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प्रदूषण का असर: संगम तट पर प्रवासी पक्षियों की संख्या में गिरावट, पर्यटक निराश

News18 Uttar Pradesh
Updated: November 14, 2019, 12:55 PM IST
प्रदूषण का असर: संगम तट पर प्रवासी पक्षियों की संख्या में गिरावट, पर्यटक निराश
प्रदूषण के चलते संगम पर आने वाले प्रवासी पक्षियों की घटती तादाद चिंता का विषय

भारत में साइबेरियन पक्षी (Siberian birds) राजस्थान के भरतपुर पक्षी विहार (Bharatpur Bird century), भीरपुर, नरायणपुर कलान, देहरांव और प्रयागराज (Prayagraj) के संगम तट (Sangam) पर डेरा जमाते हैं. पक्षी एवं पर्यावरण विद् डॉ. मोहम्मद आरिफ के मुताबिक संगम में बढ़ रहे जल प्रदूषण (water pollution), वायु प्रदूषण (air pollution) और ध्वनि प्रदूषण (noise pollution) के चलते इन प्रवासी पक्षियों की संख्या में आई कमी बेहद चिंताजनक है.

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प्रयागराज. देश के बड़े महानगरों के साथ ही छोटे शहरों में तेजी से बढ़ रहे प्रदूषण का असर अब सर्दियों के मौसम में संगम आने वाले साइबेरियन प्रवासी पक्षियों की संख्या पर भी पड़ रहा है. तीर्थराज प्रयाग में साल दर साल विदेशी मेहमानों की तादात भी लगातार कम होती जा रही है. जिसे लेकर पर्यावरण विदों से लेकर स्थानीय लोगों और पर्यटकों तक में चिंता और निराशा है.

साइबेरियन पक्षियों की घटती तादाद
हर साल सर्दी का मौसम शुरु होते ही सात समन्दर पार कर साइबेरियन पक्षियों के समूह संगम तट पर पहुंच जाते हैं. संगम तट पर हजारों की संख्या में आने वाले साइबेरियन पक्षियों से जहां संगम का प्राकृतिक सौन्दर्य और भी निखर जाता है. तो वहीं संगम पर आने वाले श्रद्धालुओं के साथ ही देशी-विदेशी पर्यटक भी इन प्रवासी पक्षियों के कलरव को देखकर आनन्द की अनुभूति करते हैं. लेकिन इस बार प्रदूषण की मार के चलते इन विदेशी मेहमानों की तादाद बेहद कम हो गई है जिसे लेकर पर्यावरणविदों के साथ पर्यटकों में भी काफी निराशा है.पर्यावरण विशेषज्ञ बढ़ते प्रदूषण की स्थिति को साइबेरियन पक्षियों के लिए बेहद चिंताजनक मान रहे हैं.

सर्दियों के मौसम में हर साल संगम तट पर बिल्कुल अलग ही नजारा देखने को मिलता है. दरअसल सर्दियों में संगम तट पर पानी की सतह सफेद चादर से ढंकी नजर आती है. ऐसा नजारा यहां पर सात समन्दर पार से पहुंचने वाले साईबेरियन पक्षियों की वजह से देखने को मिलता है. संगम के तट पर हजारों की तादात में साइबेरियन पक्षियों के पहुंचने से न केवल यहां की सुन्दरता में चार चांद लग जाते हैं. बल्कि पानी की सतह पर कलरव करते ये विदेशी मेहमान श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी अपनी ओर बरबस आकर्षित करते हैं.

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प्रयागराज के संगम पर ये साइबेरियन पक्षी सभी का मन मोह लेते हैं


यहां आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक प्रकृति के इस अनुपम सौन्दर्य को अपने कैमरे में भी कैद करते संगम तट पर नजर आते हैं. लेकिन देश में तेजी से बढ़ रहे प्रदूषण के चलते अब इन विदेशी मेहमानों की संख्या में भारी गिरावट आई है जिसने पर्यावरणविदों के साथ यहां आने वाले पर्यटकों की भी चिंता बढ़ा दी है. नेपाल से आई पर्यटक प्रशंसा गुप्ता और तपांशी से news 18 संवाददाता ने बातचीत की तो उन्होंने भी साइबेरियन पक्षियों की घटती तादाद इन विदेशी मेहमानों की घट रही तादात को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है. वहीं संगम पर नाव चलाने वाले नाविक सेठ लाल निषाद भी कहते हैं कि प्रदूषण की वजह से पिछले कई सालों की तुलना में इन पक्षियों की संख्या में तेजी से गिरावट आई है.

क्या कहते हैं पर्यावरण विद ?
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पक्षी एवं पर्यावरण विद् डॉ. मोहम्मद आरिफ के मुताबिक ये साइबेरियन डक सर्दियों में 14620 किलोमीटर की लंबी दूरी तय कर साइबेरिया से भारत आ जाते हैं. उनके मुताबिक साइबेरिया से यूरोप के विभिन्न देशों से होते हुए साइबेरियन पक्षियों का समूह अफगानिस्तान, मंगोलिया पहुंचता है. यहीं से ये दो हिस्सों में बंट जाते हैं. साइबेरियन पक्षियों का एक समूह चाइना चला जाता है. वहीं दूसरा समूह तिब्बत के रास्ते भारत में प्रवेश कर जाता है. भारत में साइबेरियन पक्षी राजस्थान के भरतपुर पक्षी विहार, भीरपुर, नरायणपुर कलान, देहरांव और प्रयागराज के संगम तट पर डेरा जमाते हैं.

उनके मुताबिक साइबेरियन पक्षी पचास किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से कई पड़ावों पर ठहरते हुए संगम पहुंचते हैं. सर्दियों में रुस के प्रांत साइबेरिया में तापमान माइनस 30 -40 डिग्री तक पहुंच जाता है ऐसे में ये पक्षी हैबिटेट और ब्रीडिंग के लिए गर्म स्थानों की ओर रुख करते हैं. ये साइबेरियन पक्षी अक्टूबर से मार्च तक का समय विभिन्न इलाकों में व्यतीत करते हैं. पक्षी एवं पर्यावरण विद् डॉ. मोहम्मद आरिफ के मुताबिक संगम में बढ़ रहे जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण के चलते इन प्रवासी पक्षियों की संख्या में आई कमी बेहद चिंताजनक. उनके मुताबिक संगम पर इन विदेशी पक्षियों को पर्यटकों व श्रद्धालुओं के दाना चुगाने पर भी रोक लगनी चाहिए. क्योंकि पर्यटकों द्वारा जो भोजन उन्हें खिलाया जा रहा है वह उनकी सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है.

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First published: November 14, 2019, 12:55 PM IST
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