BHU छात्र के पुलिस कस्टडी से लापता मामले की जांच CBCID को, हलफनामा कोर्ट में दाखिल

बीएच'यू
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एसपी सिटी, वाराणसी (Varanasi) विकास त्रिपाठी ने हलफनामा दाखिल कर कोर्ट को ये जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि 29 अक्टूबर को राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीसीआईडी को सौंप दी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 4, 2020, 9:55 PM IST
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वाराणसी. उत्तर प्रदेश के वाराणसी (Varanasi) में बीएचयू (BHU) के छात्र शिव कुमार त्रिवेदी के पुलिस कस्टडी से लापता होने के मामले की जांच राज्य सरकार (Up Government) ने सीबीसीआईडी (CBCID) को सौंप दी है. एसपी सिटी, वाराणसी विकास त्रिपाठी ने हलफनामा दाखिल कर कोर्ट को ये जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि 29 अक्टूबर को राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीसीआईडी को सौंप दी है. मामले की अगली सुनवाई 4 जनवरी, 2021 को होगी.

6 महीने से लापता है छात्र शिव कुमार त्रिवेदी

याची अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने याचिका में सीबीआई जांच की मांग की है. बता दें बीएचयू का छात्र शिव कुमार त्रिवेदी 6 महीने से लापता है. वह लंका थाने से पुलिस कस्टडी से लापता हुआ था. बीएससी सेकेंड इयर का छात्र शिव मध्यप्रदेश के पन्ना जिले का रहने वाला है. जस्टिस प्रीतिकर दिवाकर की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच में मामले की सुनवाई हुई.



ये है पूरा मामला
बता दें बीएचयू के छात्र के लापता होने के बारे में अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र लिखा था, जिसे अदालत ने जनहित याचिका के तौर पर स्वीकार कर सुनवाई शुरू की. इसके बाद वाराणसी के एसएसपी पाठक ने अदालत को बताया कि लापता छात्र का पता लगाने के लिए एक विशेष टीम गठित की गई है और पुलिस उसका पता लगाने के लिए ईमानदारी से प्रयास कर रही है. वहीं लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की गई है.



उल्लेखनीय है कि बीएचयू में बीएससी द्वितीय वर्ष के छात्र शिव कुमार त्रिवेदी को पुलिस ने 12 फरवरी को विश्वविद्यालय के एंफीथिएटर ग्राउंड से हिरासत में लिया था. शिव कुमार के एक सहपाठी ने 112 नंबर पर फोन कर पुलिस को सूचना दी थी कि त्रिवेदी मैदान में असामान्य स्थिति में खड़ा है. इससे पूर्व सुनवाई पर अपर शासकीय अधिवक्ता ने हलफनामा दाखिल कर अदालत को बताया था कि जो छात्र पुलिस थाने में 12 फरवरी को था, वह अगले दिन वहां से भाग गया. तब से उसके बारे में कोई विवरण उपलब्ध नहीं है. हालांकि बाद में पुलिस मानसिक रूप से विक्षिप्त एक व्यक्ति को लेकर आई और पुलिस को संदेह है कि वह त्रिवेदी हो सकता है. इसलिए उसकी पहचान निर्धारित करने के लिए डीएनए और बायोमीट्रिक जांच प्रस्तावित है.
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