COVID-19: श्मसान घाटों पर संक्रमण से बचाव के नहीं हैं पर्याप्त इंतजाम, सोशल डिस्टेंसिंग का भी नहीं हो रहा पालन

महाराजिन बुआ सेवा समिति के जगदीश बताते हैं कि इस घाट पर प्रशासन की ओर से कोरोना से बचाव के लिए अब तक कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं
महाराजिन बुआ सेवा समिति के जगदीश बताते हैं कि इस घाट पर प्रशासन की ओर से कोरोना से बचाव के लिए अब तक कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं

प्रयागराज (Prayagraj) के रसूलाबाद घाट पर अंतिम संस्कार में सहयोग करने वाली संस्था का आरोप है कि प्रशासन द्वारा घाट को सैनिटाइज (sanitation) करने से लेकर यहां काम करने वालों के लिए मास्क व सैनिटाइजर (Mask and Sanitizer) की कोई व्यवस्था नहीं की गई है.

  • Share this:
प्रयागराज. वैश्विक (Global) महामारी कोरोना (Pandemic COVID-19) के संक्रमण की रोकथाम के लिए देशव्यापी लॉकडाउन (Lockdown) है. ऐसे में एक बड़ी समस्या शवों के अंतिम संस्कार के समय सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने में आ रही है. लॉकडाउन के दौरान जन्म-मृत्यु (Birth-Death) और विवाह (Marriage) जैसे संस्कारों के लिए प्रशासन ने कड़े नियम बनाये हैं. जिसके तहत ऐसे किसी संस्कार में 20 लोगों से अधिक लोगों के शामिल होने पर पाबंदी लगायी है. इसके साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग (Social distancing) का पालन करना भी अनिवार्य किया गया है.

सोशल डिस्टेंसिंग दरकिनार !
लेकिन बावजूद इसके किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उनके हित-मित्र और रिश्तेदार अंतिम संस्कार (funeral) में शामिल होने घाटों पर पहुंच रहे हैं. प्रयागराज (Prayagraj) के रसूलाबाद घाट पर अंतिम संस्कार में सहयोग करने वाली संस्था का आरोप है कि प्रशासन द्वारा घाट को सैनिटाइज (sanitation) करने से लेकर यहां काम करने वालों के लिए मास्क व सैनिटाइजर (Mask and Sanitizer) की कोई व्यवस्था नहीं की गई है. प्रयागराज के सबसे बड़े शव दाह घाट रसूलाबाद में ही हर दिन कई शवों का अंतिम संस्कार होता है. यहां पर शवों के अन्तिम संस्कार में शामिल होने के लिए लोगों की भीड़ जुट जाती है, जिसके चलते कोरोना से बचाव को लेकर दिए गए सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन भी नहीं हो पाता है.

हांलाकि इस घाट पर लॉकडाउन से पहले आस-पास के जिलों को मिलाकर प्रतिदिन करीब 40 शवों का अंतिम संस्कार कराया जाता था. लेकिन लॉकडाउन के दौरान शवों की संख्या घटकर एक चौथाई रह गई है. रसूलाबाद घाट पर लोगों के अंतिम संस्कार में सहयोग करने वाली संस्था महाराजिन बुआ सेवा समिति के जगदीश बताते हैं कि इस घाट पर प्रशासन की ओर से कोरोना से बचाव के लिए अब तक कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं, न ही घाट को सेनेटाइज कराया गया है और न ही यहां पर काम करने वाले लोगों के लिए सैनिटाइजर और मास्क की ही कोई व्यवस्था की गई है. जिससे शवों के अंतिम संस्कार के दौरान एकत्रित लोगों में और यहां काम करने वालों में संक्रमण का खतरा भी बना रहता है.
ये भी पढ़ें- EXCLUSIVE: यूपी के इन 37 जिलों को छू भी नहीं पाया कोरोना, जानें क्या है वजह



 
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज