की गलती ना करें और ग्राहकों के साथ नियमानुसार तरीके से ही कार्रवाई करें

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प्रयागराज. चोरी गई कार की लोन रिकवरी के लिए गलत तरीके से रिकवरी सर्टिफिकेट जारी करने के मामले में प्रयागराज में बैंक ऑफ बड़ौदा की मुंडेरा ब्रांच को फजीहत झेलनी पड़ी है. बैंक के वरिष्ठ शाखा प्रबंधक को इलाहाबाद हाईकोर्ट में माफी मांगनी पड़ी है. हाईकोर्ट ने शाखा प्रबंधक को चेतावनी दी है कि वो भविष्य में इस प्रकार की गलती ना करें और ग्राहकों के साथ नियमानुसार तरीके से ही कार्रवाई करें. कोर्ट में याचिका दाखिल होने के बाद बैंक ने रिकवरी सर्टिफिकेट वापस ले लिया था. इसलिए कोर्ट ने चेतावनी देते हुए याचिका का निस्तारण (रद्द) कर दिया.

मिली जानकारी के मुताबिक प्रयागराज के कीडगंज निवासी मनोज अग्रवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एस.के गुप्ता और जस्टिस पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने यह आदेश दिया. याचिका दाखिल करने वाले के वकील मयंक मिश्रा और विवेक कुमार श्रीवास्तव का कहना था की याची ने वर्ष 2011 में बैंक ऑफ बड़ौदा की मुंडेरा ब्रांच से कार खरीदने के लिए पांच लाख रूपये का लोन लिया था. अगस्त 2011 में उन्होंने अपनी कार की रजिस्ट्रेशन कराई और पांच दिसंबर, 2011 को कार उनके घर से बाहर से चोरी हो गई.

बैंक ने कार के लोन के लिए रिकवरी सर्टिफिकेट जारी की

कार का बीमा यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से कराया गया था. उन्होंने कार चोरी की थाने में एफआईआर दर्ज कराई. साथ ही बैंक, बीमा कंपनी, आरटीओ को पत्र लिखकर कार चोरी होने के बारे में सूचना दी. उन्होंने बीमा कंपनी से क्लेम का भुगतान करने की मांग की. उसका क्लेम अभी निर्णीत (निर्णय होना) नहीं हुआ है. मगर इस बीच 16 सितंबर, 2019 को बैंक ने चार लाख 80 हजार रुपये का रिकवरी सर्टिफिकेट जारी कर दिया. इसके खिलाफ मनोज अग्रवाल की तरफ से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई. कोर्ट ने पहली याचिका बिना दखल के खारिज कर दी तो दोबारा याचिका दाखिल कर वकीलों का कहना था कि लोन रिकवरी कानून के तहत बैंक द्वारा की गई कार्रवाई गलत है, लिहाजा रिकवरी सर्टिफिकेट को रद्द किया जाए.

हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए बैंक के शाखा प्रबंधक को तलब कर लिया. अदालत में हाजिर हुए बैंक के सीनियर मैनेजर संतोष कुमार ने स्वीकार किया कि रिकवरी सर्टिफिकेट गलत जारी हो गया था, जिसे बैंक ने वापस ले लिया है. उन्होंने इस गलती के लिए अदालत में बिना शर्त माफी मांगी.

(इनपुट- सर्वेश दूबे)

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First published: February 7, 2020, 9:49 AM IST
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