लाइव टीवी

माघी पूर्णिमा पर संगम में डुबकी लगाने उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब, जानिए कल्पवासी स्नान का महत्व
Allahabad News in Hindi

Sarvesh Dubey | News18 Uttar Pradesh
Updated: February 9, 2020, 11:56 AM IST
माघी पूर्णिमा पर संगम में डुबकी लगाने उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब, जानिए कल्पवासी स्नान का महत्व
संगम में डुबकी लगाने उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

मेलाधिकारी रजनीश मिश्रा के मुताबिक प्रशासन ने लगभग 25 लाख श्रद्धालुओं के संगम में आस्था की डुबकी लगाने का अनुमान लगाया है. 2560 बीघे में बसाये गए माघ मेले को तीन जोन और सात सेक्टरों में बांटा गया है.

  • Share this:
प्रयागराज. माघ मेले के पांचवे स्नान पर्व माघी पूर्णिमा (magh purnima) के मौके पर रविवार को माघी पूर्णिमा के स्नान पर्व पर श्रद्धालु संगम (sangam) में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं. सुबह 8 बजे तक जहां 5 लाख श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई है. वहीं 10:00 बजे तक 9 लाख श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित कर चुके हैं. पूर्णिमा का मुहूर्त शनिवार को दोपहर बाद से ही लगने के चलते स्नान का क्रम कल से ही शुरु हो गया था. लेकिन उदयातिथि में पूर्णिमा आज मनाई जा रही है. इसलिए ब्रह्म मुहूर्त से माघी पूर्णिमा का स्नान शुरु हो गया है.

ऐसी मान्यता है कि माघी पूर्णिमा के दिन संगम में स्नान और दान करने से पूरे माघ मास में स्नान के बराबर ही पुण्य लाभ मिलता है. शास्त्रों के मुताबिक माघ पूर्णिमा पर भगवान विष्णु स्वयं गंगाजल में निवास करते हैं. इसलिए इस स्नान पर्व पर गंगा स्नान और आचमन विशेष फलदायी होता है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन देवता भी रूप बदलकर गंगा स्नान के लिए प्रयाग आते हैं. माघी पूर्णिमा के पर्व के साथ ही संगम की रेती पर चल रहे कल्पवास की भी पूर्णाहुति हो जाती है. इसलिए श्रद्धालु दान पुण्य कर और सूर्य को अर्घ्य व तर्पण कर अपने घरों को लौट रहे हैं. इसके साथ ही माघ मेले में जगह-जगह भंडारे का आयोजन किया जा रहा है. आदिवासी लोगों को पूर्णाहुति के मौके पर प्रसाद वितरित कर रहे हैं.





माघी पूर्णिमा के मघा नक्षत्र में पितरों का तर्पण कर उनका आशीर्वाद लेना उत्तम माना गया है. इसलिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा के तट पर अपने पितरों का तर्पण भी कर रहे हैं. पूर्णिमा का यह संयोग पूर्णिमा पर अमरत्व का संदेश देता है. इस दिन कल्पवासी विधि विधान से दान पूजन कर संगम की रेती से आध्यात्मिक शक्ति बटोर कर विदा हो रहे हैं. वहीं संत महात्मा त्रिजटा स्नान के बाद माघ मेले से विदा लेंगे.

मेलाधिकारी रजनीश मिश्रा के मुताबिक प्रशासन ने लगभग 25 लाख श्रद्धालुओं के संगम में आस्था की डुबकी लगाने का अनुमान लगाया है. 2560 बीघे में बसाये गए माघ मेले को तीन जोन और सात सेक्टरों में बांटा गया है. इसके साथ ही मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए साढ़े सात किलोमीटर के दायरे में 18 स्नान घाट बनाये गए हैं. असम घाटों पर सुरक्षा के मद्देनजर जल पुलिस के साथ ही एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के जवानों को भी तैनात किया गया है.

ये भी पढ़ें:

संत रविदास जयंती: मायावती ने सपा को बताया जातिवादी मानसिकता वाली पार्टी

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए इलाहाबाद से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: February 9, 2020, 11:56 AM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
corona virus btn
corona virus btn
Loading