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कांग्रेस सेवादल के प्रशिक्षण शिविर में वीर सावरकर को लेकर बांटी गई विवादित पुस्तक

Sarvesh Dubey | News18 Uttar Pradesh
Updated: February 7, 2020, 6:18 PM IST
कांग्रेस सेवादल के प्रशिक्षण शिविर में वीर सावरकर को लेकर बांटी गई विवादित पुस्तक
प्रयागराज के कांग्रेस सेवादल प्रशिक्षण शिविर में वीर सावरकर पर आपत्तिजनक पुस्तक बांटी गई.

कांग्रेस सेवा दल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ प्रमोद पाण्डेय ने खुली चुनौती देते हुए कहा कि पुस्तक पूरी तरह से तथ्यों पर आधारित है. यदि भाजपा, आरएसएस और विनायक दामोदर सावरकर के अनुयायियों को किसी भी बात पर कोई आपत्ति है तो उन्हें खुलकर सामने आना चाहिए.

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प्रयागराज. संगम नगरी में चल रहे माघ मेले के दौरान वीर सावरकर (Veer Savarkar) को लेकर विवादित पुस्तक (Controversial Book) बांटे जाने का मामला सामने आया है. कांग्रेस सेवा दल के प्रशिक्षण शिविर के तीसरे दिन कांग्रेस सेवा दल कार्यकर्ताओं के बीच बांटी गई यह विवादित पुस्तक लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. इससे पहले कांग्रेस की ओर से देश के कई दूसरे शहरों में दिल्ली और भोपाल में इस तरह से वीर सावरकर पर लिखी 16 पन्ने की पुस्तक बांटे जाने पर काफी बवाल मचा था.

'वीर सावरकर कितने वीर' शीर्षक से लिखी गई यह पुस्तक पिछले कुछ दिनों से पूरे देश में यह चर्चा का भी मुद्दा बना हुई है. इस पुस्तक में विनायक दामोदर सावरकर को लेकर कई आपत्तिजनक बातें भी कही गई हैं. खास तौर पर पुस्तक में इस बात पर ही सवाल खड़ा किया गया है कि विनायक दामोदर सावरकर वीर थे या नहीं. इस पुस्तक में उनके जीवन से जुड़े कई पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए नकारात्मक छवि पेश करने की कोशिश की गई है. जिसमें लिखा गया है कि देश की आजादी की लड़ाई में लोगों ने गोलियां और लाठियां खायीं लेकिन अंग्रेजों के सामने घुटने नहीं टेके. वहीं विनायक दामोदर सावरकर ने अंग्रेजों से 11 बार माफी मांगी थी, जिसमें नौ बार लिखित माफी मांगने का प्रमाण भी मौजूद है.

अंग्रेज किसलिए देते थे 60 रुपये मासिक पेंशन
पुस्तक में सवाल खड़े करते हुए कहा गया है कि जब हाईस्कूल के शिक्षक को 7 रुपये से लेकर 12 रुपये तक वेतन मिलता था, उस दौर में आखिर विनायक दामोदर सावरकर को अंग्रेज किसलिए 60 रुपये मासिक पेंशन देते थे. ऐसा लिखा गया है कि विनायक दामोदर सावरकर साम्प्रदायिक मानसिकता वाले व्यक्ति थे. पुस्तक में देश के बंटवारे के लिए विनायक दामोदर सावरकर को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा गया है कि सबसे पहले सावरकर ने ही देश के बंटवारे का विचार देश के सामने रखा था.

उन्होंने ही यह विचार जिन्ना और देश के लोगों के दिमाग में डालने का काम किया था, इसलिए सावरकर वीर नहीं हो सकते हैं. पुस्तक में महात्मा गांधी की हत्या में सावरकर की भूमिका को बताया गया है, कहा गया है कि हिन्दू महासभा सावरकर के नीचे काम करने वाली कट्टरपंथी विंग है, जिसने महात्मा गांधी की हत्या की साजिश रची और इसे अंजाम दिया. इसके साथ ही पुस्तक में कई ऐसे बातें लिखी गई हैं, जिससे भाजपा और आरएसएस की नाराजगी होना स्वाभाविक है.

Prayagraj Veer savarkar
प्रयागराज के कांग्रेस सेवादल प्रशिक्षण शिविर में वीर सावरकर पर आपत्तिजनक पुस्तक बांटी गई.


देश में लोगों को अपनी अभिव्यक्ति की आजादी है - प्रमोद तिवारीइस विवादित पुस्तक के प्रयागराज माघ मेले में बांटे जाने पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने कहा है कि देश में लोगों को अपनी अभिव्यक्ति की आजादी है और इस पुस्तक पर कोई प्रतिबंध भी नहीं है. इसलिए इसके बांटने पर सरकार को भी कोई आपत्ति नहीं हो सकती है. उन्होंने कहा है कि ये विचारधाराओं की लड़ाई है. पुस्तक में जो बातें लिखी और कही गईं हैं वो पूरी तरह से तथ्यों पर आधारित हैं. इसलिए इसको लेकर किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए.

कांग्रेस सेवा दल के प्रदेश अध्यक्ष ने दी खुली चुनौती
कांग्रेस सेवा दल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ प्रमोद पाण्डेय ने खुली चुनौती देते हुए कहा कि पुस्तक पूरी तरह से तथ्यों पर आधारित है. यदि भाजपा, आरएसएस और विनायक दामोदर सावरकर के अनुयायियों को किसी भी बात पर कोई आपत्ति है तो उन्हें खुलकर सामने आना चाहिए. उन्होंने दावा किया है कि ये पुस्तक सत्य और यथार्थ पर आधारित है और ऐसी पुस्तकों को लोगों के बीच में जाना चाहिए. उन्होंने कहा है कि भाजपा लगातार गांधी और नेहरू को नकारने की कोशिश कर रही है. लेकिन विनायक दामोदर सावरकर कभी नेहरू, गांधी के बराबर नहीं हो सकते हैं.

गौरतलब है कि विनायक दामोदर सावरकर पर 16 पन्नों की यह पुस्तक फरवरी 2019 में प्रकाशित की गई है. इसके साथ ही माघ मेले में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी कुछ तथ्य और जानकारी पुस्तक भी बांटी गई है.

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First published: February 7, 2020, 4:05 PM IST
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