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इलाहाबाद: माघ मेले में श्रद्धालुओं से चल रही है पानी की कालाबाजारी

Manish Paliwal | ETV UP/Uttarakhand
Updated: January 14, 2018, 3:35 PM IST
इलाहाबाद: माघ मेले में श्रद्धालुओं से चल रही है पानी की कालाबाजारी
मेले में वाटर प्वाइंट्स से पानी खरीदते श्रद्धालु की फोटो.
Manish Paliwal | ETV UP/Uttarakhand
Updated: January 14, 2018, 3:35 PM IST
इलाहाबाद के संगम तट पर बसी आस्था की नगरी में श्रद्धालुओं के पीने के लिये साफ पानी बेचा जा रहा है. लेकिन मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं को बेचे जा रहे इस पानी के बदले रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर बिकने वाले पानी से भी ज्यादा कीमत वसूली जा रही है.

शासन प्रशासन माघ मेला में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिये करोड़ों रुपये खर्च किये हैं. उसके बावजूद श्रद्धालुओं के साफ पानी से प्यास बुझाने की अधिक कीमत वसूली जा रही है. श्रद्धालुओं को बेचे जा रहे इस मंहगे पानी के रेट को तय करना मेला और जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है.

लेकिन जिम्मेदार इस वाटर प्वाइंट से बेचे जा रहे पानी की कीमत तय करने के बजाय उसका प्रचार करवा रहे हैं. अफसरों के निर्देश पर ही संगम क्षेत्र लगाये गये सरकारी लाउड स्पीकरों से वाटर प्वाइंट्स के पानी को खरीदकर पीने के लिये प्रचार प्रसार हो रहा है.

संगम के साथ ही मेला क्षेत्र में कई स्थानों पर लगाये गये वाटर प्वाइंट से एक लीटर पानी की बोतल के साथ कीमत नौ रुपये वसूली जा रही है. जबकि यही एक लीटर पानी बोतल के साथ इलाहाबाद जंक्शन के प्लेटफार्म पर आठ रुपये में बिकता है.

इन वाटर प्वाइंट्स पर बगैर बोतल के एक लीटर पानी की कीमत पांच रुपये ली जा रही है. जो रेलवे स्टेशन के रेट के बराबर है. लेकिन एक रुपये में 300 एमएल के बजाय संगम पर 200 एमएल पानी ही दिया जा रहा है.

जिससे कि किसी श्रद्धालू की 200 एमएल में प्यास न बुझे तो वो एक रुपये और खर्च कर पानी खरीदे. अगर श्रद्धालु एक रुपये के पानी के लिये ग्लास लेगा तो उसे एक रुपये और ग्लास के नाम पर खर्च करने होंगे.

यानि एक रुपये में भी श्रद्धालु की प्यास तभी बुझेगी जब उसके पास अपना बर्तन हो.  बगैर बर्तन के दो सौ एमएल पानी की कीमत भी ग्लास के साथ दो रुपये चुकानी होगी. ऐसे में श्रद्धालुओं को पीने के लिये पानी के साथ ही बोतल या ग्लास खरीदना ही पड़ेगा.
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