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राम मंदिर मॉडल को लेकर विवाद, VHP और द्वारका शारदा पीठ ने ठोका अपना-अपना दावा
Allahabad News in Hindi

Sarvesh Dubey | News18 Uttar Pradesh
Updated: January 22, 2020, 11:20 PM IST
राम मंदिर मॉडल को लेकर विवाद, VHP और द्वारका शारदा पीठ ने ठोका अपना-अपना दावा
राम मंदिर मॉडल को लेकर नया विवाद हुआ खड़ा.

अयोध्या राम मंदिर (Ayodhya Ram Temple) पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद करोड़ों राम भक्त और साधु-संत भव्य मंदिर का निर्माण जल्द शुरू होने की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन मंदिर के मॉडल को लेकर विश्व हिन्दू परिषद और द्वारका शारदा पीठ में विवाद शुरू हो गया है.

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प्रयागराज. अयोध्या राम मंदिर (Ayodhya Ram Temple) पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद जहां करोड़ों राम भक्त और साधु संत भव्य मंदिर का निर्माण जल्द शुरू होने की उम्मीद कर रहे हैं, तो प्रयागराज माघ मेले से राम मंदिर के मॉडल को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. माघ मेले में विश्व हिन्दू परिषद (Vishva Hindu Parishad) के शिविर में जहां एक प्रस्तावित मॉडल लोगों के दर्शनों के लिए रखा गया है, तो वहीं अब द्वारका शारदा पीठ (Dwarka Sharda Peeth) के शंकराचार्य स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती के प्रमुख शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भी माघ मेले में अयोध्या राम मंदिर का अपना नया मॉडल श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रख दिया है. उन्होंने कहा है कि तीस साल पहले तैयार किया गया विहिप का डिजाइन काफी छोटा है. इसलिए मौजूदा समय को देखते हुए कम्बोडिया के अंकोरवाट की तर्ज पर ही अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण होना चाहिए. जबकि माघ मेले में हुए विहिप के संत सम्मेलन में हजारों संतों ने विहिप के प्रस्तावित राम मंदिर मॉडल पर ही मंदिर निर्माण किए जाने के प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा चुके हैं.

पहला मॉडल 1989 में विहिप ने साधु संतों से कराया था पास
प्रयागराज में आयोजित हो रहे माघ मेले में विश्व हिन्दू परिषद के संत सम्मेलन में विहिप के प्रस्तावित राम मंदिर मॉडल की तर्ज पर ही अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण पर संत अपनी मुहर लगा चुके हैं. संतों ने साफ कर दिया है कि इससे अलग हटकर विहिप को कोई दूसरा मॉडल कतई मंजूर नहीं होगा. विहिप के केन्द्रीय मंत्री अशोक तिवारी के मुताबिक, इसी प्रस्तावित मॉडल के जरिए ही विहिप ने राममंदिर को लेकर पूरे देश में जनजागरण अभियान चलाया था, इसलिए इसी मॉडल के आधार पर ही अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण होना चाहिए. जबकि मंदिर निर्माण के लिए सत्तर फीसदी पत्थरों को तराशने का भी काम पूरा हो चुका है. राम जन्मभूमि का आन्दोलन विहिप ने अपने हाथों में लेने के बाद आठ अक्टूबर 1984 को अयोध्या से राम मंदिर आन्दोलन की शुरुआत की थी. इस मॉडल को गुजरात के जाने माने आर्किटेक्ट चन्द्रकांत सोमपुरा ने तैयार किया है.

विहिप का ऐसा होगा मंदिर

विहिप के केन्द्रीय मंत्री के मुताबिक, आर्किटेक्ट चन्द्रकांत सोमपुरा सोमनाथ मंदिर, दिल्ली अक्षरधाम औरर लंदन में स्थित अक्षर पुरुषोत्तम धाम को भी डिजाइन कर चुके हैं. विहिप के प्रस्तावित मंदिर की लम्बाई 268 फीट पांच इंच, चौड़ाई 140 फीट और ऊंचाई 128 फीट है. मंदिर का अग्रभाग, सिंहद्वार, नृत्यमंडपम, रंगमंडपम, गर्भगृह डिजाइन किया गया है. इसमें 212 स्तम्भ होंगे, जिसमें से पहली मंजिल पर 106 स्तम्भ होंगे, जिसकी ऊंचाई 16 फीट 6 इंच, दूसरी मंजिल पर भी 106 स्तम्भ होंगे, जिसकी ऊंचाई 14 फीट 6 इंच रखी गई है. प्रत्येक स्तम्भ में 16 मूर्तियां होंगी. पहला चबूतरा आठ फीट ऊंचा 10 फीट चौड़ा होगा और दूसरा चबूतरा चार फीट 9 इंच का होगा, उसके उपर स्तम्भ लगेंगे. पहली मंजिल 18 फीट और दूसरी मंजिल 15 फीट 9 इंच, उसके ऊपर 16 फीट 3 इंच की पेटी होगी. पेटी के ऊपर 65 फीट तीन इंच ऊंचा शिखर होगा.

पहली बार प्रस्तावित राम मंदिर का मॉडल 2001 के कुम्भ में श्रद्धालुओं के लिए लाया गया था. उसके बाद से 2007, 2013 और 2019 के कुम्भ के दौरान भी यह मॉडल प्रयागराज में रखा गया था, लेकिन राम मंदिर पर फैसला आने के बाद यह पहला मौका है जब यह माघ मेले में रखा गया है.

