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CAA Protest: हिंदू-मुस्लिम एकता और केंद्र सरकार की बुद्धि-शुद्धि के लिए महिलाओं ने करवाया हवन
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News18 Uttar Pradesh
Updated: January 21, 2020, 6:31 PM IST
CAA Protest: हिंदू-मुस्लिम एकता और केंद्र सरकार की बुद्धि-शुद्धि के लिए महिलाओं ने करवाया हवन
प्रयागराज के मंसूर अली पार्क में केंद्र सरकार की बुद्धि-शुद्धि के लिए हवन-पूजन

CAA-NRC-NPR के खिलाफ धरना दे रही महिलाओं का कहना है कि ये हवन इसलिए भी जरूरी है ताकि केंद्र सरकार (Central Government) को सदबुद्धि आये और देश को हिंदू व मुस्लिम में बांटने वाला काला कानून सरकार वापस ले.

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प्रयागराज. नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship amendment Act) और एनआरसी (NRC) के विरोध में दिल्ली के शाहीन बाग (Shaheen bagh of New Delhi) की तर्ज पर प्रयागराज के मंसूर अली पार्क में भी मुस्लिम महिलाओं का धरना लगातार दसवें दिन भी जारी है. सैकड़ों की तादाद में महिलायें अपने बच्चों को लेकर मंसूर अली पार्क (Mansoor Ali Park) में धरना दे रही हैं और सीएए (CAA) को काला कानून बताते हुए उसे वापस लिए जाने की भी मांग कर रही है.

आंदोलनरत महिलाओं ने जहां बीते शुक्रवार को धरना स्थल पर ही नमाज अता की थी और सीएए और एनआरसी को वापस लिए जाने के लिए दुआयें मांगी थी. वहीं मंगलवार को देश में हिन्दू-मुस्लिम एकता और केन्द्र सरकार की बुद्धि-शुद्धि के लिए साधु-संतों से हवन भी कराया है.

CAA हिंदुओं- मुसलमानों को बांटने वाला काला कानून !
CAA-NRC-NPR के खिलाफ धरना दे रही महिलाओं का कहना है कि ये हवन इसलिए भी जरूरी है ताकि केंद्र सरकार को सदबुद्धि आये और देश को हिंदू और मुस्लिम में बांटने वाला काला कानून सरकार वापस ले. गौरतलब है कि दिल्ली के शाहीन बाग की तर्ज पर यूपी में सबसे पहले 12 जनवरी से मुस्लिम महिलाओं का धरना शहर के रोशन बाग में सीएए और एनआरसी के विरोध में शुरु हुआ था. जिसके बाद से लगातार इस धरने को कई सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों का भी समर्थन मिला है. हांलाकि बीते दिनों धारा 144 के उल्लंघन के आरोप में लगभग ढाई सौ लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हुआ है. लेकिन उसके बावजूद भी मुस्लिम महिलायें 22 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में आने वाले फैसले का इंतजार कर रही हैं.

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प्रयागराज के मंसूर अली पार्क में पिछले 10 दिन से धरने पर बैठी महिलाएं


इस आंदोलन की ख़ास बात यह है कि इसकी कमान बुर्कानशीं मुस्लिम महिलाओं ने संभाल रखी है. जिनके साथ इस आंदोलन में हर मजहब की महिलाएं व बड़ी संख्या में पुरुष और बच्चे भी शामिल हैं. प्रदर्शनकारी महिलाएं पूरी रात यहां खुले आसमान के नीचे बैठी रहती हैं. यहीं नमाज़ पढ़ती हैं और यहीं से सरकार के खिलाफ हुंकार भर रही हैं. आंदोलन के दस दिन बीतने और धरना स्थल पर लगातार आंदोलनकारियों की भीड़ बढ़ने से प्रशासन की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. इसके साथ ही पार्क को आंदोलनकारियों के कब्ज़े से खाली कराना भी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती साबित हो रही है. बड़ी तादाद में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज होने के बावजूद इनका हौसला टस से मस नहीं हो रहा है.

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First published: January 21, 2020, 5:40 PM IST
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