लॉकडाउन में शराब की बिक्री पर रोक लगाने के लिए इलाहाबाद HC को भेजा ऑनलाइन पत्र

इस मामले की अगली सुनवाई 11 मई को होगी
इस मामले की अगली सुनवाई 11 मई को होगी

पत्र में कहा गया है कि शराब की दुकानों पर पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो रहा है. लिहाजा यूपी में शराब की दुकानों को तत्काल बंद किया जाना चाहिए. पत्र में यह भी कहा गया है कि कोर्ट सरकार की मंशा और अर्थव्यवस्था को देखते हुए ऑनलाइन बिक्री या होम डिलीवरी आदेश दे.

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प्रयागराज. लॉकडाउन (Lockdown) में शराब की दुकानों (Liquor Shops) को खोलने के योगी सरकार (Yogi Government) के फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) के चीफ जस्टिस और रजिस्ट्रार जनरल को ऑनलाइन पत्र भेजकर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है. पत्र में कहा गया है कि शराब की दुकानों पर पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो रहा है. लिहाजा यूपी में शराब की दुकानों को तत्काल बंद किया जाना चाहिए. पत्र में यह भी कहा गया है कि कोर्ट सरकार की मंशा और अर्थव्यवस्था को देखते हुए ऑनलाइन बिक्री या होम डिलीवरी का आदेश दे.

हाईकोर्ट के अधिवक्ता सुनील चौधरी ने ऑनलाइन ई-मेल भेजकर कोर्ट से यह मांग की है. बता दें याची अधिवक्ता पूर्व में भी प्रयागराज और मेरठ में रेड लाइट एरिया को लेकर जनहित याचिका दाखिल कर चुके हैं. याची की जनहित याचिका पर कोर्ट ने प्रयागराज के मीरगंज और मेरठ के रेड लाइट एरिया को पूरी तरह से बंद कराया था.

बता दें सोमवार को लॉकडाउन फेज थ्री की शुरुआत हुई. हालांकि इस दौरान आम लोगों की परेशानियों को देखते हुए सरकार ने कुछ रियायत भी दी है. साथ ही राजस्व जुटाने के लिए रेड जोन के हॉटस्पॉट व कन्टेनमेंट इलाकों  को छोड़कर सभी जगह शराब की बिक्री शुरू हो गई. सोमवार को जब 40 दिन बाद शराब की दुकानें खुली तो लोगों की बेतहाशा भीड़ दुकानों पर उमड़ पड़ी. इस दौरान कई जगह से ऐसी तस्वीरें भी आईं जहां सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाई गई. इतना ही नहीं कई जगह से लाठीचार्ज की सूचना भी आई. जिसके बाद कई जगह शराब की दुकानों को बंद भी करना पड़ा.



सरकार के फैसले पर उठे सवाल
40 दिनों तक शराब की बिक्री पर रोक के बाद लॉकडाउन थ्री में इसे खोलने के फैसले ओअर उस वक्त सवाल उठने लगा जब प्रशासनिक लापरवाही और खुद लोग शराब के लिए नियमों की धज्जियां उड़ाते दिखे. आलम यह था कि लोग जल्द से जल्द और ज्यादा से ज्यादा शराब बटोरने की होड़ में लगे रहे. उन्हें इन बात की भी परवाह नहीं थी कि वे खुद व अपने परिवार को खतरे में डाल रहे हैं. इन तस्वीरों को देखने के बाद सवाल यह उठ रहा है कि राजस्व जुटाना तो जरुरी है, लेकिन क्या लोगों की जिन्दगी दांव पर लगाकर?

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