Vishwa Hindu Parishad, Dwarka Sharda Peeth,विश्व हिन्दू परिषद, द्वारका शारदा पीठ
माघ मेले में रखे गए दो-दो मॉडल.
 

शंकराचार्य स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती के प्रमुख शिष्य ने रखा दूसरा मॉडल
द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती के प्रमुख शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विहिप के मॉडल को सिरे से ही खारिज कर रहे हैं. उनका कहना है कि चंदा जमा कर लेने से और पत्थर तराश लेने भर से मंदिर का निर्माण नहीं हो जाता है. उन्होंने विहिप के मॉडल को लेकर कहा है कि यह मॉडल तीस साल पहले बना है. जबकि राम लला के पास कम भूमि थी, लेकिन आज रामलला के पास पर्याप्त भूमि है. इसलिए यहां पर भव्य मंदिर का निर्माण होना चाहिए. उन्होंने कहा है कि विहिप के मंदिर की ऊंचाई काफी कम है. जबकि हमारे मॉडल की ऊंचाई 1008 फीट है.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मुताबिक शंकराचार्य के निर्देश के देश के सैकड़ों इंजीनियरों से मंदिर का डिजाइन तैयार कराया जा रहा है. इसलिए जो मॉडल सबसे बेहतर होगा, उसी की तर्ज पर मंदिर का निर्माण किया जाएगा. उनके मुताबिक, यह मॉडल वाराणसी के आर्किटेक्ट आदित्य गुप्ता ने तैयार किया है, जिसमें मंदिर की नींव 70 फीट, मंदिर का एरिया साढ़े तीन एकड़ और गर्भगृह 216 वर्ग फीट का रखा गया है.

जबकि मंदिर परिसर में एक साथ एक लाख आठ हजार लोगों के रहने की व्‍यवस्‍था की गई है. इसके साथ ही प्रतिदिन एक लाख आठ हजार लोगों के लिए भोजन प्रसाद का भी इंतजाम किया गया है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मुताबिक इसके साथ भगवान राम मंदिर पूरी दुनिया में भव्यता के लिए जाना जाए. इसके लिए इसे 1008 किलो सोने भी मड़ित करने की भी योजना है. अयोध्या राम मंदिर के लिए देश के प्रत्येक गांव और शहर के हर मोहल्ले से 1 ग्राम सोना संग्रहित करने का लक्ष्य रखा गया है. उन्होंने कहा है कि मंदिर निर्माण के लिए जो ट्रस्ट का गठन होना है उसके तहत रामालय न्यास की सबसे उपयुक्त है. रामालय न्यास के 25 न्यासियों का न्यासी मंडल है जो सनातन हिंदू धर्म के सर्वोच्च धर्माचार्यों का न्यास है. उन्होंने कहा है कि राम जन्म भूमि न्यास सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत अर्ह नहीं है. जबकि स्वामी जनमेजय शरण दास जी का राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट भी रामालय न्यास को ही समर्थन कर चुका है, तो इस्कॉन का दावा भी पूरी तरह से गलत है, क्योंकि इस्कॉन कृष्ण भक्ति के प्रचार प्रसार के लिए है न कि भगवान राम के मंदिर के निर्माण के लिए.

 

मॉडल विवाद पर साधु-संतों ने जताई नाराजगी
राम मंदिर मॉडल को लेकर विवाद खड़ा किए जाने से साधु संत नाराज हैं. शिवयोगी मौनी महाराज का कहना है कि लम्बी कानूनी लड़ाई के बाद राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है. इसलिए अब सभी धर्माचार्यों को इस मामले को मॉडल के विवाद में नहीं डालना चाहिए. जबकि दंडी सन्यासी स्वामी ब्रह्माश्रम महाराज का कहना है कि राम मंदिर आन्दोलन में विहिप की बड़ी अहम भूमिका रही है, इसलिए विहिप के ही मॉडल पर अब मंदिर का निर्माण शुरु हो जाना चाहिए. कुछ साधु-संतों का ये भी मानना है कि अगर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद चाहें तो विहिप के ही मंदिर को सोने से जड़ित कर सकते हैं.

वहीं माघ मेले में मंदिर का मॉडल देखने आ रहे राम भक्त भी विहिप के मॉडल को सही मानते हैं. उनके मुताबिक यही मॉडल उनके जहन में पिछले कई वर्षों से चला आ रहा है, लिहाजा अब किसी विवाद से बेहतर है कि विहिप के मॉडल पर ही मंदिर का निर्माण हो.

बहरहाल, अयोध्या विवाद पर फैसले के बाद एक ओर जहां साधु-संत ट्रस्ट के गठन को केन्द्र सरकार की ओर टकटकी लगाये हैं, वहीं राम मंदिर आन्दोलन से जुड़े संतों को भी ट्रस्ट में जगह दिए जाने की मांग कर रहे हैं. अब मंदिर का निर्माण शुरू होने से पहले राम मंदिर के दो-दो मॉडल माघ मेले में रखे जाने से भी मामला तूल पकड़ रहा है. ऐसा लग रहा है कि मंदिर के मॉडल के ज्यादा ये लड़ाई साधु-संतों को अपने को श्रेष्ठ बताने और दिखाने को लेकर है. अब देखना है कि इस पूरे मामले का पटाक्षेप कैसे होता है और आखिर किस मॉडल के आधार पर अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण होता है.

 

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First published: January 22, 2020, 9:56 PM IST
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